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मनन सिंह

Drama

4  

मनन सिंह

Drama

कुत्ते

कुत्ते

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कुत्तों का झुंड भौंकते हुए दूर से आती आवाज की तरफ बढ़ा। आवाज धीरे धीरे नजदीक आती गई। लगता था कि रात की खामोशी के कारण वैसा था। पर थोड़ी ही देर बाद आवाजें तेज हुईं, उधर से, फिर इधर से। उधर वाला कुत्तों का झुंड अब पहले झुंड के सम्मुख था। परस्पर के मेल मिलाप के उपरांत भय और आशंका निर्मूल हो चुके थे।

अब झुंड एक था। पर यह क्या.....? फिर कहीं दूर से भौं भौं का मद्धिम स्वर सुनाई पड़ा। सबके कान खड़े हो गए। कहीं कुत्तों की कोई टोली लिए आदमी तो नहीं आ रहे, डाका डालने या खून की होली खेलने। इधर से भी भौं भौं की कर्कश आवाजें सुनसान वातावरण को चीरकर दिग्दिगंत में फैलने लगीं। उभय पक्ष की ध्वनियां पास होती गईं;इधर की उधर,उधर की इधर। फिर कुत्तों का एक झुंड मिला।

पहचान हुई। झुंड एक हुआ। यही क्रम चलता रहा। एक झुंड की आवाज सुन अन्य झुंड पहले आशंकित होता,आगे बढ़ता,मेल मिलाप होता,फिर झुंड बड़ा हो जाता। होते होते अब यह झुंड और बड़ा हो चुका था, गांव भर का। भौं भौं की प्रतिध्वनि आती थी, बस।


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