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Hritik Swain

Action Fantasy Thriller

4  

Hritik Swain

Action Fantasy Thriller

कोड रेड: अंतिम 420 सेकंड

कोड रेड: अंतिम 420 सेकंड

7 mins
3

रात के 2:14 बजे थे। दिल्ली का रायसीना हिल्स शांत था, लेकिन 'साउथ ब्लॉक' के नीचे 50 फीट गहरे एक बंकर में हलचल मची थी। प्रधानमंत्री 'रणविजय सिंह' को उनके शयनकक्ष से सीधे यहाँ लाया गया था।
​मेज पर एक लाल फाइल थी और सामने लगी विशाल स्क्रीन पर पड़ोसी देश 'एक्स' का मानचित्र। वहां तीन बिंदु तेजी से झपक रहे थे।
​"सर, 'धनुष' सिस्टम ने सिग्नल पकड़े हैं," राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार  विक्रम मल्होत्रा ने पसीना पोंछते हुए कहा। "दुश्मन के 'साइलो-7' में हलचल हुई है। थर्मल इमेजरी बता रही है कि मिसाइलों के इंजन गर्म हो चुके हैं। हमारे पास केवल 7 मिनट हैं।"

​रणविजय सिंह ने चश्मा उतारा। "क्या यह पुख्ता है, विक्रम? क्या उन्होंने वास्तव में 'लॉन्च' कर दिया है?"
​"यही तो समस्या है, सर," रॉ के चीफ ने हस्तक्षेप किया। "हमारी 'ह्यूमिंट'  कहती है कि वहां तख्तापलट की कोशिश हो रही है। मुमकिन है कि ये सिग्नल केवल एक 'शॉक टैक्टिक' हों। लेकिन अगर ये असली परमाणु मिसाइलें हैं, तो 420 सेकंड बाद दिल्ली, मुंबई और चंडीगढ़ केवल राख के ढेर होंगे।"

​प्रधानमंत्री के सामने दो रास्ते थे:
​विकल्प अ : अपनी मिसाइलें अभी छोड़ दें। दुश्मन को संभलने का मौका न दें। लाखों दुश्मन मारे जाएंगे, लेकिन अपना देश बच सकता है।
​विकल्प ब : पुष्टि का इंतजार करें। यदि सूचना गलत निकली, तो युद्ध टल जाएगा। लेकिन अगर सूचना सही निकली, तो भारत का नक्शा हमेशा के लिए मिट जाएगा।
​"सर, एयर चीफ मार्शल लाइन पर हैं। वे 'अथॉराइजेशन कोड' मांग रहे हैं," ऑपरेटर ने चिल्लाकर कहा।

​रणविजय को अपने बचपन का वह गाँव याद आया, जहाँ अब भी बिजली मुश्किल से पहुँचती है। उन्हें याद आए वे करोड़ों किसान, छात्र और मासूम बच्चे जो इस समय गहरी नींद में थे। क्या उनका जीवन एक 'शायद' पर दांव पर लगाया जा सकता है?
​उन्होंने अपने सामने रखे 'परमाणु ब्रीफकेस' को देखा। वह मौत का संदूक था।

​"4 मिनट बचे हैं!"
​बंकर में सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की टिक-टिक हथौड़े की तरह लग रही थी। अचानक, एक नया इनपुट आया। साइबर विंग ने बताया कि दुश्मन के कमांड सेंटर से एक 'एन्क्रिप्टेड' संदेश लीक हुआ है।
​कोड था: "मिराज" ।
​NSA ने कहा, "इसका मतलब यह धोखा है! वे हमें उकसा रहे हैं ताकि हम पहले हमला करें और दुनिया की नजरों में विलेन बन जाएं!"
लेकिन तभी रडार ऑफिसर चिल्लाया, "सर! तीन अज्ञात वस्तुएं हमारी सीमा की ओर बढ़ रही हैं! स्पीड मैक 5! ये मिराज नहीं हैं, ये असली हैं!"

​रणविजय सिंह की आँखें जम गईं। एक तरफ 'मिराज' शब्द का अर्थ था 'धोखा', दूसरी तरफ रडार पर बढ़ती मौत।
​"विक्रम," प्रधानमंत्री ने शांत स्वर में कहा। "इतिहास मुझे एक कायर प्रधानमंत्री के रूप में याद रख सकता है जो अपने देश की रक्षा नहीं कर पाया, या एक ऐसे हत्यारे के रूप में जिसने बिना सबूत के युद्ध शुरू किया। मैं तीसरा रास्ता चुनूंगा।"
​"तीसरा रास्ता?"
​"हमारी 'इंटरसेप्टर मिसाइलों' को सक्रिय करो। हम हमला नहीं करेंगे, हम केवल 'ढाल' बनेंगे। और उसी क्षण, रेडियो फ्रीक्वेंसी पर उनके जनरल से सीधे बात करो। उन्हें बताओ कि मेरी उंगली बटन पर है, लेकिन मैं दबा नहीं रहा हूँ। उन्हें सोचने का एक आखिरी मौका दो।"

​बंकर के भीतर की हवा भारी हो गई थी। एयर कंडीशनिंग पूरी क्षमता पर चल रही थी, फिर भी रणविजय के माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। रडार की स्क्रीन पर वे तीन बिंदु अब भारतीय वायु क्षेत्र की सीमा के बेहद करीब थे।
​"सर, दुश्मन के रेडियो साइलेंस का मतलब साफ़ है," नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) मल्होत्रा ने फुसफुसाते हुए कहा। "वे बात नहीं करना चाहते। उन्होंने अपना पासा फेंक दिया है। हमारे पास अब केवल 180 सेकंड बचे हैं। अगर हमने अभी रीटेलिएशन (प्रतिशोध) शुरू नहीं किया, तो हमारे कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर पहले ही हमले में नष्ट हो जाएंगे। हम 'अंधे' हो जाएंगे।"
​रणविजय ने सामने लगी स्क्रीन पर भारत के नक्शे को देखा। वह जानते थे कि परमाणु सिद्धांत कहता है: 'No First Use'। लेकिन वह सिद्धांत तब के लिए था जब कूटनीति की गुंजाइश हो। यहाँ तो कूटनीति दम तोड़ चुकी थी।
​"विक्रम," रणविजय की आवाज़ गूँजी। "मुझे उस युवा इंटेलिजेंस ऑफिसर से बात करनी है जिसने यह इनपुट दिया है। अभी।"
​दो सेकंड बाद, स्क्रीन पर एक युवा चेहरा उभरा—आर्यन। उसकी आँखों में थकान और खौफ साफ़ दिख रहा था। वह सरहद के पास एक गुप्त निगरानी केंद्र में था।
​"आर्यन, तुम कह रहे हो कि तुमने लॉन्च की आवाज़ सुनी, लेकिन सैटेलाइट कह रहा है कि साइलो से धुआं नहीं निकला। क्या तुम अपनी बात पर कायम हो?" प्रधानमंत्री ने सीधे उसकी आँखों में देखकर पूछा।
​आर्यन हिचकिचाया। "सर... मैंने वो फ्रीक्वेंसी सुनी है जो सिर्फ परमाणु मिसाइल छोड़ते समय गूँजती है। लेकिन रडार पर जो सिग्नल हैं... वे कुछ 'अजीब' हैं। वे बहुत तेज़ हैं, लेकिन उनका सिग्नेचर (हस्ताक्षर) बदल रहा है।"

​वॉर रूम में सन्नाटा छा गया। "हस्ताक्षर बदल रहा है?" वायु सेना प्रमुख ने चिल्ला कर पूछा। "इसका क्या मतलब है? मिसाइल अपना भौतिक स्वरूप नहीं बदल सकती।"
​यहीं से रणनीति में मोड़ आया। रणविजय को 'मिराज'  शब्द याद आया। उन्होंने अपनी आँखें बंद कीं और उस पुराने युद्ध अभ्यास के बारे में सोचा जो उन्होंने रक्षा मंत्री रहते हुए देखा था।
​"क्या यह मुमकिन है कि ये मिसाइलें न हों?" रणविजय ने अचानक पूछा। "क्या यह 'इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर' हो सकता है? वे हमारे रडार को वो दिखा रहे हैं जो वो दिखाना चाहते हैं।"
​"सर, रडार पर दिखने वाली वस्तुएं भौतिक हैं!" रडार ऑफिसर ने टोकते हुए कहा। "वे हवा को चीर रही हैं। वे 90 सेकंड में टकराएंगी।"
​रणविजय ने गहरी सांस ली। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा जुआ था। "सभी स्ट्राइक यूनिट्स को स्टैंड-डाउन का आदेश दें। हम परमाणु हमला नहीं करेंगे।"
​बंकर में मौजूद हर अधिकारी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। "सर! यह आत्महत्या है!" मल्होत्रा चिल्लाए।
​"नहीं," रणविजय ने शांत स्वर में कहा। "हम अपनी इंटरसेप्टर मिसाइलें (Prithvi Air Defence) छोड़ेंगे। लेकिन हमारा लक्ष्य दुश्मन का देश नहीं, बल्कि अपनी सीमा के भीतर उन 'वस्तुओं' को गिराना होगा। हम उन्हें सीमा पार नहीं करने देंगे, लेकिन हम युद्ध की शुरुआत भी नहीं करेंगे।"

​उलटी गिनती शुरू हुई। 60... 59... 58...
​भारत की इंटरसेप्टर मिसाइलें श्रीहरिकोटा और चंडीगढ़ के पास से गरजती हुई ऊपर उठीं। बंकर में लगी बड़ी स्क्रीन पर दो तरह के बिंदु आपस में टकराने के लिए बढ़ रहे थे।
​रणविजय के हाथ कांप रहे थे। अगर वह गलत निकले, तो अगले एक मिनट में सब कुछ खत्म हो जाएगा। उनकी पत्नी, उनका बेटा, उनका पोता—सभी उसी दिल्ली में थे जिसे शायद अब आग का गोला बनना था।
​स्क्रीन पर दो बिंदु एक-दूसरे के ऊपर आए। एक सफेद रोशनी चमकी। फिर दूसरी। फिर तीसरी।
​सबकी सांसें रुक गईं। रेडिएशन सेंसर की रीडिंग का इंतज़ार होने लगा।
​"रीडिंग क्या है?" एयर चीफ ने चिल्ला कर पूछा।
​"सर... शून्य।" ऑपरेटर की आवाज़ कांप रही थी। "कोई थर्मल स्पाइक नहीं। कोई रेडिएशन नहीं। वे... वे परमाणु मिसाइलें नहीं थीं।"
​पूरे वॉर रूम में एक साथ सबकी सांसें निकलीं। वे 'डमी मिसाइलें' थीं। उनमें केवल धातु और कुछ ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे थे जो रडार पर परमाणु मिसाइल जैसा भ्रम पैदा कर सकें।

​दुश्मन ने चाल चली थी। वे चाहते थे कि भारत घबराकर परमाणु हमला कर दे। अगर भारत ने ऐसा किया होता, तो दुनिया के सामने भारत 'हमलावर' साबित होता और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया जाता।
​रणविजय सिंह कुर्सी पर ढह गए। लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ था।
​"विक्रम," उन्होंने NSA की ओर देखा। "अब हमारी बारी है। उन्हें फोन लगाओ। उनके जनरल से कहो कि हमने उनकी 'मृगतृष्णा' देख ली है। और उन्हें यह भी बताओ कि हमारी 'असली' मिसाइलें अब उनके साइलो पर लॉक हैं। अगर अगली एक मिनट में उन्होंने अपनी सेना पीछे नहीं हटाई, तो इस बार 'मिराज' नहीं होगा।"
​दस सेकंड बाद, सीमा पर हलचल बंद हो गई। कूटनीति असफल हो चुकी थी, लेकिन एक व्यक्ति के 'रणनीतिक धैर्य' और 'संदेह' ने सर्वनाश को टाल दिया।

​जब प्रधानमंत्री बंकर से बाहर निकले, तो सुबह की पहली किरण रायसीना हिल्स पर पड़ रही थी। लोग जाग रहे थे, दूध की गाड़ियाँ सड़क पर थीं, और अखबार वाले अपनी साइकिलों पर थे।
​किसी को नहीं पता था कि पिछली रात दुनिया खत्म होने के कितने करीब थी। रणविजय ने गहरी सांस ली और मन ही मन सोचा—"कूटनीति असफल हो सकती है, लेकिन विवेक कभी असफल नहीं होना चाहिए।"
​अगले 120 सेकंड सांसें रोक देने वाले थे। इंटरसेप्टर मिसाइलें गरजती हुई आसमान की ओर बढ़ीं। आकाश में तीन बड़े धमाके हुए। क्या वे परमाणु बम थे? नहीं।
​वे 'डमी मिसाइलें' थीं जिनमें केवल रेडियोधर्मी कचरा भरा था ताकि रडार उन्हें असली समझे। दुश्मन वास्तव में भारत को 'पहले हमला' करने के लिए उकसा रहा था ताकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भारत पर प्रतिबंध लगा सके।
​रणविजय सिंह की 'रणनीतिक धैर्य' ने न केवल देश को बचाया, बल्कि परमाणु युद्ध को भी टाल दिया।


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