Abhari letter
Abhari letter
मेरी प्रेरणा और मेरी शक्ति के नाम,
आज जब मैं यह पत्र लिखने बैठी हूँ, तो मेरे पास शब्दों का अंबार है, लेकिन उन शब्दों को पिरोने के लिए जज्बात और भी गहरे हैं। StoryMirror के इस मंच ने मुझे वह अवसर दिया है कि मैं उन खामोश एहसासों को आवाज दे सकूँ, जो सालों से मेरे दिल के किसी कोने में दबे हुए थे। यह पत्र उस महिला के लिए है जिसने न केवल मेरा हाथ थामा, बल्कि मुझे खुद पर विश्वास करना सिखाया।
मुझे याद है वे दिन, जब आसमान में बादल होने पर मैं डर जाया करती थी, लेकिन तुमने मुझे सिखाया कि बारिश के बाद ही इंद्रधनुष निकलता है। तुम्हारी वह छोटी-छोटी बातें, जैसे—"हारना बुरा नहीं है, हार मान लेना बुरा है"—आज मेरे जीवन का मंत्र बन चुकी हैं। मैंने कभी तुम्हें औपचारिक रूप से 'धन्यवाद' नहीं कहा, क्योंकि मुझे लगा कि तुम्हारी ममता और तुम्हारे बलिदान का आभार किसी एक शब्द में सिमट ही नहीं सकता। पर आज मुझे समझ आता है कि अनकही बातें अक्सर बोझ बन जाती हैं, और आभार व्यक्त करना उस रिश्ते को और भी सुंदर बना देता है।
तुमने अपनी खुशियों को किनारे रखकर मेरी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा किया। जब पूरी दुनिया मुझे मेरी कमियों के आईने में देख रही थी, तब तुमने मेरी खूबियों को तराशा। तुमने मुझे सिखाया कि एक स्त्री होने का मतलब सिर्फ सहनशीलता नहीं, बल्कि अपनी आवाज को सही दिशा में उठाना भी है। तुम्हारी वजह से ही आज मैं इस काबिल बनी हूँ कि अपने सपनों को हकीकत में बदलने का साहस जुटा पा रही हूँ।
यह पत्र केवल मेरी भावनाओं का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि उस कर्ज को स्वीकार करने की एक छोटी सी कोशिश है जिसे मैं कभी चुका नहीं सकती। तुम्हारी मुस्कुराहट मेरी सबसे बड़ी जीत है और तुम्हारा संतोष मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि। शुक्रिया, मुझे वह 'मैं' बनाने के लिए, जो आज मैं हूँ। शुक्रिया, मेरे अंधेरों में रोशनी की किरण बनने के लिए।
मैं वादा करती हूँ कि तुम्हारी दी हुई सीख और तुम्हारे आदर्शों को हमेशा अपने साथ रखूँगी। तुम जहाँ भी हो, यह जान लो कि तुम्हारी मेहनत और तुम्हारा निस्वार्थ प्रेम कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। मेरी हर सफलता में तुम्हारा अक्स झलकेगा।
प्रिय, Priya और तुम्हारी,
Lovely
