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Hritik Swain

Children Stories

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Hritik Swain

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पांडवों का वनवास

पांडवों का वनवास

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जब पांडव जुए के खेल में अपना सब कुछ हारकर 12 वर्ष के वनवास पर थे, तब वे एक घने जंगल से गुजर रहे थे। चलते-चलते उन्हें बहुत तेज प्यास लगी। पांचों भाई थककर एक वृक्ष के नीचे बैठ गए।
​प्यास की खोज
​युधिष्ठिर ने सबसे छोटे भाई नकुल को पानी की तलाश में भेजा। नकुल चलते-चलते एक सुंदर जलाशय (तालाब) के पास पहुँचे। जैसे ही उन्होंने पानी पीने के लिए हाथ बढ़ाया, एक अदृश्य आवाज गूंजी:
​"ठहरो! यह जलाशय मेरा है। यदि तुम्हें इसका जल पीना है, तो पहले मेरे प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। यदि तुम बिना उत्तर दिए जल पियोगे, तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी।"
​नकुल ने प्यास के कारण उस चेतावनी को अनसुना कर दिया और पानी पी लिया। पानी पीते ही वे निष्प्राण होकर गिर पड़े। जब नकुल नहीं लौटे, तो युधिष्ठिर ने एक-एक करके सहदेव, अर्जुन और फिर भीम को भेजा। उन सभी के साथ वही हुआ—सबने चेतावनी को अनसुना किया और जल पीकर मूर्छित हो गए।
​युधिष्ठिर और यक्ष का संवाद
​अंत में चिंतित होकर महाराज युधिष्ठिर स्वयं उस जलाशय पर पहुँचे। अपने चारों भाइयों को मृत पड़ा देख वे गहरे शोक में डूब गए। तभी वही रहस्यमयी आवाज फिर सुनाई दी। युधिष्ठिर समझ गए कि यह कोई साधारण जीव नहीं बल्कि कोई 'यक्ष' है।
​युधिष्ठिर ने विनम्रतापूर्वक कहा, "आप प्रश्न पूछिए, मैं अपनी बुद्धि के अनुसार उत्तर देने का प्रयास करूँगा।"
​यक्ष ने कई कठिन प्रश्न पूछे, जिनके उत्तर युधिष्ठिर ने बड़ी कुशलता से दिए:प्रश्न युधिष्ठिर का उत्तर
सूर्य को कौन उदय करता है? ब्रह्मा (परमात्मा की शक्ति)।
भूमि से भारी क्या है? माँ (माता का स्थान भूमि से भी ऊपर है)।
आकाश से ऊँचा क्या है? पिता।
हवा से भी तेज क्या चलता है? मन।
विदेश जाने वाले का साथी कौन होता है? विद्या (ज्ञान)।
सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? हर दिन लोग मृत्यु को देखते हैं, फिर भी जो जीवित हैं वे अमर रहने की इच्छा रखते हैं। यही सबसे बड़ा आश्चर्य है।यक्ष का न्याय और वरदान
​युधिष्ठिर के उत्तरों से यक्ष अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा, "मैं तुम्हारे किसी एक भाई को जीवित कर सकता हूँ। बताओ किसे चुनोगे?"
​युधिष्ठिर ने कुछ पल सोचा और कहा, "नकुल को जीवित कर दीजिए।"
​यक्ष हैरान हुए और बोले, "तुमने भीम और अर्जुन जैसे पराक्रमी भाइयों को छोड़कर नकुल को क्यों चुना?"
​युधिष्ठिर ने शांति से उत्तर दिया:
​"मेरे पिता की दो पत्नियाँ थीं—कुंती और माद्री। कुंती का एक पुत्र (मैं) जीवित हूँ। न्याय यही कहता है कि माता माद्री का भी एक पुत्र जीवित रहे ताकि वे निःसंतान न रहें।"
​उनकी इस धर्मपरायणता और निष्पक्षता को देखकर यक्ष प्रकट हो गए। वे वास्तव में धर्मराज (यमराज) थे। उन्होंने प्रसन्न होकर न केवल नकुल को, बल्कि चारों भाइयों को जीवित कर दिया।
​कहानी का सार
​यह कहानी हमें सिखाती है कि चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न हो, इंसान को अपना धैर्य  और धर्म  नहीं छोड़ना चाहिए। ज्ञान और विनम्रता से बड़े से बड़े संकट को टाला जा सकता है।



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