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खुशियों की आहट

खुशियों की आहट

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आज सुखिया के हाथों में काम की तेजी कुछ अलग ही थी ...वह खाना बनाने के साथ-साथ गुनगुना भी रही थी....फिर धीरे से बोली...


" भगवान मेरी मालकिन को हमेशा सलामत रखें...


वरना कौन करता है आज के जमाने में ऐसा... दूसरे घरों में तो लोग बासी खाना दे कर भी एहसान जता देते है पर यहाँ पर तो मालकिन जब भी कुछ अच्छा बनवाती है तो मेरे बेटे के लिए जरुरी देती है ....


आज दो बरस बाद उनका बड़ा बेटा विदेश से वापस आ रहा है और उनके साथ कुछ मेहमान भी होगें..इसलिए आज मालकिन ने खास गाजर का हलवा बनाने के लिए बोला है ....


मैं आज इतना शानदार हलवा बनाऊँगी की सब लोग अंगुलियां चाटते रह जायेगें... 

हलवे के साथ साथ एक तरफ दम आलू बन रहे थे ..तो दूसरी तरफ कढ़ाई पनीर बन रहा था साथ ही साथ मटर पुलॉव भी अपनी सुंगध से रसोई को सुंगधित कर रहा है....

अभी सुखिया सलाद को करीने से लगा ही रही थी की उसे आवाज सुनाई दी ...


" अरे सुखिया कहाँ हो ....देखो ना मेहमान आ गये है जल्दी से पानी और मीठा ले आओ और फिर भोजन भी लगा देना .."


जी मालकिन बोलते हुए सुखिया के हाथों की तेजी और बढ़ गयी थी ....


लदंन से आये बड़े भईया के दोस्तों के लिए भारतीय व्यंजन किसी अजूबे से कम नहीं थे ....


वो सब तारीफ करते जा रहे थे और भोजन के साथ इन्साफ करते जा रहे थे....एक एक कर बरतन खाली होते जा रहे थे ..साथ ही खाली हो रही थी सुखिया की उम्मीदें जो उसने भोजन बनाते वक्त एक एक कर अलगनी पर सुखाई थी ...


गाजर का हलवा देखकर तो बचुआ नाच उठेगा ...पुलाव में तो उसकी जान बसती है ...और दम आलू उसका बस चले तो खाली ही खा जाये पूरा रोटी की जरूरत किसको है 


...पर अब सूना दस्तरख़ान जैसे उसे मुँह चिढ़ा रहा था ...रोकने की कोशिश करते हुए भी दो बेईमान आँसू उसकी पलको से फरार हो ही गये थे ...


बुझे मन से उसने जूठे बरतन उठाये और रसोई में जाकर सारा फैलावा समेटने में लग गयी ....और फिर बड़बड़ाई..


" सब खत्म हो गया तो कोई बात नहीं आज बजारे की रोटी बना दूँगी बचुआ के लिए... सुखिया ने खुद को तसल्ली दी .."


तभी दरव़ाजे की डोरबेल बजी ...जाहिर था यह भी उसके काम का हिस्सा था तो उसने जाकर दरवाजा खोला ...इस उम्मीद के साथ काश कोई और भी मेहमान आ जाये तो वो कुछ और अच्छा सा फिर से बनाये और थोड़ा सा अपने बेटे के लिए भी ले जाये ....


पर दरवाजे पर रेड टीशर्ट में हाथ में कुछ चमकीली पन्नी लिए कोई खड़ा था ...


तभी पीछे से छोटे भाई बोले ..अरे वाह इतनी जल्दी मेरा आर्डर आ भी गया ...


जी सर आपने जो भी मँगवाया था इसमें सब है ...दम आलू ,नॉन ,कड़ाई पनीर ,पुलाव और हाँ मीठे में गाजर का हलवा भी....


बेटे ने पैकेट हाथ में लेकर सुखिया को पकड़ाते हुए बोला ...अम्मा यह अपने बेटे के लिए ले जाना ....आपने यह कैसे सोच लिया की आज हमारे दूसरे घर में पार्टी नहीं होगी ...हमारे तो हमेशा दोनों घरों में साथ में पार्टी होती है ...होती है ना ..





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