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" घोस्ट गैंग " भाग - 1

" घोस्ट गैंग " भाग - 1

15 mins 726 15 mins 726

कॉलेज कैम्पस में स्विमिंग पूल के किनारे पूरी मण्डली जमा थी, पूरा कॉलेज उन्हें घोस्ट गैंग के नाम से जानता था। वो सब के सब सच में शैतानी में उस्ताद थे पूरे कॉलेज में किसी की हिम्मत नहीं थी की वो इन सबसे पंगा ले सके। इस गैंग में पूरे आठ लोग थे, जिनमें पाँच लड़के और तीन लड़कियां थी। आज वो सब के सब क्लास ना होने के कारण टाइम पास के लिए सबका फेवरेट गेम ट्रुथ और डेयर खेलने में लगे हुये थे।


जहाँ शिवम खुद को हॉलीवुड हीरो से कम नहीं समझता था, वहीं दूसरी तरफ करण कराटे चैम्पियन था। समर बहुत अच्छा पेन्टर था और वैभव किताबी कीड़ा। इन सब से अलग पृथ्वी जाने किस दुनिया का वासी था? सबको शक था की कही वो कोई एलियन तो नहीं है। वैसे इस गैंग की लड़कियां भी कुछ कम नहीं थी। पर्ल अपने नाम की तरह ही थी बिल्कुल मोती की तरह शुद्ध और सफेद, वहीं दूसरी तरफ समायरा भी खूबसूरती में अप्सराओं को मात दे देती थी, पर इन सबसे अलग टिया पूरी टॉम बॉय थी। दुनिया का शायद ही ऐसा कोई काम होगा जो टिया को ना आता हो।


गेम में वो सब इस कदर खोये हुये थे की उन्हें आस पास से मतलब ही नहीं था। इस बार बॉटल टिया के सामने रूकी थी, और सबने जोर जोर से हूटिंग करनी स्टार्ट कर दी। करण टिया को देखते हुये बोला,


"बोलो टिया क्या चूज करना है ट्रुथ या डेयर? वैसे डेयर तो लेना मत। पता है हमें तुम्हें दुनिया जहान के काम आते है तो आज तो सच का साथ दो, दोगी ना”


करण की बात सुनकर टिया अपने फर्जी कॉलर झाड़ते हुये बोली,


“पूछ लो पूछ लो जो पूछना चाहते हो तुम भी क्या याद करोगे की किसी टिया से तुम्हारा पाला पड़ा था”


टिया की बात सुनकर करण गम्भीर होता हुआ बोला,


“तुम अक्सर सबको कहती फिरती हो तुमने दुनिया जहान के सारे काम कर रखे है, तो क्या कभी तुमने कोई मर्डर होते हुये भी देखा है”


करण का सवाल सुनकर वैभव को गुस्सा आ गया और वो चिल्लाते हुये बोला,


“तुम्हारा दिमाग तो ठीक है कोई ऐसे सवाल करता है क्या? दूसरी तरफ टिया का चेहरा भी धुआं धुआं हो गया था”


करण सर खुजाते हुये बोला,


“मजाक कर रहा था यार, पृथ्वी! यार तेरी जिम्मेदारी तू पूछ ले टिया से सवाल"


पर इससे पहले की पृथ्वी कुछ बोलता टिया सर्द लहजे में बोली,


“रहने दो पृथ्वी मैं करण के सवाल का जवाब दे देती हूँ। हाँ मैंने अपनी आँखो से मर्डर होते हुये देखा है”


टिया की बात पर सबने अचरज से उसे देखा। तभी पृथ्वी बोला,


“टिया तुम भी ना कुछ भी बोलती हो। अच्छा चलो गेम खत्म, आज सबको मेरी तरफ से पिज्जा पार्टी। वैसे भी तुम सबको एक सरप्राइज भी तो देना है"


पृथ्वी की बात पर सबने हिप हिप हुर्रे का नारा लगाया। सिर्फ पर्ल ही थी जो इस वक्त टिया के दिल का हाल जानती थी।


वो सब पृथ्वी के साथ पिज्जा पार्टी करने निकल गये। इसके साथ ही एक साया भी पूल साइड से पीछे हट गया, जो ना जाने कब से खड़े होकर उन सबकी बातें सुन रहा था।


घोस्ट गैंग की शरारतें रास्ते में भी शुरु थी। तभी समायरा पृथ्वी से बोली,


“पृथ्वी अब बता भी दो, ऐसा क्या सरप्राइज है जो तुम जैसा कंजूस हम सब को पार्टी दे रहा है और वो भी पिज्जा की। बेटा तेरे तो बीस हजार गये आज पानी में"


समायरा की बात पर पृथ्वी मुस्कुराते हुए बोला,


“सिर्फ़ बीस हजार? अरे मैं तौ आज इतना खुश हूँ की अपनी जान भी दे सकता हूँ। वैसे एक हिन्ट दे सकता हूँ, पिज्जा हब में हम आठ से नौ हो जायेगे”


“नौ हो जायेगे क्या मतलब पृथ्वी?"


पृथ्वी की बात पर वैभव गुस्सा होता हुआ बोला,


“तुम जानते हो ना, हम सब ने एक दूसरे से वादा किया था की हमारे घोस्ट गैंग में अब कोई शामिल नहीं होगा। फिर अब कौन नया आ गया? जिससे मिलवाने के लिए तुम इतने उतावले हो रहे हो”


“शान्त हो जाओ मेरे भाई, थोड़ा तो सब्र कऱो और हाँ हमने कोई रूल नहीं तोड़ा है समझे!” इन सबकी नोकझोंक खत्म होने से पहले यह सब पिज्जा हब पहुँच चुके थे।


हर कोई पृथ्वी से थोड़ा खफा था। पिज्जा हब में उन सबके लिए पहले से ही टेबल बुक थी। तभी पृथ्वी से सस्पेंस बनाते हुए सबको अपनी आँखे बन्द करने के लिए बोला। पृथ्वी की बात पर टिया झुंझलाते हुये बोली,


“क्या मजाक लगा रखा है तुमने पृथ्वी मैं जा रही हूँ यहाँ से"


टिया की बात पर पृथ्वी ने खुद आगे बढ़ कर उसकी आँखें बन्द कर दी और बोला,


"तुमने जिन्दगी में कभी कोई काम सीधे तरीक़े से किया है जो आज करोगी? तुम्हारी आँखें भी मुझे ही बन्द करने पड़ेगी"


अपनी मनमानी करने के बाद पृथ्वी ने सबको एक साथ आँखें खोलने के लिए बोला। उन सबके सामने रेड कलर का टॉप और नीली जीन्स पहने एक लड़की खड़ी थी जिसको सब के सब पहचानते थे।


“अरे टिंवकल तुम! तुम इन्डिया वापस कब आयी? और आयी तो आयी, तुम्हें यह डफर ही मिला अपने आने का बताने के लिए। हम सबको बताती ना तुम वापस आ रही हो” करण खुशी से चहकते हुए बोला


टिंवकल उन सबकी बचपन की दोस्त थी। असल में बचपन में बना यह घोस्ट गैंग नौ बच्चों का था पर टिंवकल के पापा विदेश सैटल हो गये और टिंवकल को सबकुछ छोड़ कर विदेश जाना पड़ा। टिंवकल के विदेश चले जाने पर यह सब दोस्त बहुत उदास हुये थे पर बड़ो की मर्जी के आगे बस भी तो नहीं चलता है ना। तो टिंवकल को भी सब कुछ छोड़ कर जाना पड़ा था। वैसे तो फोन व्हात्सप्प वीडियो कॉल सब कुछ था पर जब टिंवकल वापस आती तो सबकी शैतानी सौ गुना बढ़ जाती थी।


और अब एक बार फिर टिंवकल का वापस आना मतलब कोई नया धमाका पक्का था।


“वैसे इस बार महारानी विक्टोरिया ने कितने दिनों के लिए दर्शन दिया है बतायेगी जरा?"


यह कहते हुये शिवम की आँखों में दिये जल गये। वैसे तो उसे अपना हर दोस्त बहुत पसंद था पर टिंवकल उसके लिए उसके दिल में जगह ही अलग थी और बहुत बाद में जाकर शिवम को अहसास हुआ की वो खास जगह इसलिए थी क्योंकि टिंवकल सिर्फ़ उसकी दोस्त नहीं उसका प्यार थी। यह बात अलग है शिवम ने कभी टिंवकल को कुछ नहीं बोला था। शिवम की बात का टिंवकल कुछ जवाब देती उससे पहले ही पृथ्वी बोल पड़ा,


“अरे डफर हो तुम सब, तुम सब को क्या लग रहा है टिंवकल का आना सरप्राइज है जिसके लिए मैं पिज्जा पार्टी दे रहा हूँ। अरे मैं अब इतना भी शरीफ नहीं हूँ। सरप्राइज तो अभी बाकी है मेरे दोस्त"


पृथ्वी की बात पर वैभव चिढ़ता हुआ बोला,

“बस बहुत हो गया तुम्हारा यह लुकाछिपी का खेल अब सीधे सीधे बताते हो या मैं तुम्हारी कुटाई करूँ? तब तुम्हारे मुँह से बोल फूटेगें"


वैभव की बात पर पृथ्वी जोर जोर से हँसने लगा इतना की उसकी आँखों में आसूँ आ गये


“तुम, वैभव तुम? और मेरी कुटाई करोगे? हो ही नहीं सकता। तुम मेरे लिए दुनिया जहान से लड़ सकते हो पर मुझ पर हाथ नहीं उठा सकते मुझे पता है। अच्छा बहुत देर हो गयी अब मैं बताता हूँ तुम सबको की आखिर सरप्राइज है क्या” यह कहते हुये पृथ्वी ने सबके हाथ में एक एक लिफाफा पकड़ाया और एक बार फिर संस्पेंस बनाता हुआ बोला “इस लिफाफे में आप सभी के लिए जोधपुर की फ्लाइट के टिकट है और इस महीने के आखिरी दिन पर मैं और टिंवकल जोधपुर में मँगनी कर रहे है। और एक बात अब टिंवकल हमेशा के लिए इन्डिया वापस आ गयी है और अब हमारे साथ हमारे ही कॉलेज में अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करेगी"


खबर थी या बम समायरा समझ ही नहीं पायी उसने बहुत मुश्किल से अपने लड़खड़ाते कदमों को संभाला और टिया के कानों में बोली,


“टिया मैं जरा वॉशरूम होकर आती हूँ"


टिया ने एक बार हैरानी से समायरा के उड़ते हुए रंग को देखा और हाँ में सर हिला दिया। शिवम की हालत भी समायरा से कुछ अलग नहीं थी। कुछ खोने का अहसास बहुत तेजी से उसे अपने गिरफ्त में ले रहा था। टिंवकल को सामने देख उसने आज दिल में पक्का इरादा कर लिया, की वो उसे अपने दिल का राज बता देगा पर अब तो शून्य से आगे कुछ नजर ही नहीं आ रहा था।


इधर समायरा ने खुद को वॉशरूम में बन्द किया और अपनी सिसकियों को कन्ट्रोल करने की नाकाम कोशिश करने लगी। वो पृथ्वी को कब दिल ही दिल मे चाहने लगी थी उसके फरिश्तों को भी इसकी खबर नहीं थी। वो वैसे चाहे कितनी ही बोल्ड क्यों ना हो, पर एक फितरती झिझक थी जो वो अपने दिल की बात आज तक पृथ्वी से ना कह सकी। अब आगे क्या है उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो कैसे पृथ्वी को किसी और का होता हुआ देखेगी? यह एक बड़ा सवाल था। उसने जैसे तैसे खुद को संभाला और बाहर आकर अपना मेकअप टच अप किया और फिर जाकर अपनी मंडली में शरीक हो गयी जहाँ खुशी और कहकहे उबाल पर थे। आज महफिल में सब खुश थे सिवाय समायरा, शिवम और टिया के।


समायरा और शिवम अपनी उलझनों में उलझे थे। उधर टिया वो जब आँख बन्द करती तो एक नकाबपोश उसके आगे आकर खड़ा हो जाता। कभी कभी उसे लगता की उसे वहम हुआ था पर कभी कभी उसे लगता की सब कुछ सच है। सच और झूठ यह सवाल तीन दिन से टिया को परेशान कर रहे है। टिया अपने सवालो में उलझी थी, तभी समर अपने हाथों का माइक बना कर बोला,


“हाँ जी तो जैसा आप सब जानते है की बहुत दिनों बाद हमारा पूरा गैंग एक जगह इकट्ठा हुआ है और आज तो हम सबका जश्न मनाना बनता है ना। आज तो हमें दो दो खुशी भी मिली है, एक तो अपने नायाब कोहिनूर टिंवकल के हमेशा वापस आने की और दूसरे अपने पृथ्वी के बैन्ड बजने की। तो भाई लोग क्या बोलते तुम सब हो जाये ना अंताक्षरी! बहुत दिन हो गये हम सब ने खेला भी नहीं और शुरुआत हमारी टिंवकल ही करेगी ठीक है ना तो टिंवकल शुरू करों फिर"


और टिंवकल भी समर की बात से सहमत होकर { म } से गाना शुरू किया


“मुझसे मोहब्बत का इजहार करता काश कोई लड़का मुझे प्यार करता"


टिंवकल के गाने पर शिवम का चेहरा एक बार फिर धुआं धुआ हो गया वहीं पृथ्वी के चेहरे पर शरारत मचल रहीं थी। टिंवकल के रूकते ही वो शुरू हो गया,


“टिंवकल मैं करता तो हूँ सुबह शाम अपने प्यार का इजहार। तुम फिर भी काश बोल रही हो। पता भी है यह काश बहुत खतरनाक शब्द होता है"


पृथ्वी की बात पर एक अदा से मुस्कुरा दी टिंवकल और फिर समायरा की तरफ देखकर बोली,


“समायरा तुम्हारी बारी { त } से गाओ"


टिंवकल की बात पर समायरा ने नजर उठा कर पृथ्वी की तरफ देखा और रूधें हुये गले के साथ गाने लगी,


“तुझे ना देखूँ तो चैन मुझे आता नहीं है। एक तेरे सिवा कोई और मुझे भाता नहीं है। कही मुझे प्यार हुआ तो नहीं है"


समायरा के गाने पर समर ने पूरी दिलचस्पी से समायरा को देखा। इससे पहले वो कुछ कहता टिया बोल पड़ी,


“तो बताओ ना समायरा कहीं तुम्हें प्यार हुआ तो नहीं है"


“तुम भी ना टिया कुछ भी। हम सिर्फ गाना गा रहे थे समझे अच्छा समर अब तुम्हारी बारी { ह } से गाना है" समायरा खुद को सम्भालती हुयी बोली। समायरा की बात पर समर कूद कर बाहर आ गया और नाचते हुए गाने लगा,


“हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या कहे? बोलो तो जी यह बोलो तो मर जाये। हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या करे?"


“अब तुम्हें किससे प्यार हो गया?” पर्ल झूठा गुस्सा दिखाते हुये समर से मुखातिब हुयी।


“अरे सब्र रखो यार बहुत जल्दी तुम सबको पता लग जायेगा की हमें किससे प्यार हुआ है। वैसे सोच रहे टिंवकल और पृथ्वी की मँगनी पर हम भी अपने दिल का राज खोल ही दे। अच्छा चलो अब हमारे दूल्हे राजा पृथ्वी की बारी। ठीक है ना पृथ्वी जल्दी से { र } से गाना शुरू करो" समर बातों बातों में बहुत कुछ कह गया और यह सब कहते वक्त समायरा लगातार उसकी नजरों की जद में थी। और पृथ्वी तो जैसे मौके के इन्तजार में बैठा था। अपनी बारी आते ही झट से टिंवकल का हाथ अपने हाथ में लिया और झूमते हुये गाने लगा


“रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दिवाना, भूल कोई हमसे ना हो जाये"


पृथ्वी की ओवर एक्टिंग पर सबके पेट में हँसते हँसते दर्द हो गया तभी पृथ्वी बोला,


“अब शिवम तुम्हारी वारी { य }से गाना है ठीक है ना"


और शिवम एक बार फिर टिंवकल को अपनी आँखों में भर कर गाने लगा


“यह दुनिया यह महफिल मेरे काम की नहीं मेरे काम की नहीं”


“लो अब तुम किसकी याद में देवदास बन गये यार” करण मुस्कुराते हुए बोला


करण की बात पर शिवम ने खुद को सम्भाल लिया और बोला,


“अरे ऐसा कुछ नहीं है यार बस मुझे { य } से यही गाना याद आ रहा था। चलो अब तुम ही { ह } से गा दो ठीक है ना"


शिवम की बात पर करण ने मुस्कुराते हुए सर हिला दिया और गाने लगा


“हँसते हँसते, कट जाये रस्ते, जिन्दगी यूँ ही चलती रहे। खुशी मिले या गम, बदलेगें ना हम, दुनिया चाहे बदलती रहे। हँसते हँसते, कट जाये रस्ते"


और करण के साथ पूरा घोस्ट गैंग भी सुर में सुर मिला कर गाने लगा अपनी बारी खत्म होते ही करण बोला


“पर्ल अब तुम्हारी बारी { त } से गाओ"


“तू मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिए? ना हो तू उदास तेरे पास पास मैं रहूँगी जिन्दगी भर। सारे संसार का प्यार मैनें तुझी में पाया। तू मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिये? तू मिले"


पर्ल की आवाज भी पर्ल की तरह बहुत खूबसूरत थी। पर्ल ने जैसे बिल्कुल शमा बाँध दिया था और जब नजाकत से उसने गाना रोका तो सबकी आँखों में बस एक ही सवाल था रूक क्यों गयी पर्ल और गाओ ना। पर पर्ल एक अदा से मुस्कुराते हुए बोली,


“अगर मैं ही गाती रही तो इस फटे ढोल वैभव को कौन सुनेगा? चलो वैभव शुरू हो जाओ सबके कानों में दर्द करने के लिए। { ल } से गाना है, ठीक है ना और सुनो गाना ना आये तो चुपके से मेरे कान मे बता देना, मैं तुम्हारी मदद कर दूँगी। किसी को पता नहीं चलेगा”


पर्ल की बात पर वैभव गुस्से में उबलता हुआ बोला,


“हाँ सिर्फ तुम ही तो तानसेन की औलाद हो। कान खोल कर सुन लो पर्ल मैनें भी अपने गानें से यहाँ सबको नाचने पर मजबूर ना कर दिया तो मैं अपना नाम बदल लूँगा ठीक है ना "


“अच्छा ठीक है डन” पर्ल अपने बालों को एक अदा से झटकती हुयी बोली तो वैभव ने भी लहक लहक कर गाना शुरू कर दिया,


“ले जायेगें, ले जायेगें, दिल वाले दुल्हनिया ले जायेगें। रह जायेगें, रह जायेगें, पैसे वाले देखते रह जायेगें"


अब वैभव ने गाना ही ऐसा शुरू कर दिया था की सब लोग कुछ पलों के लिए सब कुछ भूल कर पृथ्वी और टिंवकल की खुशी के लिए नाचने लग गये। बहुत देर नाचने के बाद वैभव बोला,


“हार गयी ना तुम पर्ल चलो छोड़ो। टिया अब तुम्हारी बारी जल्दी से { ग } से गाना शुरू करों फिर हम सब लेट भी हो रहे। तुम्हारी हॉस्टल की वार्डन याद है, फिर तुम और पर्ल आज रात बाहर ही रह जाओगे”


वैभव की बात पर सबने टाइम देखा। सच में बहुत देर हो रही थी, तभी टिया ने गाना शुरू कर दिया


“गुमनाम है कोई, अन्जान है कोई, किस को खबर? कौन है वो? अन्जान है कोई?”


टिया गाना गा रही थी और उसकी आँखों के सामने फिर से वो नकाबपोश आ रहा था। टिया ने एक झटके से आँखें खोल दी और गाना रोक कर बोली,


“बहुत देर हो गयी चलों अब सब लोग वापस चलते है"


“अरे टिया पता है देर हो गयी पर तुम अपना फेवरिट मशरूम कार्निवाल पिज्जा खाये बिना जा रही हो। गलत बात ना"


समर के कहने पर सबका ध्यान गया टिया ने पिज्जा की एक बाइट भी नहीं खायी थी। पर्ल ने जल्दी से टिया का पिज्जा उठाते हुये बोली,


“कोई बात नहीं हॉस्टल जाकर खा लेगी। अब चलो सब जल्दी और करण प्लीज तुम हम दोनों को हॉस्टल छोड़ देना। तुम्हारा घर कॉलेज के पास ही है ना”


पर्ल की बात पर करण ने हाँ में सर हिला दिया और इस तरह से टिया और पर्ल करण के साथ हॉस्टल निकल गई। दूसरी तरफ ट्विंकल भी पृथ्वी के साथ घर जाने के लिए उसकी कार में बैठ गई। समर, वैभव, शिवम और समायरा भी एक कार में घर की तरफ चल दिये। वैभव की जिम्मेदारी थी की वो सबको उनके घर छोड़ता हुआ अपने घर निकल जायेगा। वैसे भी सबका घर एक लाइन में ही था।


गाड़ी में बैठते ही टिंवकल फूट फूट कर रो दी और बोली,


“तुम बहुत खराब हो पृथ्वी। सबको सच क्यों नहीं बताया? क्या फायदा है इस झूठ का? तुम्हारा कोई भी झूठ अब मेरी जिन्दगी नहीं बदल सकता। तुम्हें एक बार में समझ नहीं आता क्या? वो तो तुमने मुझे अपनी कसम दे दी थी नहीं तो मैं सबको सच बता देती"


“ओ प्लीज स्टॉप इट टिंवकल क्या होता सच बता कर? अभी हम दोनों तकलीफ में है फिर सब के सब रो रहे होते। तुम क्यों नहीं समझ रही मरने से पहले जीना छोड़ देना कोई अक्लमंदी नहीं। मरना तो हम सबको है कोई आज तो कोई कल। बस तुम्हें अपने जाने का वक्त पता है सो व्हाट? माना की डॉक्टर ने बोला की हद से हद तुम्हारे पास छः महीने है तो क्या यहाँ छः मिनट का भरोसा नहीं है और तुम से डॉक्टर ने यह भी तो बोला है की उम्मीद बनाये रखे। चमत्कार भी तो होते है ना, इलाज भी तो हो रहा है। मुझे पता है तुम ब्लड कैंसर को हरा दोगी और बस अब मैं कुछ नहीं सुनना चाहता। जितनी भी जिन्दगी है हम हर पल खुशी से जियेगें। मैं तुम्हें दुनिया की हर वो खुशी दूँगा जिसका ख्वाब एक लड़की देखती है" यह कहते हुये पृथ्वी ने अपने होठों को टिंवकल के माथे पर टिका दिया और टिंवकल ने भी अपने आँसुओं को बहने से रोक लिया। उसने सोच लिया था की वो जितनी भी जिन्दगी है उसे शानदार तरीक़े से जियेगी।


इधर करण ने टिया और पर्ल को हॉस्टल छोड़ा और अपने घर निकल गया। कैम्पस में अन्दर आते ही स्विमिंग पूल देखकर एक बार फिर टिया ने मुठ्ठियों को भींच लिया। पर्ल ने टिया को देखा और बोली,


“पर्ल तुम मान क्यों नहीं लेती की उस दिन तुम्हें वहम हुआ था। तुम खुद सोचो अगर कॉलेज में मर्डर हुआ होता तो अब तक तो हंगामा मच जाता ना पर हमें तो कुछ भी नहीं मिला। चलो अगर मैं तुम्हारी बात मान भी लूँ तो लाश कहाँ गयी कम से कम वो तो मिलती ना। पता नहीं इतनी सी बात तुम्हारे समझ में क्यों नहीं आ रही है?"


“बात तुम नहीं समझ रही हो पर्ल उस रात मौसम बहुत अच्छा था और हॉस्टल में सीनियर पार्टी कर रहे थे। तो शान्ति की तलाश में मैं यहाँ स्विमिंग पूल के किनारे बैठ कर पढ़ने लगी। तभी मैनें देखा एक लड़की की किसी से लड़ाई हो रही थी। वो बोल रही थी, “बहुत हो गया अब मैं आपसे नहीं डरूँगी। पूरी दुनिया को आपकी सच्चाई बता दूँगी। मैं अब और डर डर कर नहीं जी सकती"


तभी किसी ने उस लड़की के मुँह पर पॉलीथिन ढक दी और तक तक नहीं छोड़ा जब तक उसने दम नहीं तोड़ दिया। मैने उस लड़की को बचाने की बहुत कोशिश की पर उसके साथ दो और लोग थे जिन्होंने मुझे जबरदस्ती पकड़ लिया था और फिर पता नहीं कैसे मैं बेहोश हो गयी। होश आने पर मैनें खुद को हॉस्टल में पाया। तुम सबको लग रहा था की मैं बारिश में भीगने और ठन्ड लगने से बेहोश हो गयी थी तो ऐसा कुछ नहीं है"


“अच्छा पर तुम्हारी बात मानकर मैं तुम्हारे साथ स्विमिंग पूल पर गयी थी ना। कुछ नहीं था वहाँ कोई नामोनिशान नहीं”


टिया और पर्ल अपनी बातों में उलझी हुयी इस बात से बेखबर थी की अँधेरे का फायदा उठा कर कोई लगातार उनका पीछा कर रहा था।


#क्रमशः



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