खुशी का कारण
खुशी का कारण
खुशी का कारण
गाँव के एक किनारे पर रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास ना बड़ा खेत था, ना ढेर सारे जानवर। उसके पास बस एक पुराना झोपड़ा और छोटी सी बकरी थी, जो उसके बच्चों के लिए दूध देती थी।
उसके पड़ोसी अक्सर हैरान होते कि इतनी गरीबी के बावजूद रामू हमेशा मुस्कुराता रहता था।
एक दिन उसके गाँव में एक अमीर व्यापारी आया। व्यापारी ने देखा कि रामू झोपड़ी के बाहर बैठा, अपने बच्चों के साथ मिट्टी के खिलौनों से खेल रहा है, और सब मिलकर हँसी-खुशी में मग्न थे।
व्यापारी ने पास जाकर पूछा,
"रामू, तेरे पास ना पैसा है, ना सुख-सुविधा, फिर भी तू इतना खुश क्यों रहता है?;
रामू ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
"साहब, खुशी का कारण चीज़ें नहीं होतीं, लोग होते हैं। ये जो मेरी बकरी है, इसका दूध मेरे बच्चों के लिए काफी है। ये जो मिट्टी के खिलौने हैं, इन्हीं में मेरे बच्चों की दुनिया बसती है। और ये जो शाम की ठंडी हवा है, उसमें मेरे जीवन की सुकून है।;
व्यापारी हँसा,;अरे भाई, पैसा होगा तो बड़ी-बड़ी चीज़ें खरीद सकता है, तब असली खुशी मिलेगी।"
रामू ने सिर हिलाते हुए कहा,;पैसे से चीज़ें मिलती हैं, साहब... पर वो कारण नहीं बनतीं। खुशी का असली कारण है — संतोष।;
कुछ दिन बाद गाँव में भारी बारिश हुई और कई बड़े घरों में पानी भर गया, लेकिन रामू की झोपड़ी, जो थोड़ा ऊँचाई पर थी, बच गई। गाँव के कई लोग उसके पास आकर शरण लेने लगे। तब वही व्यापारी भी उसके पास पहुँचा, जो कभी उसे समझा रहा था कि पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है।
रामू ने उसे अपने छोटे से झोपड़े में जगह दी, बच्चों ने उसके लिए मिट्टी का खिलौना बनाया और उसकी पत्नी ने बकरी का ताजा दूध पिलाया।
व्यापारी की आँखें भर आईं। अब उसे समझ में आ गया था —
खुशी का कारण पैसा नहीं, लोगों का अपनापन, छोटा-सा संतोष और बड़े दिल में छुपा होता है।
सीख:
खुशी का कारण बाहर नहीं, हमारे भीतर होता है — संतोष, प्रेम और अपनापन।
