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Kalpesh Patel

Children Stories Children

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Kalpesh Patel

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बदलता रूप.

बदलता रूप.

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बदलता रूप.

*हिंदी माइक्रो स्टोरी*

टोनी और मोनी दो भाई-बहन थे। टोनी बड़ा था और मोनी उससे छोटी।

टोनी को अपने बचपन के दिन आज भी अच्छी तरह याद थे। नया शैक्षणिक वर्ष शुरू होते ही वह पिताजी के साथ बाज़ार जाता। नई-नई किताबें, रंग-बिरंगे कवर और कॉपियाँ खरीदकर लाना उसके लिए किसी त्योहार से कम नहीं था। किताबों पर अपना नाम लिखना, उन पर करीने से कवर चढ़ाना और पहले पन्ने पर तारीख डालना—इन छोटी-छोटी बातों में भी उसे असीम आनंद मिलता था। नई किताबों की खुशबू उसके मन में आज भी बसी हुई थी।

लेकिन समय बदल चुका था।

अब मोनी के स्कूल का नया साल शुरू होता, तो न किताबों की लंबी सूची बनती, न कवर चढ़ाने की तैयारी होती। उसके हाथ में भारी बस्ते की जगह एक टैबलेट था, जिसमें उसकी सारी ई-बुक्स समाई हुई थीं।

एक शाम मोनी टैबलेट पर अपनी पाठ्यपुस्तक पढ़ रही थी। टोनी उसके पास आकर बैठ गया।

“मोनी, तुम्हें पता है, हमारी किताबों की एक अलग ही खुशबू होती थी! नए पन्नों को पलटने का अपना मज़ा था। तुम्हारी इस काँच की स्क्रीन में वह बात कहाँ!”

मोनी मुस्कुराई। उसने टैबलेट एक तरफ रखा और बोली,

“भैया, आपकी किताबों के पन्नों में खुशबू थी और हमारी किताबों में स्क्रीन की चमक है। लेकिन बताइए, ज्ञान तो दोनों में ही है, है न? आप पन्ने पलटकर पढ़ते थे, हम स्क्रीन स्वाइप करके पढ़ते हैं। माध्यम बदल गया है, सीखने की चाह थोड़े ही बदली है!”

टोनी कुछ पल चुप रहा। फिर उसने टैबलेट उठाकर मोनी की ई-बुक के पन्ने देखने शुरू कर दिए।

“बात तो सही है,” वह मुस्कुराकर बोला, “शायद किताबों की दुनिया बदल गई है, लेकिन उसके भीतर की दुनिया आज भी वही है।”

मोनी ने हँसते हुए कहा, “और भैया, आप भी कभी मेरी ई-बुक पढ़कर देखिए। हो सकता है, आपको इसमें भी अपनी पुरानी किताबों वाली दुनिया मिल जाए!”

दोनों हँस पड़े।

टोनी को अचानक एहसास हुआ कि समय के साथ किताबों का रूप बदल सकता है, उन्हें पढ़ने का तरीका बदल सकता है, लेकिन ज्ञान की रोशनी कभी पुरानी नहीं होती।

**क्योंकि किताबें कागज़ पर छपें या स्क्रीन पर चमकें, असली किताब तो वह है जो हमारे भीतर कुछ नया जगा दे।**

 


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