just a reminder...
just a reminder...
सोने से रास्ते आसान नहीं होते,
बैठने से मुश्किलों के समाधान नहीं होते,
खोजने को खामियां काफ़ी हैं अभी,
चलने को रास्ते बाकी हैं अभी।
हारकर बैठने का सोचना भी मत,
खुद को यूं किस्मतों को सौंपने का सोचना भी मत,
खुद को खुद के हाल पर छोड़ना नहीं,
हाल -ए - दिल समझ सकेगा कोई ये तो सोचना नहीं।
खुद का रास्ता तू खुद बनाएगा - एक बार चल तो सही,
किस्मतों के राग भी तू गायेगा एक बार बाहर निकल तो सही,
तू एक इंसान है कोई गुमनाम नहीं,
तू उगता सूरज है , चमक तो सही... कोई ढलती शाम नहीं।
सपने जो देखते हैं आसमान के सितारों के,
ज़मीं पर बैठकर यूं सोचते नहीं,
जाना हो जिन्हें दूर तक मंज़िलों के लिए,
थककर यूं ही बैठते नहीं।
