STORYMIRROR

Khushi Gangwar

Classics Inspirational

4  

Khushi Gangwar

Classics Inspirational

सुबह की उम्मीद

सुबह की उम्मीद

1 min
11

सुबह की धूप जब खिड़की से आती है,
मेरी आधी नींद को प्यार से जगाती है,
नींदों से बाहर धुंधली आंखों से...
वो धूप और भी सुनहरी हो जाती है।

हाथ बढ़ाती हूं उसको छूने को,
वो उंगलियों से फिसल कर कहीं दिल में खो जाती है,
दिल में खोकर ... दिल से होकर...
फिर से नज़रों में ख्वाब भर जाती है।

खिड़की तो बस एक बहाना है...
असल में रोशनी तो अंदर से आती है,
अंदर वाली रोशनी जब सुनहरी धूप से टकराती है...
हल्की सी उम्मीद और बड़ी सी मुस्कान सपनों में एक बार फिर से भर जाती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Classics