जाल : भाग 7
जाल : भाग 7
पिछले अंक से आगे
समीर चाय बनाकर ले आया । पूजा पलंग पर पड़ी पड़ी कराह रही थी । पूजा को कराहते देखकर समीर की जान निकल गई । वह पूजा का दर्द सहन नहीं कर सकता था । पूजा का हाथ अपने हाथ में लेकर वह बोला
"दर्द बहुत ज्यादा हो रहा है" ? उसके शब्दों में प्रेम , मिठास, आत्मीयता और भावना झलक रही थीं । पूजा को समीर का प्रश्न सुनकर ऐसा लगा कि जैसे समीर ने उसकी चोट पर मरहम लगा दिया है । उसने धीरे से आंखें खोली और समीर पर प्रेम की बरसात करते हुए बोली
"दर्द तो बहुत हो रहा है मगर आपकी मीठी मीठी बातों से आराम भी मिल रहा है" ।
"कहो तो थोड़ी मूव लगा दूं , तुरंत आराम आ जाएगा" ! समीर ने प्रश्नवाचक निगाहों से पूजा को देखा "दर्द किस जगह है" ?
पूजा ने मुस्कुराते हुए अपने नितम्बों की ओर इशारा किया । लगता है कि वह सीधे गिरी थी इसलिए उसके नितम्बों में मोच आ गई थी ।
"देखो, मूव तो लगाना पर कोई शरारत मत करना हां" ! पूजा उसे आंखों से बरजते हुए बोली ।
"मैं तो सीधा साधा बंदा हूं मैम साहब , शरारत क्या होती है मैं जानता ही नहीं" । समीर ने भी आज्ञाकारी बालक की तरह जवाब दिया ।
"हटो भी ! आपसे तो कोई नहीं जीत सकता है । आप तो रहने ही दो" । कहते हुए पूजा उठने की कोशिश करने लगी । समीर ने उसे सहारा देकर उठाया और पलंग के सहारे उसे बैठा दिया । समीर ने उसे चाय का प्याला पकड़ा दिया ।
"पहले चाय पी लो , फिर मूव लगा दूंगा" ।
दोनों चाय की चुस्कियां लेने लगे । इतने में पूजा का मोबाइल घनघना उठा । मोबाइल पलंग पर ही पड़ा था इसलिए उसमें कॉल करने वाले का नाम भी दिखाई दे रहा था । किसी डॉक्टर एकता का फोन आ रहा था पूजा के पास । पूजा ने कॉल अटेंड नहीं की ।
थोड़ी देर बाद उसी डॉक्टर एकता की कॉल फिर से आई । इसके बाद भी पूजा ने वह कॉल रिसीव नहीं की ।
"फोन उठा लो पूजा ! किसी डॉक्टर का कॉल है । क्या कोई फ्रेंड है तुम्हारी" ? उत्सुकता से समीर ने कहा
"हां, हमारी किटी पार्टी की मेंबर है" । लापरवाही से पूजा ने कहा ।
पूजा मन ही मन बहुत घबरा रही थी । उसकी घबराहट उसके चेहरे पर नजर भी आ रही थी । दरअसल वह डॉक्टर मानव का फोन था । पूजा ने मानव की जगह एकता नाम लिख दिया था जिससे किसी को पता ना चले । आज पूजा को अपनी होशियारी पर नाज भी हो रहा था । आखिर उसने समीर को चकमा दे ही दिया था । समीर को पता ही नहीं चला कि यह फोन एकता का नहीं मानव का है ।
समीर ने देखा कि पूजा थोड़ी परेशान हैं तो वह उसे दिलासा देते हुए बोला
"इसमें घबराने की क्या बात है ? बात कर लो अपनी फ्रेंड से । पूछे तो बता देना कि किचन में स्लिप हो गई थी । थोड़ी सी मोच आ गई है, बस" । समीर तपाक से बोल पड़ा ।
अब पूजा समीर को कैसे बताये कि कॉल डॉक्टर एकता की नहीं , डॉक्टर मानव की है । वही डॉक्टर जिससे पूजा के अवैध संबंध हैं । उसकी कॉल से पूजा की धड़कनें बढ़ गई थीं । वह मन ही मन सोचने लगी "पता नहीं क्यों फोन किया है डॉक्टर साहब ने ? जब उसने उन्हें रोकना चाहा था तब तो वे रुके नहीं और अब फोन पर फोन किये जा रहे हैं" ? वह थोड़ी झुंझलाई ।
अचानक उसे मैसेज की टोन सुनाई दी । व्हाट्सएप पर डॉक्टर मानव का मैसेज था । पूजा ने मैसेज पढ़ने के लिए समीर को वहां से हटाने के लिए कहा
"फ्रिज से थोड़ी बर्फ लाकर वहां सिकाई कर देना, उससे थोड़ा आराम आ जाएगा" ।
समीर फ्रिज से बर्फ लाने के लिए किचन में चला गया । पीछे से पूजा ने वह मैसेज पढ़ लिया । मैसेज इस प्रकार से था
"सॉरी पूजा डार्लिंग ! तब मैं बहुत डर गया था । मैं चाहते हुए भी तुम्हारे साथ रुक नहीं पाया । यहां अस्पताल में आकर मुझे अपनी ग़लती का अहसास हुआ और अब मैं तुमसे मिलने के लिए तड़प रहा हूं । बोलो , कब आऊं" ?
मैसेज पढ़कर पूजा के होंठों पर मुस्कान आ गई । "आग दोनों ओर बराबर जल रही है । पर , आज मिलन संभव नहीं है । समीर यहीं पर हैं" । पूजा ने डॉक्टर मानव को जवाब भेज दिया । इतने में समीर फ्रिज से बर्फ ले आया और पूजा की चोट पर सिकाई करने लगा ।
तभी समीर का मोबाइल बज गया । अस्पताल से फोन था । समीर ने लपक कर मोबाइल उठाया
"बाबूजी की तबीयत बिगड़ गई है । उनका तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा । आप तुरंत यहां आ जायें" ।
इस फोन से समीर घबरा गया । पूजा को अकेले छोड़ना ठीक नहीं था लेकिन बाबूजी का ऑपरेशन भी होना था, उसे वहां रहना भी जरूरी था । समीर असमंजस में पड़ गया । उसे दुविधा से बाहर पूजा ने ही निकाला
"आप मेरी बिल्कुल भी चिंता मत करो । बाबूजी का ऑपरेशन होना है , आप वहां चले जाओ"
"तुम्हें इस हालत में छोड़कर जाने का मन नहीं है पूजा" !
"मैं ठीक हूं , मेरी फ़िक्र मत करो । जाओ यहां से" ! पूजा ने आवेश में आकर कहा । वह भी चाहती थी कि आज की रात वह डॉक्टर मानव के साथ गुजारे । इसलिए वह समीर को अस्पताल भेजना ही चाह रही थी ।
समीर ना ना करते करते आखिर अस्पताल चला गया और पूजा ने चैन की सांस ली । फिर उसने डॉक्टर को फोन मिलाया । फोन नो रिप्लाई रहा । उसने दुबारा फोन मिलाया , लेकिन दुर्भाग्यवश इस बार भी पूजा का फोन अटेंड नहीं किया गया ।
"कहां बिजी हो गये डॉक्टर साहब" ? पूजा मन ही मन सोचने लगी । आज उसका मन विचलित हो रहा था । डॉक्टर से मिलना उसके लिए सबसे बड़ा उपहार था । यह उपहार घर बैठे मिलने जा रहा था लेकिन .... "
अब पूजा को बीती बातें याद आने लगीं कि कैसे उसकी पहचान डॉक्टर से हुई ! लगभग साल भर पहले की बात है । समीर ड्यूटी पर था । पूजा को ब्लीडिंग होने लगी । उसने इसे पहले तो बहुत लाइटली लिया । लेकिन जब तीन दिन तक लगातार ब्लीडिंग होती रही तब वह बहुत घबरा गई । उसने समीर को फोन भी किया था लेकिन समीर को छुट्टी नहीं मिली । पूजा इस समस्या को बाबूजी और सरल से शेयर नहीं करना चाहती थी । तब उसने अपनी फ्रेंड एकता को फोन किया । एकता ने उसे डॉक्टर मानव के बारे में बताया कि वह बहुत अच्छा "गायनोकोलोजिस्ट" है , उसे दिखाना ठीक रहेगा ।
अगले दिन एकता उसे डॉक्टर मानव के पास ले गई । उसने पूजा को बताया कि उसकी भाभी को भी ऐसे ही ब्लीडिंग्स हुई थी । उनका इलाज डॉक्टर मानव ने ही किया था । इससे पूजा थोड़ी आश्वस्त हुई ।
जब पहली बार पूजा ने डॉक्टर मानव को देखा तो वह उससे बहुत प्रभावित हुई थी । बहुत स्मार्ट था मानव । पूजा भी बहुत सुंदर थी इसलिये डॉक्टर मानव की नजर भी उस पर टिक गई । दोनों में हल्का हल्का आकर्षण पैदा हो गया । डॉक्टर ने उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया । वह दो दिन तक अस्पताल में रही । इन दो दिनों में मानव ने उसका पूरा ध्यान रखा । दो दिनों में उसकी ब्लीडिंग पूरी तरह रुक गई थी । डॉक्टर ने उसे दवाई देते हुए तीन दिन बाद फिर से दिखाने के लिए कहा । तीन दिन बाद जब वह फिर से दिखाने गई तब मानव ने उसे स्पेशल वेटेज देते हुए उसे देखा ।
जब मानव उसका चैकअप कर रहा था तब उसके हाथों का स्पर्श उसे बहुत सुखद लग रहा था । उसकी छुअन उसे रोमांचित कर रही थी । मानव ने उसके बदन की भाषा पढ़ ली और उसके स्पर्श में मदहोशी और भी बढ़ती चली गई । उस दिन पूजा ने पहली बार "देह की देहरी" लांघी थी । फिर तो यह सिलसिला चल निकला और आज वह इस मुकाम पर आ गई कि वह मानव के लिए कुछ भी कर सकती थी । उसने षड़यंत्र के तहत पहले सरल को घर से बाहर किया और उसी षड़यंत्र के तहत बाबूजी को भी रास्ते से हटाना चाहा । पर ईश्वर को शायद कुछ और ही मंजूर था ।
पिछली जिंदगी में एक बार घुसने के बाद उससे बाहर आना बहुत मुश्किल होता है । पूजा अतीत से निकल कर वर्तमान में आ गई । इतनी देर के बाद भी डॉक्टर का फोन नहीं आया था । अब पूजा को चिंता होने लगी कि आखिर बात क्या है ? उसने बहुत सोचा लेकिन वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची । वह स्वयं डॉक्टर के अस्पताल में जा नहीं सकती थी , चोट के कारण लाचार थी वह । इसलिए वह मन मसोसकर रह गई ।
शेष अगले अंक में
क्रमशः

