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Abhay Bhadouriya

Abstract

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Abhay Bhadouriya

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ईश्वर मर चुका है !

ईश्वर मर चुका है !

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भौतिकवाद के इस युग में जहां उपभोक्तावाद को  प्राथमिकता देते हुए 

मैंने अक्सर देखा है लोग को आध्यात्मिक बातें करते हुऐ.. 

जहां दया, करुणा, नैतिकता के मूल सिमट कर रह गए केवल किताबों तक मुझे अक्सर बड़ा आश्चर्य होता है जब कोई खुद को तथाकथित  

spiritualist बोलकर पश्चात ज्ञान देने लगता है.... 

सच में आदमी अंदर से कितना खोखला हो गया है

मुझे उन लोगों से भी घृणा है जिन्होंने अब बना लिया

धर्म को अपनी ढाल .. मात्र अपने अहम की पूर्ति के लिए

जिनका जन्म हुआ है मात्र दूसरों को उपदेश देने के लिए

जिन्होंने अपने कर्मों की जिम्मेदारी नहीं ली है और

उसका ठीकरा फोड़ा भाग्य के ऊपर 

इन्हीं लोगों की वजह से मुझे याद आता है 

Friedrich Nietzsche का कथन :

ईश्वर मर चुका है, और उसे हमने मारा है।


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