होशियार बीरबल
होशियार बीरबल
एक बार अकबर ने अपने दरबार में कहा,"जो भी राज महल के सामने वाले कुएं में एक दिन बिना कपड़ों के खड़ा रहा तो मैं उसे 500 स्वर्ण मुद्राएं दूंगा । एक आदमी का नाम रामलाल था। उसने राजा की चुनौती को स्वीकार किया। राजा ने उस आदमी पर नजर रखने के लिए दो सिपाही बुलाए । वह आदमी खड़ा रहा पर वे उसे अपना इनाम ना मिला क्योंकि सिपाहियों ने राजा को कहा,"जहांपनाह, आपके कक्ष की खिड़की में एक दिया जल रहा था। उस दिए की गर्माहट उस आदमी रामलाल को लग रही थी इसलिए वह खड़ा रह पाया।" राजा ने उन पर विश्वास किया और उसको इनाम नहीं दिया। रामलाल परेशान था क्योंकि उसे अपनी बीवी का इलाज करवाना था। गांव के एक आदमी ने उसे बीरबल के पास जाने को कहा । वह गया और बीरबल को अपनी समस्या के बारे में बताया। बीरबल ने सोचा और कहा,"तुम्हें अपनी मेहनत की कमाई मिलेगी। दूसरे दिन बीरबल ने एक नारियल के झाड़ के ऊपर चावल से भरा हुआ पतीला रखा और नीचे से थोड़ी लकड़ी या जलाई। जब अकबर ने देखा और बीरबल को कहा,"ओए पागल , बीरबल यह क्या कर रहे हो? " बीरबल ने कहा,"खिचड़ी पका रहा हूं"अकबर ने पूछा,"ऐसे कैसे"बीरबल ने कहा"अगर आपकी कक्ष के दिए की गर्माहट उस आदमी जो कुएं में खड़ा है उसे लगती है तो लकड़ियों की गर्माहट चावलों को भी लग रही होगी"अकबर को समझ में आ गया कि वो सिपाही झूठे थे और उस दिन रामलाल को अपने 500 स्वर्ण मुद्राएं मिल गईं। एक बार फिर से बीरबल ने सत्य साबित कर दिया।
