Dinesh Kumar Keer

Abstract

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Dinesh Kumar Keer

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होली

होली

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प्रेम चिरंतन मूल जगत का,

वैर-घृणा भूलें क्षण की,

भूल-चूक लेनी-देनी में,

सदा सफलता जीवन की,


जो हो गया बिराना उसको

फिर अपना कर लो।

होली है तो आज शत्रु को

बाहों में भर लो !


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