Dinesh Kumar Keer

Abstract


1  

Dinesh Kumar Keer

Abstract


होली

होली

1 min 120 1 min 120

प्रेम चिरंतन मूल जगत का,

वैर-घृणा भूलें क्षण की,

भूल-चूक लेनी-देनी में,

सदा सफलता जीवन की,


जो हो गया बिराना उसको

फिर अपना कर लो।

होली है तो आज शत्रु को

बाहों में भर लो !


Rate this content
Log in

More hindi story from Dinesh Kumar Keer

Similar hindi story from Abstract