गणिका
गणिका
एक अमीर आदमी। वो रोजाना एक गणिका (तवायफ) के पास जाता था। उस आदमी को उस लड़की से प्यार हो गया था। वो उसे हमेशा कहता कि चलो मेरे साथ यहां कुछ नहीं रखा है, में तुमको एक अच्छे समाज में लेके जाऊंगा जहां पर अच्छे लोग होंगे, अच्छी सुख सुविधा होगी, अच्छे से रहोगी वहां पर तुम।
लेकिन वो लड़की हस के उसकी बातो को टाल देती।
लेकिन उस आदमी ने हार नहीं मानी, वो रोजाना उसे बोलता रहता चलो मेरे साथ। उस मनाता। लेकिन वो लड़की हस के टाल देती।
फिर एक दिन वो लड़की मान गई और उस आदमी के साथ वहां से भाग गई। वो आदमी उसे अपने घर लेके आया। अकेला रहता था वो। फिर सब अच्छे से चलने लगा वो आदमी ऑफिस जाता, शाम को घर आता, वो लड़की घर के काम करती, बाजार जाती। ये सब होते होते काफी दिन बीत गए।
फिर एक दिन अचानक उस लड़की ने उस आदमी से पूछा कि तुम बता रहे थे ना कि मुझे लेके जाओगे कहीं अच्छी जगह पे कब जाने वाले है वहां पर? तो उस आदमी यहीं तो अच्छा समाज जिसकी में बात कर रहा था, ये घर ये लोग ये सब अच्छा समाज ही तो है।
तो लड़की बोली "अच्छा तो ये है समाज। लेकिन जब में बाहर जाती हूं तब आपके अच्छे समाज में से कई लोग तो मेरे ग्राहक है।"
