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poonam bansal

Romance Fantasy


4  

poonam bansal

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गलतफहमी

गलतफहमी

14 mins 175 14 mins 175

रात का समय सुयश और सुनिधि का रूम

सुयश - यार कुछ समय हमें भी दे दो, क्या हर समय बिजी रहती हो। अब तो परी भी इतनी बड़ी हो चुकी है कि उसकी जिम्मेदारी कुछ तो कम हो ही गयी है।

सुनिधि - एक बात बताओ मैं कोई अपने पर्सनल काम मे तो व्यस्त हूँ नही, आप ही देखो मैं क्या करूँ।

सुयश - ओके ओके नाराज़ तो मत होओ। ये कह कर सुयश लेट जाता है और पूरे दिन का थका हुआ होने के कारण जल्दी ही सो जाता है।

धीरे धीरे ये प्रतिदिन की दिनचर्या हो जाती है। सुयश ने भी अब कहना लगभग छोड़ दिया है।

फिर एक दिन रात के लगभग 10 बज रहे है। थका हुआ सुयश सो चुका है लेकिन सुनिधि जाग रही है आज उसको नीद नही आ रही है क्योकि आफिस की फाइनेंशियल टेंशन है। आज उसका मन बहुत उदास है कुछ तो आफिस की टेंशन और कुछ अनजाना सा भय जो वह समझ ही नही पा रही। उसे कुछ हाथ से फिसलता महसूस हो रहा है। वो अपने पिछले दिनों की सोच रही है कि कैसे सुयश हंसी मजाक करते थे और अब कितने गंभीर हो चुके हैं। कमरे में आते ही दो चार बाते की और सो गए।

अभी वो ये सब सोच ही रही होती है कि उसको किसी मोबाइल पर किसी नोटिफिकेशन की बहुत हल्की सी आवाज आती है। सुनिधि उस आवाज से चोंक जाती है और सोचती है कि इतनी रात गए ये कैसा नोटिफिकेशन है। पहले सुनिधि अपना मोबाइल देखती है उसमें कोई भी नोटिफिकेशन नही है फिर न चाहते हुए भी सुयश का मोबाइल देखती है।

सुयश के मोबाइल में एक नोटिफिकेशन है किसी आयशा शर्मा का। सुनिधि उस मेसेज को खोलती है

"हाय सुयश, आज आप आने वाले थे। पंरन्तु आये नही, मैं आपका इंतजार करती रही। कृपया कल सुबह ग्यारह बजे तक आप निश्चित रूप से आ जाइये नही तो फिर मुझे मत कहना। और हाँ इस मैसेज को पढ़ कर डिलीट अवश्य कर दीजिए। यदि किसी अन्य के हाथ लग गया तो मेरे लिए और आपके लिए दोनो के लिए समस्या हो जाएगी।"

सुनिधि इस मैसेज को पढ़ लेती है और अवाक रह जाती है सोचती है "हे प्रभु बात इतनी बढ़ गयी है कि ये किसी और लड़की के साथ, ऐसा नही हो सकता, लेकिन ये मैसेज ?" और समझ ही नही पाती ये क्या हो रहा है ? सुयश ऐसा नही कर सकते। क्या किसी और लड़की से, नही ऐसा तो नही हो सकता। मेरी भी तो गलती है कि मैं इनको समय ही नही दे रही।

सुनिधि की नींद गायब हो जाती है उसकी आँखों मे आंसू आ रहे है, कहे तो किससे कहे, क्या कहे, बहुत दुखी हो रही है। लेकिन फिर काफी रात गए रोते रोते कब उसकी आंख लग जाती है पता ही नही चलता।

क्योकि सुनिधि को रात बहुत देर में नींद आयी थी इसलिए उसकी आंख देर से खुलती है। सुनिधि घड़ी देखती है तो सुबह के 8 बज चुके हैं और सुयश बाथरूम में हैं, सुनिधि सोचती है "इन्होंने इतना पराया अभी से कर दिया कि मुझे जगाया भी नही, उफ्फ"। कुछ देर में सुयश बाथरूम से नहा कर बाहर आते है।

सुयश - गुड मॉर्निंग स्वीटहार्ट

सुनिधि फीकी सी मुस्कान के साथ सुयश को देख रही है और सोच रही है ये इंसान धोखा तो नही दे सकता लेकिन रात को मोबाइल पर मैसेज वो तो मैंने स्वयं ही पढ़ा था। लेकिन फिर भी मेरा दिल मानने को तैयार ही नही है।

सुयश सुनिधि की आंखों के आगे चुटकी बजाते हुए - क्या हुआ अभी भी नींद में ही हो क्या ?

सुनिधि - आ.. न.. नही

सुयश - तो गुड मॉर्निंग का जवाब नही दिया हमारी डार्लिंग ने और आज इतनी देर तक सोती रही। क्यो इतना स्ट्रेस लेती हो काम का यार। अभी हम है आपकी सभी टेंशन दूर कर देंगे।

सुनिधि मुस्करा कर हां में सर हिला तो देती है पर मन ही मन रात को पड़े मेसेज की वजह से अभी भी अपसेट और टेंशन में है।

सुयश - यार मुझे जरा जल्दी जाना है एक बहुत जरूरी काम है तुम आफिस तैयार होकर चली जाना।

सुनिधि बहुत हिम्मत बटोर कर कि कही आंखे या बोली चुगली न कर दे कि आज आपने भरोसा तोड़ दिया है, मेरा दिल टूट गया है। सुयश समझ न जाये कि मुझे सब समझ आ गया है - कितनी देर में जाना है ?

सुयश उसकी आवाज से समझ जाता है कि सुनिधि बहुत अपसेट है। सुयश सुनिधि के पास आकर उसको गले लगा लेता है और कहता है

सुयश - सुनिधि इतना स्ट्रेस क्यो ले रही हो यार ? अरे फाइनेंशियल प्रॉब्लम है कोई ज़िन्दगी खत्म न हो गयी। यार काम बढ़ाया है तो ये सारी प्रॉब्लम तो फेस करनी होगी। ऐसे घबराओगी तो कैसे चलेगा।

इतने प्यार और अपनेपन के कारण आखिर उसकी आंखें चुगली कर ही देती है और बरस पड़ती है।

सुयश सुनिधि के आंसू पोछते हुए - सुनिधि तुम कुछ दिन घर पर ही रेस्ट करो मैं अकेले संभाल लूंगा।

सुनिधि मन मे सोच रही है "मुझे पता है आप ऐसा क्यो कह रहे हो। आप आयशा को मेरी जिम्मेदारी देना चाहते हो। ठीक है आपको जो करना हो करो मैं आपको नही रोकूंगी।" ये सोचते सोचते सुनिधि रोने लगती है।

सुयश - यार इतनी टेंशन क्यो ले रही हो। अच्छा तुम केवल दो दिन रेस्ट करो और मैं दो दिन में फैक्ट्री को पुराने प्रोडक्शन पर ही ले आता हूँ जिससे आपकी टेंशन खत्म हो जाएगी तब ही आप आफिस जाना।

सुनिधि लगभग रोते हुए - कितनी देर में जाओगे ?

सुयश - अभी 9.30 हो रहे हैं बस जा ही रहा हूँ कुछ जरूरी मीटिंग है अभी मेरी।

सुनिधि - ओके, मन ही मन मुझे पता है कैसी मीटिंग है। सॉरी सुयश प्लीज मुझे माफ़ कर दो। प्लीज लौट आओ मेरे पास, नही रह पाऊंगी आपके बिना। यदि आपकी खुशी आयशा में ही है तो ठीक है मैं स्वयं ही हट जाउंगी आपके रास्ते से। चली जाउंगी परी को लेकर आपकी ज़िंदगी से।"

सुयश - आज क्या हो गया है तुमको यार, कहाँ हो तुम ? जाने क्या सोच रही हो ? कौन सी टेंशन में हो ?

सुनिधि भरे गले से - नही कोई टेंशन नही है बस तबियत ठीक नही है। रात को नीद बहुत देर में आई इसलिए।

सुयश - ठीक है तो आज तुम आराम कर लो। कल चली जाना आफिस।

सुनिधि भारी मन से - जी जैसी आपकी मर्जी।

सुयश सुनिधि को गले लग कर उसके गाल पर किस कर कर चला जाता है।

अब सुनिधि रूम में अकेली है तभी उछलती कूदती परी आ जाती है। परी को देख कर सुनिधि उसको गले लगा लेती है और बुदबुदाती है।

सुनिधि - गुड़िया तू चिंता मत कर मैं हूं न, मैं तेरे को अकेले पालूंगी। क्या हुआ जो तेरे पापा को अब मैं पसंद नही पर मैं हूं न मैं सब संभाल लुंगी। फिर पहले की तरह जॉब करूँगी और तेरे को भी संभालूंगी, तेरे को भी पढ़ाऊंगी। तेरे को दुनिया की सभी खुशिया दूँगी। तू चिंता मत करना।

ये ही सब सोचते सोचते सुबह से शाम हो जाती है और प्रतिदिन के समय पर सुयश भी घर आ जाते हैं। आज सुयश बहुत खुश हैं। सुनिधि ने सोच लिया है जब आप आयशा के साथ इतने खुश हो तो वो आज बात कर कर फाइनल ही कर लेगी क्यो बिना वजह किसी की ज़िंदगी मे रोड़ा बने।

रात को रूम में

सुयश चहकते हुए - यार आज मैं बहुत खुश हूं। आज तो पार्टी बनती है।

सुनिधि बहुत शांत अवस्था मे - सुनो मेरे को कुछ जरूरी बात करनी है।

सुयश - यार सारी बात बाद में आज तो मैं सारी रात पार्टी सेलिब्रेट करूँगा।

सुनिधि फीकी सी हंसी से - ठीक है जैसी आपकी मर्जी

रात को सुयश सुनिधि के साथ अंतरंग क्षणों में

सुयश - यार क्या बात है आज तुम्हारे साथ वो मज़ा नही आ रहा जो हमेशा आता था।

सुनिधि मन ही मन "अब आपको मेरे साथ आएगा भी क्यो ? आपको तो आयशा के साथ आएगा न।"

सुयश - क्या हो गया है तुमको ?

सुनिधि हल्की सी भर्राई आवाज में - सुनो मैं जयपुर जाना चहा रही थी।

सुयश - यार एक सप्ताह बाद चली जाना कुछ जरूरी पेपर्स साइन होने है।

ये सुनते ही सुनिधि का दिल बैठ जाता है और दिल ही दिल मे रोने लगती है और बहुत मुश्किल से अपने आंसू रोक पाती है। सोचती है "डिवोर्स के पेपर्स है न, चिंता मत करो, कर दूंगी साइन। बस आप खुश रहो ये ही दुआ है मेरी।"

सुयश - तुम्हारी तबियत ठीक नही है न।

सुनिधि - जी

सुयश - ओके सो जाओ। वैसे भी कल बहुत जरूरी काम है तुमसे। कुछ पेपर्स साइन कराने है तुमसे, तुमको चलना पड़ेगा।

पिछली रात सो न पाने और सारा दिन मन खिन्न और अपसेट होने के कारण सुनिधि को रात को नीद जल्दी ही आ गयी। जब जल्दी सो गई तो सुबह जल्दी ही जग भी गयी।

सुनिधि आज सुबह 4.30 पर ही जाग चुकी है लेकिन बेड पर ही लेटी है, आंखों से नींद कोसो दूर हो चुकी है। उसके मन मे बहुत से बुरे विचार आ रहे है। उन विचारों को सोच सोच कर ही सुनिधि का दिल बैठा जा रहा है।

"आज पेपर्स साइन होने है यानी मेरा इस घर मे आखिरी दिन होगा। समझ नही आ रहा कि मम्मी पापा भी कुछ क्यो नही कह रहे।"

"ये भी ऐसे नही थे, अचानक ऐसा क्या हो गया जो ये इतने खिन्न हो गए मुझसे। अरे मेरा नही तो परी का तो ख्याल करना ही चाहिए था।"

ये सोचते सोचते सुनिधि की आंखे भर आयी। एक नज़र सोते हुए सुयश पर डाली कितने मासूम लग रहे है ये सोते हुए और फिर से ख्यालों के रथ पर सवार हो गयी।

"कितने शांति से सो रहे है जैसे कुछ हुआ ही न हो। कोई इंसान इतने बड़े तूफान के बीच कैसे सो सकता है इतनी शांति से..."

सुनिधि बेड पर बैठे बैठे एक घूंट पानी पीती है और फिर उसके दिमाग मे वही बाते घूमने लगती हैं।

"हाँ भई इनके लिए तूफान कहाँ है, इनको तो कोई और मिल रही है, क्या फर्क पड़ता है इन पर, तूफान तो हमारे लिए है। खैर अब जो है उसको स्वीकार करो, कब तक दुखी रहेगी सुनिधि तू। उठ और आगे की प्लानिंग कर, क्या करना है कैसे करना है ? परी भी बड़ी हो रही है उसके बारे में सोच।"

ये सोचते सोचते सुनिधि की आंखों में फिर आंसू आ गए और भविष्य की चिंता सताने लगी।

तभी सुयश ने करवट ली और नीद में ही सुनिधि को अपने हाथों से टटोलने लगा। जब सुयश सुनिधि को स्पर्श नही कर पाया तो उसकी आंख खुल गयी और एकदम उठ बैठा।

सुयश - क्या हुआ सुनिधि ? इतनी जल्दी क्यो उठ गई ? अरे यार ग्यारह बजे जाना है। अभी बहुत टाइम है।

सुनिधि कुछ नही बोली बस उसके चेहरे से प्रतीत हो रहा था कि वो कितनी अपसेट और परेशान है।

सुयश - यार तू पागल मत हो जाना। जब तू जॉब करती थी तो कितना टेंशन ले लेती थी तब भी इतना परेशान नही होती थी तो अब क्या हो गया है मेरी गुड़िया को ?

सुयश सुनिधि को जबरदस्ती अपनी बाहों में भरकर लेटा लेता है।

सुयश - अब सो जा चुपचाप। सुबह 7 बज़े से पहले नही उठाना।

सुनिधि का मन फिर उन्ही बातों पर घूमने लगता है "सुनिधि यार तू कही गलत तो नही सोच रही, ये ऐसा बिहेव कर रहे है तो वो तो नही हो सकता जो तू सोच रही है। तो क्या एक और पत्नी ? चल पागल है तू, ऐसा कही होता है ?"

ये ही सोचते सोचते सुनिधि फिर सो जाती है और लगभग 7.45 पर उसकी आंख खुलती है।

सुयश - गुड मॉर्निंग स्वीटहार्ट

सुनिधि फीकी सी मुस्कान के साथ - गुड मॉर्निंग, कितने बज़े चलना है ?

सुयश - ओह्ह इतनी जल्दी है मैडम को। ओके, ग्यारह बजे तक हर सूरत में पहुंचना है।

सुनिधि - ओके तो मैं तैयार होने जाती हूँ।

सुयश - हैं!! अभी से, अरे 9 बज़े भी जाओगी तो तैयार हो जाओगी।

सुनिधि के लिए एक एक पल भारी हो रहा है। समय मानो काटे नही कट रहा है। जैसे तैसे कर कर 9 बज़ जाते है और सुनिधि बाथरूम में घुस जाती है। शॉवर के नीचे सुनिधि खड़ी है शरीर पर ठंडे पानी की बूंदे गिर रही हैं पर फिर भी मन को ठंडक नही मिल रही है, आंखों से अविरल आंसू बह रहे है। आने वाले हर क्षण के साथ सुनिधि का दिल बैठा जा रहा है भविष्य की सोच सोच कर ही दिल कांप जाता है।

लगभग 10.15 पर सुयश सुनिधि को लेकर गाड़ी से चल देता है।

सुयश - सुनिधि सारे ओरिजनल डॉक्यूमेंट ले लिए है न।

सुनिधि हां में सर हिला देती है क्योकि उससे बोला नही जा रहा यदि बोली, तो शायद बोली कम निकलेगी आंसू ज्यादा बह जाएंगे।

कुछ देर में ही गाड़ी एक पार्किंग में पहुंच जाती है।

सुयश - चलिये मैडम, क्या बैठे रहने का ही इरादा है।

अब सुनिधि का दिल बुरी तरह बैठा जा रहा है, वो जी भर कर सुयश को देख लेना चाहती है क्योकि बस कुछ ही समय बाद वो पराया हो जाएगा उसके लिए।

धीरे धीरे सुयश एक बैंक के अंदर घुसता है और वहाँ चपरासी से मैनेजर की पूछता है।

सुयश चपरासी से - आयशा मैडम है क्या ?

सुनिधि फिर सोचने लगती है "ओह्ह तो ये आयशा बैंक मैनेजर है। सही भी है इसके आगे मेरी औकात भी क्या है ?"

तब तक चपरासी बोलता है - अरे सर जल्दी जाइये मैडम आपका ही तो इंतज़ार कर रही है।

सुयश और सुनिधि दोनो अंदर जाते हैं। सामने चेयर पर एक 45-50 वर्ष की महिला बैठी है। टेबल पर नेम प्लेट रखी है जिस पर लिखा है "आयशा शर्मा" "मैनेजर"। आयशा मुस्करा कर सुयश का स्वागत करती है।

आयशा - सभी डॉक्यूमेंट ले आये।

सुयश - जी मेम

आयशा - साइन कौन करेगा ?

सुयश सुनिधि की तरफ इशारा करते हुए - हमारी कंपनी की चेयरपर्सन श्रीमती सुनिधि सुयश अग्रवाल।

सुनिधि ये सुनते ही चोक जाती है और सुयश से कहती है - क्या है ये सब ?

सुयश - यार तेरी टेंशन खत्म तो करनी ही थी। तू कितने दिनों से दुखी थी तो मैंने यहाँ दस करोड़ की ओ डी तैयार कराई है, अब साइन तेरे होने है।

सुनिधि मन ही मन "बच गयी सुनिधि बेटा तू, क्या क्या सोच रही थी मूर्ख।"

तभी

आयशा - मैडम आप बहुत लकी है कि आपको ऐसे हस्बैंड मिले है। परसो सुयश जी को मैसेज किया था तब तो इनका कोई रिप्लाई आया नही पर कल से दिन रात एक कर दिया। बस एक ही ज़िद थी इनको की अपनी पत्नी की स्माइल वापस चाहिए।

सुनिधि सुयश को देखती है और भावुकता में उसकी आँखों मे आंसू आ जाते हैं और सुयश को गले लगा लेती है।

आयशा - अरे अरे मैडम आप बैंक में है। थोड़ा सा हम लोग का भी ख्याल कीजिये। वैसे चाय लेंगे आप लोग ?

सुयश - अरे नही मेम, बस जितनी जल्दी हो प्रोसेस कीजिये इसको।

आयशा - कल से आप ट्रांजेक्शन शुरू कर सकते है।

सुनिधि - मेम आप चाय मँगाओ, और यदि कोई मिठाई ला सकता हो तो प्लीज वो भी मांगा दीजिये और सभी मे बँटबा दीजिये। कह कर सुनिधि ने दो हज़ार का एक नोट आयशा को पकड़ा दिया।

आयशा ने चपरासी को बुलाकर चाय और मिठाई लाने का आदेश किया।

आयशा - सुयश जी आपकी वाइफ जितनी खूबसूरत है उतनी ही दिल की भी अच्छी है। अब समझ आया आप क्यो दो दिनों से इस ओ डी के लिए दिन रात एक कर दिए थे।

बैंक से निकल कर सुयश और सुनिधि

सुनिधि अब पूरे अधिकार से - मुझे भूख लगी है।

सुयश - अभी तो घर से नाश्ता कर कर चले थे।

सुनिधि - हाँ तो, अपने पति के साथ हूँ किसी ऐरे गेरे के साथ नही हूँ। तो इतना अधिकार है।

सुयश - अभी यार देर हो जाएगी। देखो तो एक बज चुका है सुबह से फैक्ट्री भी नही पहुंचा।

सुनिधि - एक शर्त पर फिर रात को आज डिनर पर बाहर लेकर चलोगे। बस मैं और तुम। परी को मम्मी के पास छोड़ देंगे।

सुयश - ओके ओके।(डिनर की बात सुयश के मन की बात जो है)

रात को डिनर कर दोनो लोग घर आते हैं तब तक परी माया देवी के पास ही सो गई है। सुयश और सुनिधि अपने रूम में आते हैं।

सुनिधि अपने कान पकड़ कर - सॉरी यार।

सुयश - मतलब

सुनिधि - मुझे माफ़ कर दो, इन दो दिनों में न जाने मैं आपके बारे में क्या क्या सोच गयी। चाहने को मैं आपको नही बताती पर मुझे बहुत आत्मग्लानी हो रही थी और मेरा दिल बिना आपको सॉरी बोले मानने को तैयार नही हो रहा था।

सुयश - यार खुल कर तो बोलो ?

सुनिधि सुयश को सारी बात बताती है आयशा शर्मा के मैसेज से लेकर आज सुबह बैंक जाने तक की और कहती है कि "और न, मैं ये समझ रही थी कि आपको कोई आयशा शर्मा मिल गयी है इसलिए आप बहुत खुश खुश नजर आ रहे हो"।

सुयश सुनकर हंसने लगता है और कहता है - और मैं समझ रहा था कि तुम फाइनेंशियल प्रॉब्लम की वजह से परेशान हो। यार तुम भी न... अपने पागल पति पर इतना भरोसा रखो। मुझे भी पता है कि तुम व्यस्त हो तो मैं सहयोग नही करूँगा तो कौन करेगा, और सोचा भी तो उस बुढ़िया के लिए, यदि सोचना था तो किसी हीरोइन की ही सोच लेती।

सुनिधि - अब ज्यादा मत उछलो, हीरोइन की आपकी औकात भी नही है और जिन आयशा शर्मा को आप बूढ़ा कह रहे हो वो कहाँ से बूढ़ी नज़र आ रही हैं। हाँ ठीक है थोड़ी बड़ी है लेकिन बूढ़ी नही। अच्छा एक बात बताओ आयशा शर्मा जी ने मैसेज डिलीट करने को क्यो लिखा था।

सुयश - बैंक मैनेजर है यार वो, इस तरह मैसेज करना बैंक नियमो के विरूद्ध है इसलिए डिलीट के लिए लिखा था।

सुनिधि - ओह्ह यस। यार मैं भी कहाँ पहुंच गई।


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