एक थे, पर.. एक हो न सके ✍️ज्योति
एक थे, पर.. एक हो न सके ✍️ज्योति
"ओ हो मेरी फौजन... सोशल मीडिया पर बड़े जलवे हैं तुम्हारे ।"
"सोशल मीडिया पर मैं कोई फौजन नहीं हूं समझे। वहां मै सिर्फ मै ही हूं ।"
"अरे !! मैं तो मजाक कर रहा था । गुस्सा क्यों होती है..? चल बता, इस बार क्या लाऊं तेरे लिए?"
"मेरे लिए कुछ लेकर आना ही है तो अपने आप को लेकर आना इस बार... सिर्फ मेरा बनकर आना । सिर्फ मेरे लिए आना और मेरा होकर ही आना ।"
"ओए वो तो मैं हमेशा से हूं कुड़िए... तेरा नहीं तो और किसका बनूंगा मैं?"
"क्या करूं... डर लगा रहता है । जब तू इस वर्दी में आता है न, मोहल्ले की सारी लड़कियां तुझे ही ताड़ती हैं। गजब का लगता है तू इस वर्दी में । बड़ा ही रौबदार ।"
"अच्छा... फिर मेरी क्या गलती अगर मोहल्ले की सारी लड़कियां मुझे देखती हैं तो? मैं क्या कर सकता हूं इसमें? तू मना कर दिया कर न उनको, ना खड़ी हुआ करें चौखट पर ।"
" ना बाबा ना, मैं कैसे मना कर सकूं उन्हें? उनका घर, उनकी आँखें । किस हक से मना करूं मैं उन्हें? मैं तो तुझ पर हक रखूं हूं तो तुझ से ही कह रही हूं ।"
"चल ठीक है । वादा रहा, ये बंदा हमेशा तेरा ही रहेगा । और इस बार तेरा होकर ही आयेगा हमेशा के लिए । लेकिन तू भी मेरी बनकर रहियो समझी । कह देना अपने मां बापू से... तू सिर्फ मेरी है ।"
"हां,हां कह रखा है मैने उन्हें । मैं सिर्फ तेरी हूं । मेरी कलाइयों में तेरे नाम की ही चूड़ी सजेगी । तेरे नाम की बिछिया पहनूंगी । तेरे नाम की ही बिंदी और सिंदूर डालूंगी अपने माथे पर । तू निश्चिंत रह मेरी तरफ से ।"
"चल ठीक है रखता हूं । तैयारी करनी है आने की । मेरा मतलब... तेरा बनकर आने के लिए, तेरा होने के लिए तैयारी करता हूं । फिर वहीं आकर ही तुझ से ढेर सारी बात करूंगा ।"
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"इसके बाद...? इसके बाद क्या हुआ था..?"
"इसके बाद...? इसके बाद हुआ वो, जिसकी कल्पना भी नहीं की थी ।"
"क्यों? अपना वादा निभाने आया नहीं था वो..?"
"आया था न... अपना वादा निभाने के लिए आया था । और इस बार जब वो आया तो उसे देखने के लिए सिर्फ लड़कियां ही नहीं... पूरा शहर, आसपास का गांव उमड़ पड़ा था । वो मेरा ही था । फिर भी मेरा होने के लिए आ रहा था...। हम हमेशा से एक थे... लेकिन हमेशा के लिए एक हो ना सके थे ।"
और अपना आखिरी अल्फ़ाज़ कहते हुए वो मुस्कुरा उठी आंखों में नमी और दिल में बिछड़ने का दर्द लेकर ।
✍️ज्योति प्रजापति

