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Manish Sharma

Tragedy Inspirational Others


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Manish Sharma

Tragedy Inspirational Others


एक मजदूर की मौत

एक मजदूर की मौत

4 mins 78 4 mins 78

आओ मजदूरों तुम्हें सुनाऊँ, एक कहानी बहुत पुरानी

जिसको सुनकर आ जायेगा, तुम सबकी आँखों में पानी

धीरज को धारण करके तुम, यह कहानी सुनते रहना

गरीब अमीर की लड़ाई में, कौन हारा जीता चुनते रहना


निकल पड़ा था घर से वो, अपना अस्तित्व बनाने को

आँखो मे कुछ सपने लेकर, इस पेट की आग बुझाने को

दर दर भटका यहाँ से वहाँ, मिला ना कोई काम उसे

हाथ जोडे पाँव पकड़े, मगर दिया ने किसी ने काम उसे


थका हारा घर को आया, उसका चेहरा था मुरझाया

लेकिन वो अपनो के लिए, चेहरे पर झूठी मुस्कान लाया

माँ पिता के पास बैठकर, उसने उनको भरोसा दिया

फिर बच्चों के पास जाकर, उसने बच्चों को गोद में लिया


सब उसके मुरझाये अंतर मन से, बिल्कुल अंजान थे

मगर उसकी अर्धागिनी के मन में, जाने कितने सवाल थे

रात गहराई सभी सो गये, लेकिन उसे नींद नही आई

तब उसकी अर्धागिनी चलकर, धीरे से उसके करीब आई


पत्नी तो आखिर पत्नी है, आधा अंग है वो पति का

उस से छुप नही सकता था, हाल ए दिल अपने पति का

उसने पति से कुछ ना कहा, ना ही उससे कुछ पुछा

बस उसने अपने आँचल से ही, पति के पसीने को पोछा


उसने रात की गहराई में, बस पति पर प्यार लुटाया

उन दोनों को देख चाँद भी, चाँदनी के पास सिमट आया

भोर भई जब पंछी जागे, नीड का निर्माण करने को

वो भी उठके खडा हो गया, आज फिर से जंग करने को


मन मे अरमान लेकर अपने, घर से वो निकला गया

आज जब उसकी बोली लगी तो, काम उसको मिल गया

फिर दिनभर काम करके, उसने पसीना खुब बहाया

शाम हुई तो लौटकर वो, अपनो के लिए झोली भर लाया


उस झोली में कुछ खुशी थी, उसके माँ बाप के लिए

उस झोली में कुछ सपने थे, उसकी पत्नी बच्चों के लिए

मगर यह झोली कल फिर से, खाली होने वाली थी

क्योंकि उसकी जीवन लीला कल, समाप्त होने वाली थी


भाग्यविधाता ने निष्ठुर होकर, ऐसी कलम चलाई थी

अमीरी गरीबी की लडाई ने आज, उसकी बलि चढाई थी

सब इंतजार कर रहे थे उसका, आखिर क्या बात हुई

माँ पिता बच्चों के संग आज, उसकी पत्नी भी उदास हुई


भुखे प्यासे बच्चों के संग, माँ बाप ने भी कुछ ना खाया

पत्नी ने भी मजबूती से, उन सभी को बहुत ढाँढस बंधाया

आँख फडक रही थी सबकी, दिल में भी घबराहट थी

तभी उन सबके कानो में आई, कुछ कदमो की आहट थी


बाहर घनघोर अंधेरा था, अमावस्या की काली रात थी

आज जरूर ही इस आहट में, किसी अनहोनी की बात थी

दरवाजे पे नजर गढी थी, माँ पिता बच्चों संग पत्नी की

तभी दरवाजे पे दिखी परछाई, उनको भी किसी अपने की


धीरे धीरे वो परछाई उनकी ओर, ही बढती जा रही थी

उस परछाई के बढने से उनकी, घबराहट बढती जा रही थी

एक धुँधला सा चेहरा तभी, उन सबको नजर आया था

मगर उस चेहरे में उनको, कोई अपना नजर नही आया था 


तभी वो परछाई वाला शक्स, उनके पास चलकर आया

सब घरवालों को पास बैठाके, उसने बुरा समाचार सुनाया

माँ पिता तुमने खो दिया है, आज अपना एकमात्र लाल

बच्चों तुम्हारे पिता को ले गया, अपने संग उठा कर काल


तुम हो उसकी अर्धागिनी, कट गया तुम्हारा आधा अंग

आज तुम्हारे इस जीवन से, चला गया साज श्रंगार का रंग

इतना सुनते ही माँ पिता बच्चों संग, पत्नी बिलख पडी

हाय रे गरीबो के घर में आ गयी, आज कैसी दुख की घडी


रो रोकर सबका हाल बुरा था, क्रियाकर्म बाकी पडा था

अंतिमदर्शन को लाश नही थी, ये कैसी कालचक्र घडी थी

पिता ने खुद को मजबूत किया, फिर बहु को चुप किया

परछाई वाले शक्स से फिर, दु:खी पिता ने अनुरोध किया


क्या हुआ था मेरे लाल को, कैसे काल उसे लील गया ?

क्या कोई उसने बुरा काम, पेट की खातिर तो नही किया

अब शख्स ने मुँह से बोला, तुम्हारा बेटा था बडा भला

लेकिन आज तकदीर के आगे, उसका दाँव एक ना चला


आज उसे काम मिला था, ऊँची बिल्डिंग को रंगने का

मगर उसे मालूम नही था, वक्त आ गया उसका मरने का

फिसल गया पाँव उसका, और वो धडाम से गिर गया

जमीन पर गिरते ही उसका, सिर बुरी तरीके से फट गया


मुँह से कुछ ना बोल सका वो, बस इतना इशारा किया

कि आज मेरे घरवालों को कोई, राशन जाकर दे दो जरा

वरना वो सभी भुखे मर जायेगे, मेरी बाँट देखते देखते

माँ पिता बच्चों संग पत्नी रो पडी, इतनी बात सुनते सुनते


पिता ने खुद को सँभाल, उस शक्स से नया प्रश्न किया

क्या मेरे इकलौते लाल का, क्रियाकर्म आपने कर दिया ?

अभी नहीं किया उस शक्स ने, पिता को जबाव दिया

पोस्टमार्टम पंचनामा करने, उसका शव मुर्दाघर भेज दिया


इतने में एक सफेद गाडी में, बेटे का शव भी आ गया

साइरन की आवाज सुन कर, सारा मोहल्ला ही जाग गया

माँ पिता बच्चों संग पत्नी का, रो रो के हाल बुरा हुआ

चीख पुकार की आवाजे सुनके, पुरे मोहल्ले में मातम हुआ


एक मात्र सहारा था जो, वो भी भगवान ने छिन लिया

औढ के कफन मरने वाला अब, अपनी यात्रा पर चल दिया

छोड़ गया पीछे मरने को, अपने माँ पिता पत्नी बच्चे

मगर अब कौन लेकर आयेगा, इनके जीवन में दिन अच्छे


नयी सुबह थी चारो ओर, पर इनके घर अंधियारा था

भगवान ने भी छल कपट से, एक गरीब का बेटा मारा था

माँ पिता ने कुदाल उठायी, पत्नी बच्चों को साथ लायी

मेहनत मजदूरी करने को, मात्र दो वक्त की रोटी कमाने को


तो कैसी लगी आपको, एक मजदूर की मौत की कहानी

इसको पढकर क्या आपकी, आँखों में भी आ गया है पानी

गरीब की गरीबी से लड़ाई, ऐसे ही हमेशा चलती रहेगी

ऐसे गरीब को मौत भी मार कर, युगों युगों तक दुखी रहेगी।


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