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Saurabh shubh

Romance Tragedy

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Saurabh shubh

Romance Tragedy

एक कायर प्रेमी

एक कायर प्रेमी

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आज मैंने उसे शादी के बाद पहली बार देखा।उसके चेहरे की दौलत बता रही थी कि वो मुझे पूरी तरह भूलकर जीवन को एक नया मोड़ दे चुकी है।

........मैं उसे पहचान लिया था और पहचानता भी कैसे न,पढ़ाई को छोड़कर मुझे सारी बाते याद रहती है।सोचा उससे थोड़ी बात करूं लेकिन मैं तो नज़र मिलाने के भी काबिल न था।..


अचानक एक ऑटो आयी...वो और उसकी बहन दोनो उसमे बैठ गयी..ऑटो चल पड़ी और मैं उसे ऐसे देख रहा था जैसे उदास पंक्षी शाम के सूरज को निहार रहा हो..!!अचानक, वो पीछे मुड़ी.. मैंने भी गर्दन घुमा लिए ताकि वो देख न पाए।10 सेकंड बाद पलट कर देखा तो दूर दूर तक धूल उड़ रही थी।..!!

आज से ठीक 6 महीने पहले उससे आखिरी बार बात हूँ ई थी।शादी वाले दिन ही शाम को फ़ोन किया था उसने...


,'मेरी अर्थी जाने को है, हो सके तो हमेशा के लिए भूल जाना' उसने कराहते हूँ ए कहा था..!!


मैं भी कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन बोल नही पाया। रूह सी कांप गयी..!!"अच्छा..अपना ख्याल रखना..रखती हूं।...लव यू फॉर एवर "


'अर्रे'..मेरे इतना कहते ही फोन कट गया । अगली कई बार मैंने नंबर मिलाया पर शायद ब्लॉक कर चुकी थी..!! मैं तुरंत व्हाट्सएप्प पर जा कर उसको मैसेज किया " देखो,हम इस जन्म में एक न हक सके..शायद ऊपरवाले को मंजूर नही था, मुझे माफ़ कर देना, मैं हमेशा ही तुम्हारा दोस्त बन कर रहूंगा'। "


मैसेज सेंड करके मैं ब्लू टिक होने का इंतज़ार कर रहा था कि कुछ मिनट बाद ध्यान आया कि जहाँ रंग-बिरंगी तितलियां होती थी वहां कुछ नही है,मतलब dp गायब थी उसकी। मैं यहाँ से भी ब्लॉक था, और कोई स्रोत नही था बात करने का।मुझे एक मलाल सा रह गया कि मैं अपना आखिरी संदेश भी न भेज पाया..इसकी टीस हमेशा रहेगी। कौन कहता है स्त्रियां नाजुक और कोमल होती है...एक बार जिसको अपनी संजीवनी मान ले,उसे जीवन भर नही छोड़ती और एक बार जिसे छोड़ दे उसे जीवन मे पीछे मुड़कर भी नही देखती..!!मैं प्रेम में पूरी तरह हार चुका था और मुझे हारने का बहाना भी नही मिल रहा था।वह मुझे कई बार दबाव देकर बोली कि अपने मम्मी पापा से शादी की बात करो लेकिन मैं हमेशा ही इस बात को मजाक में लिया कि उम्र ही क्या है मेरी..!!


मैं अपने बारे में थोड़ा-सा बता दूँ कि मैं एक डरा-डरा सा लड़का हूँ । 'डरा-डरा सा' in the sense की मुझे बगावत करने नही आता,मैं समाज के नियमों का उलंघन नही कर पाता..मैं घर की मर्यादा, माँ-बाप के दिये संस्कारों के भीतर ही रहता हूं..यू कहे,थोड़ा लाड-प्यार और ख़ौफ़ में पला बढ़ा हूँ ..!!


हमदोनो ने हमेशा से ही फैमिली को पहले स्थान पर रखा था। मेरी और उसकी सोच काफी मिलती थी। हम दोनों के बीच कोई ऐसी बात नही हूँ ई थी जिसमे हम भागने-भगाने जैसे शब्द यूज़ किये हो।..हमे ये तो नही पता था कि ये प्रेम का सफर कहा तक होगा लेकिन ये निश्चित था जो भी होगा दोनों परिवार की स्वीकृति के उपरांत ही होगा..!!


मैं बहूँ त डरता था घरवालो से शादी की बात करने को। उम्र की अनुमति नही थी। दिल भले ही तुम्हारे पास था पर हिम्मत कहा थी पता नही..!!


क्या करूँ यार..मैं ज़िन्दगी का बहूँ त बड़ा लूज़र हूँ ,कायर हूँ और डरपोक भी हूँ ।हमेशा से ही मुझे छला गया है। कभी कुदरत ने हराया तो कभी किस्मत ने दगा किया..!!


कहते है किसी चीज़ को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे मिलाने में लग जाती है।....शायद किस्मत,कुदरत के साथ-साथ कायनात भी मुझसे बैर रखती थी। मुझे किसी से लड़ना नही आया..मैंने हमेशा ही दूसरों को खुशिया और प्यार दी और बदले में यही उम्मीद भी किया..!!


पता नही यार गलती किसकी थी..मेरी, किस्मत की या फिर वक़्त ही सही नही था..!!मैं चाय की चुस्की के साथ दिन की शुरुआत करता था और तुम्हारे 'गुड नाईट' के मैसेज से दिन की समाप्ति..!!छोटी-छोटी बातों पर खुश होना मुझे आता था लेकिन बड़ी-बड़ी बातो पर शांत रहना तुमने सिखाया..!!मैं चलता था, ठोकर खाता था,गिरता था और लगता था कि ज़िन्दगी यही ठहर जाएगी लेकिन तुम्हारे हौसले के एक शब्द मुझे दो कदम चलने को मजबूर करते थे..!! सच कहें तो जितना ज़िन्दगी ने नही सिखाया उतना तुमने सीखा दिया था..!!एक लड़की अपने प्रेमी के शर्ट के टूटे हूँ ए बटन से लेकर आत्मविश्वास तक जोड़ने की क्षमता रखती है..!!


जब स्कूल में बेइज्जती होती थी और पापा निकम्मा बोलकर खरी-खोटी सुनाते थे तो मैं डिप्रेस हो जाता था..लेकिन तुमसे बात करने के बाद लगता था कि तुम हर दर्द की दवा हो..!!मैंने कभी तुम्हे चांद नही कहा,पता है क्यों.. क्योकि चांद सिर्फ रात को दिखता है लेकिन मुझे तुमको हर वक़्त देखना था...पर निकली तो चाँद ही न..सिर्फ रातो को दिखती हो वो भी ख्वाबो का सहारा लेकर..!!मेरी मम्मी हमेशा कहती थी कि बेटा कोई हाथ से छीन कर ले जा सकता है, नसीब से नही..लेकिन तुम्हे तो नसीब से भी किसी ने छीन लिया..!! या फिर शायद नसीब में तुम थी ही नही..जो भी हो लेकिन हमने सच्चा प्रेम किया..न कि तुम मुझसे रिचार्ज करने के लिए बात करती और न मैं timepass के लिए..!!


हम इस जन्म में न मिल सके, कोई नही..अगर हमारा प्रेम सच्चा होगा तो किसी और जन्म के लिए हमसफ़र जरूर बनोगी।...और इस बार जरूरत पड़ी तो मैं बगावत भी करूँगा,समाज से लड़ूंगा भी। प्रेमी नही मैं आशिक़ बनूँगा क्योंकि मैंने प्रेम को अक्सर हारते हूँ ए देखा है..!!मैं अश्क को अब इश्क़ ही समझता हूं। ज्यादा कुछ तो नही,लेकिन कॉल्स और मैसेज की history पढ़ता हूं तो आंखे छलक उठती है।तुम्हारे जाने के बाद न तो मैंने सिगरेट को हाथ लगाया और न ही मैंने शराब छुई। मैं उनमे से नही जो कि प्रेम में हारने के बाद अपनी नसे फाड़ लू..बहूँ त ही लाड प्यार से पाला है माँ ने..!!न ही मैंने sad song सुने और न ही इसका असर पढ़ाई पर पड़ने दिया..!!मेरा लगाव अध्यात्म के तरफ थोड़ा ज्यादा था तो मैं वही पुस्तको को पढ़कर दिन गुजारता था..!!ज्यादा बदलाव भी नही आया है तुम्हारे जाने के बाद,बस अब शर्माना छोड़ दिया है और झिझक भी न रही मुझमे..!!तुम्हारे जाने के बाद मैंने खुद से भी एक वादा किया कि दुबारा कभी किसी से इश्क़ नही करूँगा, बस प्रेम लिखूंगा..अब तक उस वादे को निभा रहा, उम्मीद की आगे भी निभाउंगा..!!ज्यादा कुछ चाहिए भी नही ज़िन्दगी से, बस life settle हो जाये। पैसे इतने कमाऊ की माँ बाप की ख्वाइश पूरी कर सकू..बाकी मेरे साथ का किरदार वो तय करेंगे..!!मुझे लगता है पहले की तरह आज भी तुम मेरी लेखनी पढ़ती हो..फर्क इतना है कि पहले कंप्लीमेंट्स देती थी अब पता नही..!!


अगर तुम सच मे इसे पढ़ रही हो तो वही आखिरी संदेश देना चाहूंगा, 'मैं हमेशा ही तुम्हारा एक अजनबी दोस्त बनकर रहूंगा'। अगर तुम्हें लगता है कि मैंने बहूँ त देर कर दी थी तो उसके लिए क्षमा कर देना..और रही सही गलतियां भी माफ कर देना ताकि इस टीस से मुक्ति पाकर मैं भी अलग दिशा में कदम बढ़ाऊ..!!


अच्छा, अब लिखना बन्द करता हूँ ..ऐसा न हो कि मेरे ही आंसू मेरे पश्चताप के दुश्मन बन जाये।आंसुओ से स्याहिया बिखर रही है पन्नो पर..!!वो शख्स भी क्या किस्मत लिखवा कर आया होगा जिसके हिस्से में तुम गयी..!तुम दोनों को आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं।


तुम्हारा दोस्त

 सौरभ


ऐसा नही है कि किसी के जाने से ज़िन्दगी रुक जाती है पर हां, ज़िन्दगी वैसे भी नही रहती।  


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