एक दीवानगी

एक दीवानगी

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क्रिकेट का भगवान अर्थात "सचिन तेंदुलकर''

और इस भगवान के फैन अर्थात "सुधीर कुमार गौतम।"

सुधीर कुमार दीवानगी की हद तक प्यार करता है, किसी 'लड़की' से नहीं ,बल्कि 'क्रिकेट' से !

आज के समय में "टीम इंडिया " के किसी मैच में अपनी बाॅडी पर तिरंगा पेंट किये, हाथों में एक बड़ा सा तिरंगा लहराते हुए टीवी स्क्रीन पर नजर आ ही जाता है।

क्रिकेट में मेरी दिलचस्पी कभी नहीं रही, यद्यपि इंडिया-पाकिस्तान का मैच हो तो जरूर टीवी स्क्रीन पर नजरें गढ़ा लेती हूँ और इन्हीं किसी लम्हों में सुधीर कुमार को पेंट लगाये अवस्था में स्क्रीन पर देख चुकी थी।

कोलकता निवास के दौरान हमेशा मेरे पति की मुझसे यह शिकायत रही कि मैं कभी भी उनके साथ टीम इंडिया की मैच देखने स्टेडियम नहीं जाती हूँ।

सच बताऊँ, स्टेडियम जाने का दिल कभी किया ही नहीं ! उससे ज्यादा आनंद मुझे किसी पार्क के पेड़ की ठंडी छाँव में बैठ कर लिखने में आता है। यहाँ तक कि चिपचिपी गरमी में बैठकर किसी पुस्तक को खंगालने में ज्यादा सुकून मिलता है।

हाँ ,यात्रा का मुझे काफी शौक है।वैसे भी कार्य के सिलसिले में आना- जाना लगा ही रहता है।

इस बार की यात्रा में मेरे साथ मेरे पतिदेव भी थे। एक शादी समारोह में शामिल होने हम लोग धनबाद जा रहे थे।

हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस छूटने ही वाली थी कि हड़बड़ाते हुए एक शख्स हमारे सामने आ कर बैठा। बाहर से तीन-चार व्यक्तियों ने खिड़की के शीशे से चेहरा सटाकर उसे हाथ हिलाते हुए विदाई दी।

मेरे पतिदेव कानों में फुसफुसायें, "इन्हें पहचानती हो ?

मैंने ध्यान से देखते हुए 'न 'में सिर हिलाया।

पतिदेव ने उसे शख्स से हाथ मिलाते हुए कहा, आप सुधीर कुमार हो न ? सचिन तेंदुलकर के फैन ? आइ एम आई. आर.टी.एस.----------।"

सामने वाले ने तत्परता से हाथ मिलाते हुए हाँ में जवाब दिया।

फिर क्या था ! दोनों क्रिकेट प्रेमियों के बीच क्रिकेट का रस टपकने लगा।

मैं सुधीर कुमार को पहली बार "पेन्ट " के बिना देख रही थी। दुबला-पतला, चेहरे पर मुस्कान लिए हुए सरल, सौम्य सा व्यक्तित्व था उसका।

क्रिकेट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होने के कारण मैंने उनकी बातों में हस्तक्षेप नहीं किया।

मगर सुधीर कुमार की क्रिकेट के प्रति दीवानगी देखकर मैं हतप्रभ थी।

मुजफ्फरपुर से ताल्लुक रखने वाला" सुधीर कुमार" हर मैच में उपस्थित रहने के लिए तीन नौकरियाँ छोड़ चुका था। दिल्ली में इंडिया-पाकिस्तान का छठा वन डे मैच मिस न हो जाए इसलिए उसने अपने इंटरव्यू का लेटर ही फाड़ दिया था।

उसने बताया कि साल 2003 में इंडिया, आस्ट्रलियाऔर न्यूजीलैंड की सीरिज में 1 नवंबर को इंडिया-आस्ट्रलिया का मैच था। वह 8 अक्तूबर को अपने घर से मुंबई के लिए साइकिल पर रवाना हो गया और 24 अक्तूबर को मुंबई पहुँचा।

उस समय एक इवेंट में सचिन के आने पर वह सिक्योरिटी को चीरकर सचिन के पास पहुंच कर उसके पाँव छू लिए थे।

सचिन ने अगले दिन उसे अपने घर बुलाया और खाना खिलाया, साथ ही अगले वन डे मैच का पास भी दे दिया। सुधीर ने बताया कि वह किसी मैच में व्यस्त रहने के कारण अपने भाई तथा बहन की शादी में शामिल न हो पाया था।

पिछले वर्ल्ड कप के समय सचिन ने खुद उसे सेलिबेरशन् के लिए ड्रेसिंग रूम में बुलाया था और वर्ल्ड कप को उठाने का मौका भी दिया था। उसने बताया कि अब तक वह 204 वन डे, 40 टेस्ट मैच, 43 आई पी एल और 17 टी- टुएन्टी मैच देख चुका है। उसे "ग्लोबल फैन अवार्ड" भी मिला है।

अपना खर्चा चलाने के लिए वह कुछ प्राइवेट जाॅब या कुछ इवेंट में काम कर लेता है। इस बार के वर्ल्ड कप में जाने का खर्च उसके दिल्ली का एक मित्र उठाएँगे।

उसका कहना था कि परिवार वाले उससे शादी करने के लिए कहते हैं मगर वह राजी नहीं होता है। उसने कहा कि उसकी जिंदगी पूरी तरह से क्रिकेट को समर्पित है, क्रिकेट के अलावा उसे कुछ नहीं सूझता।

अनेक बार सचिन से मैदान मे मिलने जाने के चक्कर में सिक्योरिटी तोड़ने के कारण पुलिस ने पकड़ लिया, जिसे सचिन ने छुड़ाया था।

सचिन को वह भगवान मानता है। इस बार मैंने अपने चार घंटे के सफर में एक शब्द भी नहीं कहा, केवल सुनती चली गई। उसके क्रिकेट के प्रति दीवानगी देखकर चकित होते चली गई।

जंक्शन आने ही वाली थी। उसने मेरे पति देव को फेसबुक में फ्रेंड रिकवेस्ट भेजने के लिए कहा मगर रिकवेस्ट भेजे जाने पर एक्सेप्ट नहीं हो पा रहा था। उसने बताया कि उसके लिस्ट में पांच हजार दोस्त है। फिर उसने एक यू.ए.इ.के दोस्त को हटा कर पति देव को शामिल कर लिया।

गाड़ी धनबाद स्टेशन पर रुकी और हमने सुधीर कुमार से विदा ली।

जब मैंने पहली बार पतिदेव के साथ आइ .पी .एल.देखने ईडन गार्डन जाने की बात कही तो वह बिलकुल अवाक रह गये।

कहा, "तुम कब से क्रिकेट में दिलचस्पी लेने लगी ?

मैं मुस्कराते हुए चुप रही। मुझे तो उस पेन्ट किये हुए "सुपर फैन" को तिरंगा लहराते हुए देखना था ! टीम इंडिया के उस" सुपर फैन " की मैं फैन हो चुकी थी।


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