धोखा
धोखा
दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया है,
उम्र भर का गम हमें इनाम दिया है।
रेडियो पर यह गाना चल रहा था। स्वाति को अपना पूरा सारांश जीवन का इस गाने में नज़र आ गया। अब तो उसके पास किसी चीज़ की कमी नहीं थी। पर उन दिनों को याद करके उसका मन खिन्न हो जाता था। स्वाति आज एक मशहूर लेखिका है। पर उसके पीछे की तपस्या किसी न तो देखी न जानी। उसका संघर्ष सिर्फ उसी का था। और उसकी बेटी रूही का।
स्वाति एक बहुत ही सिंपल पर स्ट्रांग माइंड वाली लड़की थी। उसके माँ -बाप बचपन में ही उसे छोड़ कर चले गए थे। उसके मामा मामी ने उसे पाला था। मामा की एक बेटी भी थी नीलोफर।
वह ऊंचे सपने देखने वाली बिगड़ी लड़की थी। मामा मामी के लाड प्यार में बिगड़ चुकी थी। उसे बहुत ही अमीर लड़के से शादी करनी थी। स्वाति फिर भी उसे समझाती, कि जितना प्रभु ने दिया है, उसमे खुश रहो। आकाश एक बड़े बिज़नेस मैन थे। वह शादी के लिए हमसफर की तलाश में ही था। स्वाति गाती बहुत अच्छा थी।
एक प्रोग्राम में आकाश ने उसकी आवाज़ सुनी। और तय कर लिया इसी से शादी करूंगा।
आकाश स्वाति के घर रिश्ता लेकर आये। मामा मामी ने सोचा कि नीलोफर के लिए रिश्ता आया है। क्योंकि नीलोफर स्वाति से ज़्यादा सुन्दर थी। पर जब आकाश ने स्वाति का हाथ माँगा, तो सबके मुँह खुले रह गए।
नीलोफर को तो रोना ही आ गया। पर अपने आप को सँभालते हुए मामा मामी ने स्वाति का विवाह आकाश के साथ कर दिया। स्वाति अपनी आँखों में सपने लिए ससुराल आ गयी। कुछ दिन तो सब ठीक चला, पर आकाश एक बिगड़ा हुआ रहीस ज़ादा था। जो शराब और शबाब दोनों में डूबा रहता था। स्वाति ने अपने प्रेम से बहुत कोशिश की उसे सुधारने की पर कोई फयदा नहीं हुआ। स्वाति ने समझौता कर लिया। तभी स्वाति के जीवन में ख़ुशी आयी। स्वाति माँ बनने वाली थी।
आकाश ने नीलोफर को उसकी देख भाल के लिए बुला लिया। स्वाति ने मना किया पर आकाश नहीं माना। दिन गुजरने लगे और साथ में आकाश और नीलोफर के प्रेम सम्बन्ध भी। फिर डिलीवरी की डेट आ गयी। और स्वाति ने एक प्यारी सी लड़की को जनम दिया और नाम रखा रूही।
घर आयी तो सब कुछ बदला हुआ था। स्वाति का कमरा बदल गया था। उसे नीचे का कमरा दे दिया गया था। और नीलोफर उसके कमरे में शिफ्ट हो गयी थी। जब स्वाति ने सवाल उठाया तो आकाश ने कहा -” अब यह हि तुम्हारा कमरा है।” नीलोफर मेरे साथ ऊपर रहेगी।” स्वाति के पैरों तले ज़मीन खिसक गयी।” उसने सोचा अब रहने का कोई फयदा नहीं उसने रूही को उठया और जाने लगी।
पर आकाश ने रोक लिया और कहा -” तुम्हे जाना है , तो जाओ रूही का बाप अभी ज़िंदा है। ” वह ठोकरे नहीं खायेगी तुम्हारे साथ।” स्वाति के जैसे प्राण निकल गए। उसने बहुत सोचा और रूही को नहीं ले जाने का फैसला किया। ” रोते हुए उसने कहा कि -रूही को कोई कष्ट मत देना।” और घर से बहार निकल गयी।
अपने पुराने काम पर गयी, जहाँ वह गाना गाती थी। वहां पर उसे देखते ही रख लिया गया। अपने मधुर व्यवहार और अच्छे काम की वजह से सब उसे पसंद करते थे। वही पर एक बहुत कुशल और संजीदा पुरुष भी काम करते थे -राजेश। जो कि स्वाति को बहुत पसंद करते थे। पर कभी कहने की हिम्मत नहीं कर पाते थे।
स्वाति अपने काम में खूब मशरूफ रहती थी। लेकिन रूही की याद उसे हमेशा आती थी।
उधर नीलोफर को कोई बच्चा नहीं हुआ -वह कहती यह दीदी का श्राप है ,जो कि मुझे धीरे- धीरे खा रहा है। आकाश का बिज़नेस भी कुछ अच्छा नहीं चल रहा था।
स्वाति कभी कभी चुपके से रूही से मिलने स्कूल चली जाती थी। और कहती मैं तुम्हारी बदनसीब आंटी हूँ।
दिन गुजरने लगे और स्वाति एक बहुत बड़ी लेखिका बन गयी। अपना नाम उसने स्मिता रखा। उसकी कहानिया दर्द से निचोड़ी हुई होती थी।
अब रूही इतनी बड़ी हो गयी थी कि उसकी शादी को लेकर सब लोग बातें करने लगे। पर आकाश तो क़र्ज़ में डूबा हुआ था। नीलोफर ने कहा -आप एक बार दीदी से मिल आओ -वो बहुत बड़ी लेखिका बन गयी है।” आकाश ने कहा – क्या मुँह लेकर जाऊ उसके पास जिसको सिर्फ धोखा दिया हो। ” दीदी का दिल बहुत बड़ा है, वो आपको माफ़ कर देंगी।”
आकाश ने स्वाति से अपॉइंटमेंट लिया और उसके दफ्तर पहुँच गया। स्वाति को देखकर शर्म से पानी पानी हो गया। आकाश ने अपना दुखड़ा गाया।
स्वाति ने कहा मै सिर्फ अपनी बेटी की कर्ज़दार हूँ , आपकी नहीं -इसलिए यह १० लाख का चेक रूही के लिए। ” उसकी शादी धूम धाम से करियेगा। और उससे कहियेगा की अपनी बदनसीब आंटी को माफ़ कर दे।”
आकाश चेक लेकर बहार आ गया। आज वह बहुत पछता रहा था। पर अब क्या हो सकता है ,जब चिड़िया चुग गयी खेत। रूही की शादी बहुत धूम धाम से हुई। लेकिन स्वाति उस शादी में नहीं आयी। नीलोफर ने कहा -“दीदी ने हमें माफ़ नहीं किया , शायद कुछ गुनाहों की माफ़ी नहीं होती।”
धोखा ऐसा घाव है ,जो नासूर बन जाता है। और दर्द बहुत देता है। इस जुर्म का सिर्फ प्रभु साक्षी है।
कभी धोखा देना हो तो अपने बारे में सोच लेना क्योंकि उसकी लाठी में आवाज़ नहीं होती।और जब पड़ती है तो ज़ोर से पड़ती है।
