अधूरा सा प्रेम
अधूरा सा प्रेम
"डॉक्टर, उनका कार्ड" रिसेप्शनिस्ट ने डॉक्टर रेवा के चेंबर का दरवाजा खोलते हुए कहा। "ठीक है, टेबल में रख दो" कॉफी का सिप लेते हुए डॉक्टर रेवा ने कहा।
डॉक्टर रेवा एक मशहूर मनोचिकित्सक थी जिन्होंने ना जाने कितने किशोर किशोरियों को गलत कदम और गलत राह में जाने से रोका है। वह युवा पीढ़ी के लिए मुफ्त हेल्पलाइन भी चलाती हैं, उनकी काउंसिलिंग करती है। रेवा को अपने इस कार्य के लिए कई बार अवॉर्ड्स और मेडल्स से भी सम्मानित किया गया है। रेवा को अपने कार्य में मान- सम्मान , पैसा और उन किशोर किशोरियों के माता-पिता से भरपूर आशीर्वाद मिलता था पर वह यह कार्य को सिर्फ अपना जॉब नहीं मानती थी वह तो इसे एक मुहिम की तरह देखती थी जिसमें वह यंग जनरेशन को मानसिक रूप से सशक्त और मजबूत बनाना चाहती थी। उन्हें ईश्वर की दी हुई अमूल्य जीवन का मोल और अर्थ समझाना चाहती थी।
आज डॉक्टर रेवा के समक्ष इक एसिड विक्टीम का केस आया था। ये केस डॉक्टर रेवा के लिए काफी चुनौती भरा था। पीड़िता के माता-पिता काफी दिन से रेवा के अपॉइंटमेंट का वेट कर रहे थे। सुरीली नाम था लड़की का, जिसे किसी सरफिरे आशिक ने एसिड फेंक कर जला दिया था। उस हादसे के बाद सुरीली ने खुद को कई बार खत्म करने की कोशिश भी की थी । वह तो न किसी से मिलती थी ना कमरे से बाहर निकलती थी। इसलिए उसके माता-पिता ने पर्सनल रिक्वेस्ट की डॉक्टर रेवा से घर आकर सुरीली का ट्रीटमेंट और काउंसलिंग करने के लिए।सुरीली की माताजी तो डॉक्टर रेवा के पैर पड़ कर अपनी बेटी को वापस पहले जैसा करने की विनती करने लगी। वैसे तो डॉक्टर रेवा अपनी क्लीनिक में ही प्रेफर करती थी पेशेंट को मिलना पर यह केस थोड़ा सेंसिटिव था इसलिए वह मान गई । रेवा ने सारी रात इस विषय में खूब अध्ययन किया , एसिड अटैक विक्टिम्स की मानसिकता को समझने का प्रयास करती रही। दूसरे दिन सुबह सुरीली के माता पिता के विजिटिंग कार्ड के दिए पते पर डॉक्टर रेवा पहुंच गई। उस वक्त सुरेली सो रही थी। सुरीली की मम्मी ने सुरीली को जगाना चाहा, पर रेवा ने उन्हें इशारे से मना कर दिया और उन्हें कमरे में अकेला छोड़ने को कहा । डॉक्टर रेवा सुरीली के कमरे के कोने कोने को देखने समझने की कोशिश करने लगी ।इस प्रकार वो सुरीली के मूल व्यक्तित्व तक पहुंचना चाहती थी। सुरीली के अलमारी में पड़े जींस टॉप, सूट यहां तक की साड़ी यह दर्शाते थे कि वह पाश्चात्य संस्कृति को मानती तो थी पर अपने भारतीय संस्कार से भी जुड़ी हुई थी, ड्रेसिंग टेबल पर दो चार मेकअप उत्पाद को देखकर यह पता चला कि मेकअप का कुछ खास शौक नहीं रखती थी पर आईने पर लगा थॉट ऑफ़ द डे जोकि 4 महीने पुराना था, बतला रहा था की वह काफी उत्तम विचारों वाली थी, साथ ही अंदर से काफी मोटिवेटेड और आशावादी थी। लगता था कि वह हर रोज नए थॉट्स लगाती थी पर हादसे के बाद जीवन और उसके थॉट्स सब रुक से गए थे। कमरे परदे आदि का कलर उसे शांत शालीन बता रहा था। वहीं उसके स्टडी टेबल पर पड़े किताबों से पता चला कि वह जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में पढ़ाई कर रही थी ।पास रखे सेल्फ में कुछ सर्टिफिकेट्स, मेडल्स और तस्वीर में माइक में बोलते हुए सुरीली की तस्वीर भी थी जो काफी सुंदर नैन नक्श और एंबिशियस दिखा रहा था सुरीली को पर वर्तमान सुरीली और उसके दर्द को महसूस कर इक पल को रेवा की आंखे भीग गई।
डायरी के पन्नो को पलटते हुए रेवा ने बहुत कुछ जान लिया था, इस हादसे के वजह भी जो सिर्फ एक लड़की की 'ना ' थी।
सुरीली का नाम उसके व्यक्तित्व के अनुसार ही था, वह अपनी बातों से अक्सर लोगों को प्रभावित कर लेती थी। वो Rj बनना चाहती थी ।उस दिन रेवा बस इन्हीं जानकारियों के साथ चली जाती है।
उस दिन के बाद डॉक्टर रेवा सुरीली के घर हर रोज़ विजिट करती। उसके मम्मी पापा हर रोज आस लगाए उसे देखते और डॉक्टर रेवा आंखों से भरोसा रखने का इशारा कर सीधे सुरीली के कमरे में चली जाती। कमरा भी अंदर से बंद कर न जाने ही क्या बातचीत करती सुरीली से। कभी तो 10 मिनट में ही निकल कर चली जाती तो कभी दो-तीन घंटे रहती, कभी ज़ोर ज़ोर की चीखने चिल्लाने की आवाज आती तो कभी सुई गिरने सी भी आवाज़ न आती कमरे से। कभी रोने की, कभी कुछ टूटने की, कभी कोई म्यूजिक या टीवी पर कोई शो की आवाज। यूं ही ये सिलसिला लगातार तीन महीने तक चलता रहा । सुरीली के माता पिता बस चुपचाप धैर्य और विश्वास के साथ डॉक्टर रेवा को आते जाते उम्मीद से देखते रहते । डॉक्टर रेवा भी इस केस को काफी पेशेंस के साथ डील कर रही थी, कुछ अलग ही अंदाज था उनका, जो उन्हें बाकी प्रैक्टिशनर से अलग बनाता था।
सुरीली जैसी जिंदादिल इंसान को वो जीवन रूपी रंगमंच पर वापस लाने की पूरी कोशिश कर रही थी । सुरीली के चेहरे का आधा हिस्सा झुलस चुका था । तन पे पड़े घाव तो आजकल साइंस भर ही देता हैं पर रेवा सुरीली के मन की पीड़ा को कम करने पर फोकस करने लगी।
रेवा ने इस केस के लिए और भी डॉक्टर्स जैसे न्यूरो और प्लास्टिक सर्जन आदि से भी संपर्क कर रखा था।
धीरे धीरे सुरीली की मन:स्तिथि में सुधार दिखना शुरू हो रहा था।डॉक्टर रेवा के साथ पहली बार सुरीली कमरे से बाहर आई । रेवा की मेहनत रंग लाना शुरू कर चुकी थी, थोड़ा-थोड़ा कर सुरीली अपने आप से मिल रही थी। रेवा न सिर्फ डॉक्टर थी पर अब उसकी दोस्त बन चुकी थी। कभी रेवा सुरीली को गार्डन में चिड़ियों की आवाज सुनने को कहती तो कभी हरी घास पे चलने को, कभी फूलों की खुशबू लेने को कहती तो कभी सूरज की गर्मी महसूस करने को। सब कुछ अजीब सा प्रतीत होता था, पर जो भी था देख कर सुरीली की माता पिता आत्म विभोर हुए जा रहे थे।ऐसा लग रहा था जैसे सुरीली को जन्म तो किसी और ने दिया हो पर मां बन कर डॉक्टर रेवा उसे जीना सीखा रही हो। सुरीली भी अपने मन की बात रेवा से करती थी।रेवा ने उसे फिर से डायरी थॉट आदि लिखने को प्रोत्साहित किया। फिर क्या धीरे-धीरे रेवा ने उसे फिर से कॉलेज जाने के लिए, अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करने के लिए तैयार कर लिया। माता पिता की तो अपनी बेटी को परिवर्तित होते जान में जान आ गई। रेवा ने एक साथ तीन लोगों की जिंदगी बदल दी। पहले दिन तो सुरीली किसी छोटे बच्चे की तरह घबरा रही थी, पर रेवा ने भी उसे मां की तरह कॉलेज जाने तक सहयोग दिया। पर कहते है न वक्त हर घाव में मरहम लगा ही देता है, सुरीली फिर से तिनका तिनका कर अपना आत्म बल वापिस पा रही थी।
अब रेवा को सुरीली के घर विजिट पे जाने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि सुरीली उनसे अपने मन की हर बात चाहे वो कॉलेज में बीता दिन का हाल हो या अपनी कोई नई स्पीच या थॉट, सब कुछ हर रोज़ फोन पे ही सुना देती थी। रेवा भी उसकी हर बात गौर से सुना करती ।रेवा का मानना था की ऐसे पेशेंट्स को सुनने वाले ही चाहिए होते है, जहां खुल के मन की बात कही जा सके, इससे पेशेंट्स का स्ट्रेस लेवल कम होता है, और वो पेसिमिस्ट( निराशावादी) से ऑप्टिमिस्ट( आशावादी) बनता जाता है।
देखते देखते सुरीले के फाइनल ईयर कंपलीट हो गए और उसे केंपस सिलेक्शन में रेडियो FM में Rj की जॉब भी मिल गई जैसा कि उसका सपना हुआ करता था। वह सबसे पहले डॉक्टर रेवा के पास मिठाई का डब्बा लेकर पहुंची, सुरीली की कामयाबी पर रेवा को काफी गर्व हो रहा था। उसी वक्त डॉक्टर रेवा ने बताया कि उसने प्लास्टिक सर्जरी में उसके लिए डॉक्टर से कंसल्ट कर उसके लिए अपॉइंटमेंट ले लिया है। पर सुरीली ने उसके लिए साफ मना करते हुए कहा, "दिदी मैं इसी रूप में जीना चाहती हूं, उन दरिंदों ने मेरा चेहरा बिगाड़ा था, मेरे अंदर उड़ान भरने की क्षमता को नहीं। वैसे भी सुरीली की पहचान उसकी आवाज थी ना कि उसका रूप।" यह सुनकर रेवा को सुरीली से ज्यादा खुद पर गर्व हुआ की उसने सुरीली जैसी बहादुर और जिंदादिल इंसान को खौफ और बिचारेपन के काले साए से बाहर निकाल लिया।वैसे भी कहीं ना कहीं सुरीली और डॉक्टर रेवा के जीवन का मकसद एक जैसा था, युवा पीढ़ी को प्रेरित करना।फिर क्या था, दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त हो गए। डॉक्टर रेवा भी फुर्सत में अक्सर क्लिनिक पर रेडियो पर सुरीली का शो, 'आपकी कहानी सुरीली की ज़ुबानी ' सुनती और साथ में सुरीली को अपने फीडबैक्स भी देती। सुरीली उन्हें गुरू और दोस्त दोनों जो मानती थी।जल्द ही सुरीली और सुरीली का शो शोहरत पा रहा था।
कुछ समय बाद अपनी टीम के साथ सुरीली दिल्ली हेडस्टेशन एक सेमिनार में शामिल होने के लिए जाती है। पूरी टीम एक ही होटल में चेक इन करते है।उसी होटल में राहुल नाम का एक लड़का रिसेप्शन में आता है, पास रखे सुरीली के आधार कार्ड पे उसकी नजर पड़ी। वह सोच में पड़ गया, 'सुरीली यहां ?' उसने रिसेप्शनिस्ट से उसके बारे में जानना चाहा पर उसने कॉन्फिडेंशियल बोल कर मना कर दिया।राहुल अपने इलाज के सिलसिले में दिल्ली आया था, अभी वो अस्पताल की ओर निकल ही रहा था की होटल के गेट के सामने कुछ भीड़ सी लगी थी, पहले उसने इग्नोर कर आगे जाना चाहा, पर जाने कौन सी ताकत उसे भीड़ तक ले आई। पास जाने पर पता चला की कुछ फैंस अपने किसी फेवरेट Rj का ऑटोग्राफ ले रहे थे। शख्स कौन था ठीक से देख न पाया और देर हो रही थी सो वो जाने को मुड़ा ही था की, तभी किसी की आवाज़ सुनाई दी, "सुरीली जी, सुरीली जी, एक सेल्फी ।" पीछे मुड़ के देखा तो सुरीली का आधा चेहरा ही दिखा, देखते ही पल में खुशी से आंखे चमक उठी पर उसने अपने कदम रोक लिए और वापिस अपने मार्ग पर चल पड़ा।रास्ते भर राहुल पुरानी यादें याद करने लगा, सुरीली वो कैसे दोस्त बने, फिर प्यार और फिर.........
अस्पताल में वेटिंग लाइन में बैठे बैठे उसने सुरीली के बारे में सभी सोशल मीडिया फेसबुक, इंस्टाग्राम हर जगह उसे सर्च कर उसके बारे में जाना।राहुल सुरीली की जिंदगी से बहुत पहले ही चला गया था और अपनी बीमारी से वो इतना टूट ही गया था की कभी फेसबुक, टीवी, रेडियो की तरफ ध्यान ही नहीं गया।पर इन सब में ये अच्छा हुआ की सुरीली आगे बढ़ गई।सुरीली की कामयाबी देख राहुल बहुत खुश था।
होटल पहुंचकर उसने फिर रिसेप्शनिस्ट्स से सुरीली का रूम नंबर वगैरह जानना चाहा, पर फिर उसने बताने से मना कर दिया।राहुल कल दिल्ली से वापस लौट रहा था तो सोचा की सुरीली को उसकी कामयाबी पर बधाई देता जाये सो उसने एक नोट लिखकर रिसेप्शनिस्ट को दे दिया कि वह उसे सुरीली तक पहुंचा दे। शाम की चाय के साथ वो नोट वेटर ने सुरीली तक पहुंचा दिया, उसमें लिखा था 'कांग्रेचुलेशन ऑन योर सक्सेस सुरीली।'पहले तो उसे लगा की किसी फैन ने भेजा है पर फिर अक्षर को ध्यान से देख उसे कुछ जानी पहचानी सी लगी।उसने तुरंत रिसेप्शन फोन कर नोट देने वाले के बारे में पूछा तो उसने बता दिया कि राहुल नामक व्यक्ति बार-बार आपके बारे में पूछ रहे थे। वो रूम 109 में रुके हैं, कल चेकआउट करेंगे। सुरीली भागती हुई तुरंत रूम नंबर 109 में नॉक करती है, राहुल गेट खोलता है और कुछ देर स्तब्ध रह जाता है सुरीली के चेहरे को देख कर।उसके मुंह से अनायास ही निकलता है, "सुरीली ये क्या....कैसे, कब.... क्या हुआ है, "उसे देख बिल्कुल घबरा जाता है राहुल।सुरीली उसे शांत करती है और फिर अपनी आपबीती सुनाती है, जो थी बड़ी भयावह।राहुल बच्चे की तरह बस सब सुन रोए ही जा रहा था।राहुल के मन में अपने लिए घृणा हो रही थी की क्यों उसने बीच रास्ते सुरीली को छोड़ दिया, काश वो उसके साथ होता, काश वो यह सब ना होने देता। तभी सुरीली माहौल को हल्का करते हुए बात घुमाती है और पूछती है "ओ, बुद्धु तू यहां अकेला आया है या रूपा भी आई है?" राहुल रुवांसे स्वर में बोलता है, रूपा उसके साथ नहीं है। सुरीली पूछती है, "नहीं है मतलब तुम दोनों शादीशुदा हो ना फिर अकेले क्यों?"
राहुल उठकर खिड़की के पास जाते हुए कहता है हमारी शादी नहीं हुई। दरअसल सच उसके आंखों में सुरीली पढ़ न ले इसका डर था उसे।सुरीली कुछ पूछती तभी राहुल को ज़ोर ज़ोर से खांसी होने लगती है।"क्या हुआ राहुल?" वो भाग कर ग्लास में पानी लाती है और राहुल को देने जाती है।पर राहुल के हाथ और मुंह में खून को देख चौक जाती है, " ये खून... कैसे राहुल चलो डॉक्टर के पास चलते हैं। राहुल खून साफ करते हुए, "अरे नहीं सुरीली, कुछ नहीं है, ये बस ऐसे ही ...."राहुल सुरीली से नजरें चुराते हुए कहता है।पर सुरीली समझ जाती है कि वो उससे कुछ छिपा रहा है।"राहुल बात क्या है, क्या छुपा रहे हो मुझसे?" सुरीली पूछती है।"मैं क्या.. कुछ भी तो नहीं" राहुल लड़खड़ाते आवाज़ में कहता है, तभी सुरीली उसे अपनी कसम दे देती है और राहुल फिर से फूट-फूट कर रोने लगता है, "मुझे माफ कर दो सुरीली मैंने तुम्हारा दिल तोड़ा, तुम्हें बीच रास्ते छोड़ा।मैं क्या करता सुरीली मुझे ब्लड कैंसर है सच बता कर तुम्हारी लाइफ बर्बाद नहीं करना चाहता था ।मैं और रूपा तो सिर्फ नाटक कर रहे थे हम कोई प्यार नहीं करते थे, मैं तो बस इतना ही चाहता था कि तुम मुझे भूल कर आगे बढ़ जाओ।"सच का ये कड़वा घूंट पीते हुए आंखों में आसूं लिए सुरीली कहती है, "जिंदगी भी कैसे-कैसे मोड़ लेती है राहुल, इन दो सालों में क्या से क्या हो गया, अलग होकर न तुम खुश रह सके और ना ही मैं।" तभी उसका हाथ पकड़कर सुरीली कहती है, "राहुल चलो डॉक्टर के पास, हम तुम्हारा अच्छे से इलाज करवाएंगे, तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगे।"राहुल हाथ छुड़ाते हुए, "दो साल से यही तो कर रहा हूँ, अब थक गया हूँ, अब मर जाना चाहता हूँ, यह दर्द और नहीं सहन होता।"सुनते ही सुरीली राहुल के गले से लग जाती है, दोनों एक दूसरे की बाहों में टूट कर बिखर जाते हैं जैसे एक दूसरे के दर्द को अपने अंदर समा लेना चाहते हो।कुछ देर एक दूसरे में खोए रहने के बाद सुरीली कहती है, "क्या तुम मेरा और मैं तुम्हारा सहारा बन सकते हैं, पहले की तरह, देखो ना इतने दिन बाद हमे इस तरह शायद कुदरत इसीलिए मिला रही है ताकि हम अपना अधूरा प्यार पूरा कर सकें।"राहुल खुद को सुरीली से अलग करते हुए"नहीं सुरीली मैं बस कुछ दिनों का मेहमान हूं मैं फिर से तुम्हें बीच रास्ते छोड़ जाने का पाप अपने सिर नहीं ले सकता।" पर सुरीली कहती है, "राहुल आज नहीं तो कल सबको जाना है पर जब तक हम हैं तब तक तो साथ खुश रह सकते हैं न, मरने से पहले हम जीना तो नहीं छोड़ देते और मैं तुम्हें अपने हाल में तो नहीं छोड़ सकती, अभी मिलकर जुदा नहीं होते हैं न, मान जाओ ना प्लीज, फिर से मुझे मत रुलाओ न, "ऐसा कहते हुए सुरीली फिर से राहुल से लिपट जाती है।बस उस शाम को दोनों ने एक दूसरे में बिता दिया और जल्द शादी करने का फैसला भी ले लिया।
दिल्ली से वापस आकर सुरीली ने ये सब कुछ सबसे पहले क्लिनिक जाकर डॉक्टर रेवा को बताया। रेवा सुरीली के इस फैसले से काफी खुश थी।वो सोच रही थी की जिस सुरीली को खुद सहारे की जरूरत थी, वह खुद ही आज किसी का सहारा बनने जा रही है।यही तो हर इंसान का सबसे पहला फर्ज होता है।सुरीली को सशक्त और मजबूत होता देख रेवा खुद पर गर्व कर रही थी।सुरीली ने सब कुछ शॉटआउट कर लिया था, दोनो के घर वाले भी इस शादी के लिए तैयार ही थे।सुरीली ने शादी का दिन, वेन्यू बताते हुए कहा, "दी आपको आना ही है।"हां ज़रूर, " रेवा ने कहा।सुरीली जाने को उठी, तो रेवा ने पूछा, "अरे!दोस्त का नाम तो बताओ।"सुरीली जाते हुए बोली, 'राहुल'।पर नाम सुनते ही रेवा कहीं खो सी गई, अपने बीते कॉलेज के दिनों में। राहुल नाम का कोई उसके लिए भी तो खास था, उसका अधूरा प्यार।
रेवा और राहुल अपने कॉलेज के लव बर्डस थे।रेवा पढ़ाई में बहुत तेज़ थी। वहीं राहुल ने तो अपने घर वालों की जिद में मेडिकल लिया था।राहुल था बहुल हैंडसम, कॉलेज के सभी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में आगे।किसी हीरो से कम नहीं लगता था, तभी तो सारी लड़कीयाँ उसपे जान छिड़कती थी पर राहुल सिर्फ रेवा के आगे पीछे रहता और उससे ही अपने मन की बात कहता।वो मेडिकल छोड़ना चाहता था पर रेवा उसे हर बार मना लेती की साल बर्बाद क्यों करना, वो है न वो उसकी पढ़ाई में पूरी मदद करेगी।पहले के साल तो राहुल ने किसी तरह रेवा के मदद से निकाल लिए पर फिर धीरे धीरे राहुल पढ़ाई में पिछड़ता गया और रेवा आगे निकल गई।राहुल कहीं न कहीं हीन भावना से ग्रस्त हो रहा था, उसके दोस्त भी मज़ाक उड़ाते की कुछ नही तो राहुल रेवा का एसिटेंट ही बन जायेगा। उसके मन में ये भी डर होता जा रहा था की रेवा उसे छोड़ देगी। वो रेवा से भी हमेशा पूछता की वो फेल हो गया तो क्या वो उसे छोड़ देगी, जिस पर रेवा उससे हमेसा रूठ जाती और कहती की वो उसका पीछा सात जन्म में भी नही छोड़ेगी। रेवा जब साथ होती थी तब तो वो राहुल को ऊर्जा से भर देती पर जब राहुल अकेला होता तो पता नही उसे क्या हो जाता।
कुछ दिन बीते जब एक सुबह रेवा के पास खबर आई की राहुल ने सुसाइड कर लिया।रेवा के पैरों तले ज़मीन ही खिसक गई।ये राहुल ने क्या कर दिया हमेशा उससे पूछता की वो उसे छोड़ तो नही देगी और उसने खुद ही उसका साथ छोड़ दिया।उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था की उसे राहुल को सपोर्ट करना चाहिए था, पर उल्टा वो भी उसे लाइन बदलने से रोकती रही।राहुल के लाइफ के इस प्रेशर को कहीं न कहीं वो भी बढ़ाती रही।लगातार फेलियर से वो इतना परेशान था पर वो कुछ देख न पाई।रेवा मन ही मन ख़ुद को कहीं न कहीं राहुल की दोषी मानती थीं।
फाइनल्स पूरे हो चुके थे, रेवा के नंबर्स भी काफी अच्छे थे, सबने उसे चाइल्ड स्पेशल या ऑर्थो चूज करने की सलाह दी पर उसने मनोचिकित्सक बनने का निर्णय लिया।अपने राहुल को तो उसने खो दिया, और न जाने कितने राहुल जैसे होंगे जो लाइफ के प्रेशर से अवसाद में चले जाते है।रेवा बस राहुल जैसे लोगों की मदद करना चाहती थी।अपने राहुल को तो न रोक सकी गलत कदम उठाने से पर बाकियों को रोक कर, सही राह दिखाकर वो पश्चाताप करना चाहती थी, अपने अंदर के गिल्ट को कम करना चाहती थी।राहुल उसका पहला और आखिरी प्यार था, उसे पता था की राहुल कहीं न कहीं उसके साथ उसके पास ही है।राहुल ने ही उसे जीवन का ये मकसद दिया है।
रेवा के आंख से आंसू की बूंद सुरीली के वेडिंग कार्ड पे लिखे राहुल के नाम पे जा गिरी।रेवा हाथों से अपनी उंगली फिराकर प्यार से राहुल के नाम से आंसू को पोंछ देती है।
तय दिन पर रेवा सुरीली की शादी अटेंड करने मंदिर पहुंचती है।दुल्हन के जोड़े में सुरीली काफी सुंदर लग रही थी।सुरीली ने राहुल और रेवा को एक दूसरे से मिलाया और दोनो ने डॉक्टर रेवा के पांव छू आशीर्वाद लिए।रेवा ने, " गॉड ब्लेस यू" कह अपना स्नेह और आशीर्वाद उन्हें दिया।जल्द ही मंत्र ध्वनि और अग्नि के सात फेरे लेकर सुरीली और राहुल हमेशा के लिए विवाह बंधन में बंध गए।सिंदूरी इस माहौल में, सुरीली और राहुल के जोड़े में, रेवा ने ख़ुद को और अपने राहुल के प्रेम को पूरा और जीवांत होते देखा, उनके खुश चेहरों में उसने अपने राहुल को मुस्कुराता देखा।यही तो डॉक्टर रेवा की जॉब की असली सेटिस्फेक्शन थी।
तभी रेवा की फोन की रिंग बजी, हेलो दिस इज डॉक्टर रेवा हेयर, या आई विल बी देयर, कहती हुई रेवा, सबको बाई का इशारा कर अपनी कार और अपनी मकसद की और आगे बढ़ जाती है।
( प्लॉट: तुझ में रब दिखता है
डॉक्टर रेवा: तुझमें रब दिखता है
सुरीली:सम्पूर्ण तो कोई भी नहीं
राहुल: सातों जन्म मैं तेरे साथ रहूंगा )
