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Meenakshi Anand

Abstract

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Meenakshi Anand

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दायित्व

दायित्व

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"विनीता जी कुछ ख़ास काम कर रहीं हैं, क्या ?" अपने नाती को गोद में लिए हुए पड़ोसन रोशनी ने विनीता के घर में प्रवेश करते हुए पूछा।

"कुछ खास नहीं, भाभी जी।" विनीता ने मुस्कराकर स्वागत करते हुए उत्तर दिया, "नन्हीं को नहलाया और तैयार किया है। अभी-अभी दूध पी कर सोई है; आइए, बैठिए ।"

"आपके बेटा-बहू तो ऑफिस चले गए होंगे, अब रात से पहले वो लोग क्या ही आएँगे" विनीता की बात को बीच में काटते हुए रोशनी ने कटाक्ष करते हुए कहा।

"नहीं भाभी जी, बेटा तो आज सुबह ही चंडीगढ़ गया है ऑफिस के काम से, कल शाम तक लौटेगा और बहू ऑफिस की ओर से , दो दिन पहले ही , एक हफ्ते के लिए मलेशिया गई है। वहाँ उसकी कंपनी की कोई मीटिंग है।"

"अच्छा! वही तो... दिखी नहीं इसीलिये दो दिन से...! दरअसल, आज मेरी बेटी को एक किट्टी पार्टी में जाना है। इसी कारण उसे ब्यूटी पार्लर जाना था। तो मैंने उससे कहा, "अरे एक ही दिन की तो बात है मैं आयुष बेटे को संभाल लूंँगी। विनीता जी भी तो नन्हीं को रोज ही संभालती हैं। और उनकी बहू मस्त और निश्चिंत होकर बाहर जाती है।"

विनीता ने धीरे से मुस्करा, पास में गहरी नींद में सोई हुई प्यारी सी नन्हीं को देखा तो उनकी आंँखें ममता से भर आईं।

"नन्हीं मेरी पोती है रोशनी जी... मेरा सूद है। कहते हैं ; ब्याज से अधिक सूद प्यारा होता है। और फिर , मैं तो इसकी दादी होने का सुख उठा रही हूंँ।" थोड़ा गंभीर होते हुए विनीता ने आगे कहा, 

"मेरी बहू एक एम.एन.सी. में उच्च पदाधिकारी है। इस तरह की मीटिंग्स में उसे जाना पड़ता है जो कि उसके जॉब के लिए आवश्यक है" चेहरे पर गंभीरता के साथ हल्की मुस्कराहट लाकर विनीता ने अपनी बात को पूरा करते हुए कहा, "वह मेरे बेटे के साथ मिलकर सुचारू रूप से घर चलाने और हम लोगों की उचित देखभाल करने का दायित्व निभा रही है, आए दिन की किट्टी पार्टी में जाने का नहीं।"


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