छोटा बच्चा
छोटा बच्चा
आज उस बच्चे पर जाकर मेरी आंखें ठहर गई बो मासूम बच्चा जो भीख मांग रहा था उसे शायद हम लोगों से ज्यादा पता था कि इंसानियत क्या होती हैं।
आज में अपनी छोटी बहन के साथ बहुत दिनो के बाद अपने गांव जा रही थी हम तैयार होकर घर से निकल कर रिक्शा किया और बस स्टैंड पर खड़े हुए ही थे तभी वहां एक छोटा बच्चा रूपए मांग रहा था।हमारी भाषा में शायद उसे भीख कहते हैं।
तभी वह मेरे पास आया और रूपए मांगने लगा मेरे पास खुले रूपए ना होने के कारण उसे माना कर दिया लेकिन उसका मासूम चेहरे पर नजर रुक शी गई और उनकी वो पांच साल की उम्र।
जब मेरी बहन बोली कि दीदी रूपए मेरे पास है में दे देती हूँ आप चलो तब मेरी बहन ने उसी रूपए दे दिए लेकिन मेरी नजर नहीं हट रही थी में आगे चली तभी पीछे मुड़कर देखा बहा बच्चा किस ओर भिखारी को रूपए दे रहा था।
वो विकलांग था और उस बच्चे से शायद उसका कोई रिश्ता नहीं था फिर भी वो पेशे उसने उसे दे दिए शायद वो जनता था कि इंसानियत किया होती हैं और किस के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।
कभी कभी हम नजर अंदाज कर देते हैं उन रास्तों पर चलते बच्चों पर जो भीख मांगते हैं लेकिन शायद वो अपना बचपन खो चुके होते है। परवरिश के बारे में मन में ख्याल आता हैं कि मां या पिता बच्चों के होते भी है या नहीं।
होते भी है तो कैसे ये बच्चे उम्र से पहले ही बड़े हो जाते है या शायद आगे जाकर किस उम्र में ये क्या कर रहे होगे किसी को भी नहीं पता।
और शायद ऐसे बच्चे हर जगह मिल जाते है जब सफर
करते हैं। कोई कीचड़ में भी कमल खिलकर निकलता है
कोई मुरझा कर मर जाता हैं कोई भी जनता इन बच्चों का भविष्य किया हैं।
