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Rekha Manvar

Romance

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Rekha Manvar

Romance

बीते लम्हें

बीते लम्हें

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सबसे नज़रे चुराकर, वो तेरा मुझे ही निहारते रहेना,

आज भी याद आता है

पर अब वो लम्हा, 

मेरी नजरों को मायूसी दे जाता है,


मुझे हँसाने के लिए वो तेरा जुठमुठ का रोना,

आज भी याद आता है

पर अब वो लम्हा, 

मेरी ऑंखों मे नमी भर जाता है,


किताबों के बहाने वो तेरा बेवजह बातें करना,

आज भी याद आता है,

पर अब वो लम्हा,

मेरे होठोको बेवक़्त खामोश कर जाता है,


पहेली दफा वो तेरा प्यारसे हाथको थामना,

आज भी याद आता है,

पर अब बो लम्हा,

मेरे हाथों को छुअन की तड़प दे जाता है,


छोटी सी बात पर रूठकर वो तेरा चुपके से चले जाना,

आज भी याद है मुझे,

पर अब वो लम्हा,

तेरे आने का इंतज़ार करवाता है,


कुछ ना कहेकर भी,बो तेरा सब कुछ बयाँ कर जाना, 

हमारी आखरी मुलाकात का वो लम्हा,

आज भी याद है मुझे,

पर अब बो लम्हा, 

तेरी आवाज़ के लिए तरसाता है,


माना कि अब हर लम्हा,

बस दूरियां ही है हमारे दरमियान,

फिर भी एक लम्हा तेरे साथ जि लेने का ख्वाब दिखा जाता है,


यूँ तो हर लम्हा खुदको समेटते रहेते हैं,

फिर भी ख्वाहिश है "एक लम्हा",

बस,तुझमें बिखर जाना है।


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