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Ekta Rishabh

Inspirational


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Ekta Rishabh

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बेटियों के कर्तव्य भी होते हैं

बेटियों के कर्तव्य भी होते हैं

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माँ, कुछ ज्यादा ही सिर चढ़ा रखा है आपने भाभी को अभी तो घूमने गई थी हनीमून पे फिर से जाने की क्या जरुरत थी " ?

"क्या बात कर रही है प्रिया, नई नई शादी है दोनों की थोड़ा समय साथ बतायेंगे तभी तो एक दूसरे को जान पहचान पायेंगे "।

"माँ आप कुछ समझती नहीं.. इतना सिर मत चढ़ाओ बहु को पछताओगी.. "।

"चल छोड़ इन बातों को मुझे कुछ काम है मैं बाद में बात करती हूँ बेटा" इतना कह उषा जी ने फ़ोन रख दिया

उषा जी का छोटा सा परिवार था पति रमेश जी और दो बच्चे बड़ी बेटी प्रिया और छोटा बेटा अतुल प्रिया अतुल से बड़ी थी और उसकी शादी भी पहले हो गई थी अतुल की शादी कुछ महीनों पहले रिद्धि से हुई थी रिद्धि एक बहुत ही प्यारी लड़की थी उषा जी भी रिद्धि को बहुत प्रेम से रखती प्रिया को भी रिद्धि बड़ी ननद का मान सम्मान देती लेकिन प्रिया खुद को बड़ी ननद होने का दम्भ रखती प्रिया घर की अकेली बेटी और पहली संतान थी सो अपने पिता का खुब दुलार पाया जिसके कारण तेज़ स्वाभाव और मुंहफट हो गई थी प्रिया के स्वाभाव से उषा जी बहुत चिंतित रहती

प्रिया का ससुराल भी उसी शहर में था तो अकसर मायके आती जाती रहती जब भी प्रिया घर आती या तो अपनी माँ को सास होने अहसास करवाती कहती सास हो सास की तरह रहो उधर रिद्धि से पूछताछ शुरु कर देती जैसे रिद्धि दिन भर क्या करती रहती हो अगर रिद्धि कुछ बनाती तो उसमें नुस्ख निकालने लगती एक बार रिद्धि ने घर के डेकोरेशन में कुछ चेंज किये जिसकी सब ने तारीफ की लेकिन प्रिया जब घर आयी तो आते ही शुरू हो गई

" ये कैसे कलर के पर्दे ले आयी रिद्धि बिलकुल मैचिंग नहीं है दीवारों से मुझे तो बिलकुल पसंद नहीं है ऐसे कलर रिद्धि तुम्हारी चॉइस तो मुझे बिलकुल पसंद नहीं आती " प्रिया के ऐसे व्यवहार से रिद्धि भी चिढ़ सी जाती लेकिन बड़ी नन्द का मान मायके में कम ना हो ये सोच चुप रह जाती

उषा जी सब देख सुन बेहद परेशान होती रहती इतनी प्यारी बहु को अपनी बेटी के उदंड व्यवहार से वो खोना नहीं चाहती थी उषा जी जानती थी रिद्धि संस्कारी लड़की है इसलिए अपनी नन्द की सारी नाजायज बातें बर्दाश्त कर रही है लेकिन जिस दिन ये सब्र टुटा उस दिन ये घर टूटना भी तय थाउषा जी समझ गई थी की अब प्रिया को रोकना ही होगा वर्ना देर हो जायेगी

कुछ दिनों बाद अतुल के जन्मदिन का अवसर आया । रिद्धि बहुत ख़ुश थी शादी के बाद पति का पहला जन्मदिन था सासूमाँ से पूछा तो उन्होंने भी कह दिया जैसे दिल करें वैसे जन्मदिन मनाये ख़ुश हो रिद्धि बहुत मन से तैयारियों में जुट गई थी उषा जी से सलाह कर सुबह सत्यनारायण की पूजा और शाम को कुछ क़रीबी रिश्तेदारों के साथ साथ अपने नन्द को भी सपरिवार आने का निमंत्रण भेज दिया रिद्धि ने ।

जन्मदिन के लिये तैयारियों में लगी अपनी बहु को अकेली परेशान होता देख उषा जी ने सोचा अगर प्रिया को बुला लेती तो रिद्धि की थोड़ी मदद हो जाती ये सोच उषा जी ने प्रिया को फ़ोन लगाया।

"कैसी हो प्रिया? मैं सोच रही थी कल अतुल के जन्मदिन पे तो तुम आ ही रही हो लेकिन अगर सुबह थोड़ा जल्दी आ जाती तो थोड़ी मदद हो जाती रिद्धि की वैसे तो काफ़ी कुछ तैयारी हो चुकी है साथ में कामवाली भी लगी है लेकिन सुबह पूजा का प्रसाद और पंडित जी के भोजन में रिद्धि को मदद की जरुरत पड़ेगी मेरी भी तबीयत ठीक नहीं इसलिए तुम जल्दी आ जाती तो मदद मिल जाती तुम्हारी भाभी को "

"अब इतना कुछ करने को किसने कहा था रिद्धि को और जब सोच ही लिया है तो करें फिर इतनी गर्मी में मुझसे नहीं होगा कोई काम वाम " और माँ आप भी ना आपकी बहु क्या दस लोगो का खाना भी नहीं बना सकती जो आपने मुझे फ़ोन कर दिया वाह माँ, बहु से इतना मोह और खुद की बेटी से ज़रा भी मोह नहीं आपको माँ "।

प्रिया की बातें सुन उषा जी दंग रह गई, " कैसी बातें कर रही हो प्रिया तुम्हारे भाई का जन्मदिन है और रिद्धि ने नहीं कहा तुम्हें बुलाने को ये मैंने खुद अपनी मर्जी से तुझे फ़ोन किया है और रही बात इतना कुछ करने की तो अगर रिद्धि अपने पति का जन्मदिन बढ़िया से मनाना चाहती है तो इसमें बुराई क्या है?और प्रिया अगर भूल गई हो तो याद दिला दू पिछले महीने जब तेरी सासूमाँ हॉस्पिटल में थी तब रिद्धि ही थी जो सुबह शाम टिफिन भर भर के खाना हॉस्पिटल भिजवाती थी वो भी बिना चेहरे पे शिकन लाये "

"वाह माँ, आप तो बहु के गुणगान में लग गई माना रिद्धि ने खाना भेजा था तो ये तो फ़र्ज है उसका आखिर बड़ी नन्द हूँ उसकी " प्रिया तैश में आ अपनी माँ से बहस करने लगी

" भाभी के फ़र्ज तो तुझे खुब मालूम है प्रिया लेकिन कभी नन्द के क्या फ़र्ज होते है ये भी याद कर लिया कर ।देख प्रिया माँ हूँ तेरी इसलिए तेर हर बत्तमीजी को बर्दाश्त भी कर लूंगी और गलती को माफ़ भी लेकिन ये हमेशा याद रखना रिद्धि भाभी है तेरी और वो सिर्फ एक सीमा तक ही तेरी बत्तमीजी को बर्दाश करेंगी "

" मेरी बहु बहुत संस्कारी लड़की है परिवार जोड़ना उसे आता है और मैं नहीं चाहती की तेरी नादानियों के कारण तेरा मायका छूट जाये मेरी बात हमेशा याद रखना प्रिया मायका सिर्फ माँ से नहीं होता भाभी से भी होता है। इसलिए मेरी बात गांठ बांध लो अपने रिश्ते कभी भी अपनी भाभी से मत बिगाड़ना वर्ना मेरे बाद मायके को तरस जाओगी रिद्धि जैसी भाभी लाखों में एक होती है जब अपनी भाभी की इज़्ज़त करोगी तो भाई भाभी दोनों का स्नेह पाओगी "

"अगर भाभी के कुछ कर्तव्य होते है अपनी नन्द के तरफ तो क्या नन्दो के कोई फ़र्ज नहीं होते मायके की तरफ अगर अधिकार जाताना जानती हो तो फ़र्ज निभाना भी सीख लो प्रिया तभी मायके का सुख मिलेगा "।

प्रिया को डांट दुखी मन से उषा जी ने फ़ोन रख दिया

अगले दिन रिद्धि सुबह उठ पूजा की तैयारियों में लग गई उषा जी भी अपनी बहु की मदद करने लगी रिद्धि के बार बार मना करने पे भी उषा जी अपनी बहु की सहायता कर रही थी तभी दरवाजे की घंटी की आवाज़ आयी देखा तो प्रिया खड़ी मुस्कुरा रही थी

"अरे दीदी आप इतनी सुबह " ?

" क्यों रिद्धि क्या मैं सुबह नहीं आ सकती मैंने सोचा कुछ मदद कर दूं अपनी भाभी की सो चली आई सुबह ही "

" आप क्यों परेशान हुई दीदी लेकिन अच्छा ही हुआ आप आ गई आपके हाथों का पुलाव बहुत अच्छा बनता है आप ही बनाना दीदी " अपनी नन्द को यूं अचानक आया देख रिद्धि बेहद ख़ुश और उत्साहित हो उठी।

उषा जी भी अपनी बेटी में आये इस बदलाव को देख ख़ुश हो गई अपनी माँ से नज़रे मिलते ही आँखों ही आँखों में प्रिया ने माफ़ी मांग ली और मुस्कुरा कर उषा जी ने प्रिया से कहा देर आये दुरुस्त आये और दोनों माँ बेटी खिलखिला पड़ी।


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