STORYMIRROR

Priyanka Gupta

Abstract

2  

Priyanka Gupta

Abstract

बे मौसम बरसात

बे मौसम बरसात

1 min
203

‌बारिश के मौसम में मन कैसे बावला हो जाता है ना? और मन में अनेक भाव उत्पन्न होने लगते हैं।...वो ठंडी बौछारें भरी हवाएं और फूलों के सुगंध, बस फिर क्या कहना। ..चारों तरफ फैली हरियाली और पास पीपल के पत्तों की सरसराहट भारी आवाज़ .....बे मौसम बरसात की बात ही निराली है, कहीं मार तो कहीं छाई हरियाली है। बारिश के एहसास को केवल वही बयां कर सकता है, जिसने उसकी हर एक बूंद को महसूस किया हो...पानी की बूंदें चेहरे से फिसल रही हो, हलकी हवाएं उन बूंदों के स्पर्श को बढ़ा रही हो.. उसपे से मिट्ठी कि सौंधी सौंधी महक... बस!  क्या कहना। ..ना जाने कितनों के हृदय प्रसन्न भाव से भर जाते होंगे! .. मानो पूरी प्रकृति अपना प्रेम भाव निश्छलता से दिखा रही हो। इन बातों को केवल सामने से देखकर ही उनकी दिव्यता को जाना जा सकता है।..


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Abstract