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Preeti Kukreti

Romance

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Preeti Kukreti

Romance

अनुराग

अनुराग

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कभी नज्म सा, कभी ग़ज़ल सा

मेरे सुरों को पिरोता तू - एक जज्बात सा है,

कभी भैरवी सा, कभी मल्हार सा,

मेरे मौसम को बदलता तू- एक राग सा है।।


कभी आईने में बनी, ओस की बूंदों से ढकी

धुंधली तस्वीर सा,

कभी धूप की मखमली चादर लपेटे

साफ होती तस्वीर सा।।



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