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RIRI 13

Horror Fantasy

4  

RIRI 13

Horror Fantasy

अंतिम संस्कार (Last Rites)

अंतिम संस्कार (Last Rites)

3 mins
8


अध्याय 1: धुंधली रात और खाली जेब

दृश्य 1: पीजी (PG) का कमरा - रात के 2:30 बजे
मुंबई की एक उमस भरी रात। पंखा अपनी पूरी रफ्तार से 'कचर-कचर' की आवाज़ कर रहा था, लेकिन अचानक वह रुक गया। पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया और जून की गर्मी में अचानक बर्फीली ठंडक फैल गई।

आनन् गहरी नींद में था, लेकिन वह पसीने से तरबतर होकर बुदबुदा रहा था, "विधि... अभी बाकी है... सब धुंधला है..."

तभी देव की नींद खुली। ठंड के मारे उसके दाँत किटकिटा रहे थे। उसने देखा कि उसके मुंह से सफेद भाप निकल रही थी।

देव: (आर्यन को हिलाते हुए) "ओए... आ... आर्यन! जाग ना भाई! देख तो सही, क्या हम गलती से किसी फ्रीजर के अंदर सो गए हैं? मेरे तो पैर की उंगलियां बर्फ बन गई हैं!"

आर्यन भी जाग गया। उसने देखा कि कमरे की खिड़की के कांच पर नमी जम गई थी और उस पर कोई अदृश्य उंगली कुछ लिख रही थी। कांच पर लिखा था— "दक्षिणा..."

तभी, कमरे का भारी दरवाजा अपने आप "चररर..." की आवाज के साथ खुल गया। बाहर गलियारे में एकदम अंधेरा था। दोनों दोस्त इतने डर गए कि वे आनन् को बीच में लेकर कमरे के बाहर लाइट के नीचे बैठ गए। देव पूरी रात कभी हनुमान चालीसा गाता तो कभी 'बजरंगी भाईजान' के गाने गुनगुनाता रहा।

दृश्य 2: अगली सुबह - हॉस्टल के बाहर
सुबह के 7 बज रहे थे। आनन् नहा-धोकर कमरे से बाहर आया। उसने देखा कि देव और आर्यन लाल आँखों के साथ बाहर बैठे थे। देव के बाल बिखरे हुए थे और वह बहुत थका हुआ लग रहा था।

आनन्: "गुड मॉर्निंग! तुम दोनों बाहर क्या कर रहे हो? और देव, तेरी ये हालत क्या है?"

देव: "भाई, तू तो मजे से सो रहा था, लेकिन रात भर तेरे कमरे में जो फ्रीज वाली ठंड थी ना, उसने हमें सोने नहीं दिया। और तेरा वो दरवाजा... भाई, उसे तेल पिला दे! वो तो ऐसे खुल रहा था जैसे हमें नरक का रास्ता दिखा रहा हो।"

आनन्: (गंभीर होकर) "यार, मजाक मत कर। मुझे फिर वही धुंधला सपना आया। दादाजी मुझे बुला रहे हैं। मुझे गाँव जाना ही होगा, पर यार... टिकट के पैसे कहाँ से आएंगे? जेब में सिर्फ दस का सिक्का बचा है।"

देव: "पैसे? भाई, मेरे अकाउंट में सिर्फ 17 रुपये बचे हैं। अगर मैं एटीएम में कार्ड डालूँ ना, तो स्क्रीन पर लिखा आता है— 'शर्म कर भाई, कुछ तो रहने दे!' दादाजी को बोल, सपने में आने के बजाय थोड़ा गूगल-पे (Google Pay) कर दें!"

दृश्य 3: काव्या का आगमन

तभी वहां काव्या आई। वह उसी कॉलेज में पुरानी किताबों और इतिहास पर रिसर्च कर रही थी। आर्यन ने उसे रात की उस लिखावट का फोटो भेजा था।

काव्या: "आर्यन! वो फोटो जो तूने भेजा था, वो सच है? आनन्, ये साधारण बात नहीं है। यह 'यदु-अक्षर' हैं। इसका मतलब है कि तुम्हारे पूर्वजों की कोई पुरानी शक्ति जाग गई है। तुम्हें अभी गाँव जाना होगा।"

आनन्: "पर काव्या, मेरे पास पैसे नहीं हैं।"
देव: (बीच में कूदते हुए और काव्या के सामने हाथ फैलाते हुए) "मैडम! देखिए, हम सब तैयार हैं। अगर आप हमारी टिकट और रास्ते में चाय-नाश्ते का खर्चा उठा लें, तो हम आपको उस रहस्यमयी गाँव तक ले जा सकते हैं। आखिर रिसर्च के लिए इतना तो आप खर्च कर ही सकती हैं ना?"

काव्या मुस्कुराई और अपनी गाड़ी की चाबी दिखाई।

काव्या: "ठीक है। मेरी गाड़ी तैयार है। सामान पैक करो और अभी निकलो। अगर देर हुई, तो जो रात को हुआ वो तो बस एक शुरुआत थी!"

देव: "गाड़ी? एसी वाली? भाई आनन्, चल जल्दी! अब जो होगा देखा जाएगा, कम से कम एसी गाड़ी में तो जाएंगे!"

"क्या आनन का गाँव जाना उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती साबित होगा? जानने के लिए पढ़ते रहिये— 'Last Rites'..."


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