Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

प्रीति शर्मा

Drama Inspirational


4.3  

प्रीति शर्मा

Drama Inspirational


"अमल"

"अमल"

2 mins 276 2 mins 276

  

   

सात दिनों से शहर के विष्णु मंदिर में श्री विपिन बिहारी शास्त्री जी की राम कथा चल रही थी और सारी कॉलोनी की औरतों ने शाम का 4:00 से 7:00 का समय वहां के लिए समर्पित कर दिया था।

  आज रमा की पड़ोसन ने उससे भी चलने को बोला तो यह सोचकर कि अन्तिम दिन है। वह भी कुछ अच्छा ग्रहण कर आये, वह भी चल पड़ी।

 समां बंधा हुआ था। भजन चल रहा था सभी महिलाएं भक्ति रंग में रंगी संगीत की धुन पर नृत्य कर रही थी, झूम रही थी। बहुत ही धार्मिक वातावरण था।कुछ देर बाद विपिन बिहारी जी के श्री मुख से नीति- ज्ञान की बातें मुक्त होकर वातावरण में फैलने लगीं। स्त्रियों को अपने पति को परमेश्वर मानना चाहिए।जिस प्रकार ऊपर बैठे प्रभु इस संसार के समस्त प्राणियों के परमेश्वर हैं और सभी का ध्यान रखते हैं, उसी प्रकार घर परिवार में घर का मुखिया होता है जो परिवार के समस्त सदस्यों की जरूरत का ध्यान रखता है। संसार के समस्त प्राणी उस ईश्वर की संतान हैं। आपस में प्रेम- भाव से रहना चाहिए।

   विपिन बिहारी जी कि यह वाणी प्रवाहित हो रही थी। अपनी गृहस्थी को त्याग और संयम से सजाना चाहिए। स्त्रियों का पहला धर्म है अपने पति और बच्चों की देखभाल करें, बाकी के सांसारिक कार्य बाद में....

   और इधर रमा सोच रही थी कि यह सभी महिलाएं इन्हीं बातों को सुनने आती हैं। घर के सभी कामकाज छोड़ देती हैं तो ग्रहण क्या कर रही हैं???

  रमा बीच में ही उठ गई और शास्त्रीजी की बातों पर अमल करने घर की ओर चल पड़ी।



Rate this content
Log in

More hindi story from प्रीति शर्मा

Similar hindi story from Drama