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Ankit Kumar

Abstract Tragedy Inspirational

4.5  

Ankit Kumar

Abstract Tragedy Inspirational

अल्पायु के गहन अनुभव

अल्पायु के गहन अनुभव

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मैंने वक्त से पहले खामियाँ देखी हैं,

जीने से पहले कमियाँ देखी हैं।

बहुतों की नाकामियाँ देखी हैं,

अपने से ज्यादा नादानियाँ देखी हैं।

सपने से ज्यादा दूसरों की मेहरबानीयाँ देखी हैं,

कुछ करने की निशानियाँ देखी हैं।

मैंने अच्छाई से ज्यादा बुराइयाँ देखी हैं,

हाँ, मैंने वक्त से पहले खामियाँ देखी हैं।

जीने के लिए मरते देखा है,

अशान के लिए तड़पते देखा है।

उष्णता से जलते देखा है,

मौत से लड़ते देखा है।

क्यों, मैंने अल्पायु में ही खुद को दहकते देखा है,

दूसरों से ज्यादा अपने जन को कुढ़ते देखा है।

संभलने से ज्यादा गिरते देखा है,

हाँ, मैंने जीने के लिए मरते देखा है।



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