Janki Punjabi

Abstract


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ऐसे हें मेरे मांपा

ऐसे हें मेरे मांपा

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प्रिय डायरी,

बचपन में जमीन पे न रखा, रखा अपने हाथों में, ऐसे हैं मेरे पापा।

थोड़ी बड़ी जो हुईं, जिद्दी बनी, हर ज़िद को पूरा किया, ऐसे हैं मेरे पापा।

काहा करते हैं, तू तो हे मेरी नानी का स्वरूप, आंखें हैं भुरी दिखता हे तुझमें उनका रूप, नानी केहके कभी न डांटा, न लगाई कभी फटकार, ऐसे हैं मेरे पापा।

स्कूल भेज के पढ़ा लिखा के, दुनिया से बराबरी करना तो सिखाता है हर कोई, इंसानियत सिखा कर इंसान बनाया, ऐसे हैं मेरे पापा।

मां जो घर न थी, एक महीना में स्कूल नहीं गई थी, कहती थी हर सुबह कल से पक्का जाऊंगी, सुनकर यह सुला देते रिक्शा वाले को लौटा देते, ऐसे हैं मेरे पापा।

आज भी याद है वह दिन, बनाई थी चोटी एक दिन, थी वह बिल्कुल भी न मां जैसी, फिर भी कहा मेरी बेटी दिखती है परी जैसी, चोटी बनाकर यूनिफॉर्म पहना कर ले गए थे मुझे स्कूल, ऐसे हैं मेरे पापा।

1,2,3 हो या A,B,C, या हो जीवन की कोई पहेली, कदम कदम पर न छोड़ा हाथ, न अपनाने दिया किसी अनजाने का साथ, ऐसे हैं मेरे पापा।

बेटी हूं, बेटियों वाली हरकत कभी न सिखाई, न कहा करछी पकड़ो ना सिखाई सिलाई और बुनाई, मां को यह कह कर टाल देते, "होशियार है बेटी सीख जाएगी सब एक दिन करेगी नाम रोशन अपना करेगी शोहरत की बुनाई", ऐसे हैं मेरे पापा।

स्कूल में जब थी, आया था एक वक्त ऐसा, न मन करता पढ़ने का, न चल रहा था जिंदगी में कुछ ऐसा वैसा, दिल में आया कह दूं पापा से नहीं होती लिखाई और पढ़ाई, कहती भी कैसे पढ़ा लिखाकर कराना चाहते थे कामयाबी की चढ़ाई, ऐसे हैं मेरे पापा।

बोर्ड एग्जाम्स हो या एडमिशन, मुझसे ना हुई मेहनत, पर पापा की थी हसरत, टेंशन ऐसे लेते थे जिसे उनकी हो परीक्षा, ऐसे हैं मेरे पापा।

कॉलेज हुआ खत्म आया परिणाम, गोल्ड मेडल से किया सम्मान, पूरा हुआ पापा का अभिमान जैसे मिला हो उन्हें इनाम, ऐसे हैं मेरे पापा।

उंगली पकड़ के चलना सिखाया, हाथ थाम कर गिरने से उठाया, फिर कह दिया छोड़ दो मेरा हाथ बेटी तू धन है पराया, ऐसे हैं मेरे पापा।

नमक बिना फीका है व्यंजन मां बिना अधूरा है जीवन, मेरे पापा को लिया जान, अब कैसी है मेरी मां बताएगी आगे की दास्तान।

9 महीने न जाने कितने दिनों तक मैं थी तुझ में, हुआ होगा दर्द और आंसू भी होंगे आंखों में, दर्द सहकर दुनिया मैं लाई, दिया दान जीवन का उठाकर जाने कितनी कठिनाई, ऐसी है मेरी मां।

पापा जितना नहीं पर किसी से कम भी नहीं तूने दिया इतना प्यार, हाथ हो या झाड़ू तूने दी सबसे फटकार, पापा के प्यार को बैलेंस करती है तेरी फटकार, ऐसी है मेरी मां।

तोड़ी थी मेरी बांसुरी मेरे हाथों में, डाली थी मिर्च मेरी आंखों में, आज भी होती हूं उदास मिलता है तेरा ही साथ बाहों में, ऐसी है मेरी मां।

कहां कइ बार हूं में लेक्टोज इनटोलरेंट न छूआ दहीं ना खाया माखन, कहती तू यह सब है तेरे नाटक आज नहीं तो कल खाएगी जब जाएगी किसी के आंगन, ऐसी है मेरी मां।

मिला हो भले तुझ से कई ज्यादा प्यार पापा से, माना न कभी डांटा न मिली मार उनसे, फिर भी होते थे कोई राज़ या बतानी हो कोई बात मेरे नैना तेरे पल को ही तरसे, ऐसी है मेरी मां।

घर की दहलीज को नहीं लांगती बेटी कहती थी तू, घर में नहीं बैठे रहना निकलो और देखो दुनिया यह भी कहती है तू, काम और घर के बीच का संतुलन बनाना सिखाया, ऐसी है मेरी मां।

न जाने क्यों तुझे मेरे कपड़ों की शॉपिंग से है नफरत, लाती जूते, कुर्ती, टॉप या जीन आ जाती है घर में आफत, जब जाती तू नानी के वहां बोलती हूं एक चीज ले आती तू कई, ऐसी है मेरी मां।

कामयाबी मिली किया सबने अभिनंदन कहा किया हे तूने अच्छा काम, न जाने क्यों तुझे न लगता था यह कोई बड़ा पराक्रम, तारीफ न कि कभी सामने, पर मेरे पीछे किया गर्व सबके सामने, ऐसी है मेरी मां।

कभी कहती तू हो गई है बड़ी कभी कहती तू है नादान, कर लेती है तू दोस्ती चाहे वह हो अपना या कोई अनजान, जब करती किसी से बात, निगाहें होती तेरी मुझ पर सुनती तू हर बात, ऐसी है मेरी मां।

सोने न दिया कभी तूने मुझे भूखी, न खाती थी खाना तो हो जाती थी तू दुखी, खिलाया तूने मुझे खाना जबरन, चाहे हो या ना हो मेरा मन, ऐसी है मेरी मां।

डांटती थी जब तुम मुझे, सरहाते थे तब पापा मुझे, स्वाद चखाया दोनों का ऐसे हैं मेरे मांपा।

चाहिए हो मुझे कुछ या करनी हो कोई बात, कहती मैं मां से पहुंचाती पापा तक वह बात, पूरी करते मेरी आरजू मिलकर दोनों, ऐसे हैं मेरे माँ पा।


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