अदृश्यम
अदृश्यम
एक दृश्य जो उसके लिए अदृश्य था...और जो कुछ, जो भी रहस्य था उसी अदृश्य वाले दृश्य मे था.. लेकिन एक समय ऐसा आया कि वो अदृश्य को भी देखने लगा.. उसे एक शक्ति मिली और वो बन गया अदृश्यम..
उस रात अजय सडक पर चला जा रहा था.. चारो तरफ लॉक डाउन था.. पुरे देश मे कोरोना का कहर था इसलिए ये हालात थे.. घर से निकलना गैर कानूनी था.. लेकिन उसकी मज़बूरी थी.. क्योंकि उसका अपना कोई घर ही नहीं था..
धरती उसका बिचौना, आकाश उसकी चादर.. वो सोने के लिए एक नयी जगह ढूंढ़ने निकला था.. उसे डर था कि दिल्ली की किसी सडक पर कोई पुलिस ना मिल जाए वरना उसे डंडो के साथ गाली भी खाने को मिलेगी... ये और बात है कि उसे भूख तो लगी थी.
रात के सन्नाटे मे वो चला जा रहा था कि अचानक उसकी नज़र एक दृश्य पर पड़ी.. बड़ा अजीब सा दृश्य था... इसी की तरह एक जवान लड़का सडक की फर्श पर गिड़गिड़ा रहा था.. वो लड़का किसी के सामने हाथ जोड़के अपनी ज़िन्दगी की भीख मांग रहा था.. लेकिन अजीब बात थी कि उस लड़के के सामने कोई था ही नहीं..
फिर हवा मे वो किस के हागे हाथ जोड़ रहा था.. अभी अजय कुछ समझ ही नहीं पाया कि उस अजनबी लड़के की गर्दन कोई अदृश्य शक्ति दबाने लगी थी.. वो लड़का घुट ने लगा.. और अगले कुछ सेकंड बाद ही वो मर गया.. उसकी हत्या हो गयी.. अजय हैरान था...

