Nisha Gupta

Abstract


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Nisha Gupta

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अचानक

अचानक

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"फ़िर यहां ! आस-पास भी मत आना, जानते नहीं वायरस कितने तेज़ी से फैल रहा हैै।", बंटी का कान ममोड़तेे सुुमन डांट रही थी। "मम्मा ! तो क्या दादी के पास न जाए?" बिंटी चिल्ला उठा।

"उनकी तबियत ख़राब रहती है न और उम्र भी हो गई।

ऐसे में संक्रमण बढ़ने का आशंका है न। इसलिए तो कहती हूं उनसे दूर रहो।" सुमन समझाना चाही।

"और आप ! आप तो बच्ची नहीं। मना कर सकती है न उसे अपनेपास आने से, हमें भी मारने का विचार है?", सारा गुस्सा सुमन सास पर दे मारी।

सुनते ही सास की आंखें डबडबा गई पर चुप रही।

"क्या भई ! सुबह-सुबह हल्ला-गुल्ला", पति साहिल सामने खड़ा था।  

"और मां तुम पड़ी हो ! उठो छुट्टी का समय है। एक साथ रहने का अच्छा मौका क्यों गवाना ? साथ रहेंगे एक दूसरे का ख्याल रखेंगे। और वैसे भी बचाव करने के लिए कहां गया है अपनों से दूर रहने के लिए थोड़ी न।

चलों उठो-उठो।", साहिल ने सारी बातें सुन ली थी। "पर साहिल... !", सुमन टोकी।

"क्या पर-वर ! छोड़ो ये सब। आज का शेड्यूल बना लो, दिन भर क्या-क्या करना है। साहिल का बदला रंग सुमन के चेहरे का रंग ही उड़ा दिया। चाह कर भी सुमन कुछ न बोल पाई।


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