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Dashrathdan Gadhavi

Classics

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Dashrathdan Gadhavi

Classics

आतुर हूँ

आतुर हूँ

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  1. आतुर हूँ, किसि संत मीलन को।

राहत दे आत्म को, दूर करे पीडन को। 


एसे ही कल्पवृक्ष चाहिए मुझे, जो वर दे सब। 

कर दे नीहाल ओर शांता दे संसार पीडन को। 


हां मुझे वो कविता चाहिए, बाग बाग करे मुझे, 

मिटा दे बरसो की प्यास, रस दे मुझ नीरस को।


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