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डा आशीष त्रिपाठी अश्क

Romance Classics

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डा आशीष त्रिपाठी अश्क

Romance Classics

आखिर क्यों

आखिर क्यों

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बना गुलाब तो कांटा चुभा गया कोई

हुआ चराग तो घर ही जला गया कोई


तमाम रंग मेरे और सारे ख्वाब मेरे

फ़साना थे कि फ़साना बना गया कोई


मैं जिसपे चल सकूं और न ही बढ सकूं

ये कौन से रास्ते लगा गया कोई।


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