Shobhit शोभित

Drama Inspirational


4.9  

Shobhit शोभित

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2024 में चुनाव

2024 में चुनाव

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चुनावों का मौसम है और पूरे शहर में उम्मीदवारों के वादों के पोस्टर पूरे शहर में लगे पड़े हैं। हर को मुफ़्त में चाँद-तारे तक मुफ़्त में देने की बात कर रहा है, बस एक वोट मिल जाये पर सबको पता है की वोट पड़ने के बाद सब हर बार की तरह शांत हो ही जाना है।

 हम लोगों ने एक बहुत लम्बी लड़ाई लड़ी है सिस्टम से ताकि हम लोग अपने घर से, अपने मोबाइल या लैपटॉप से वोट डाल सके और पोलिंग बूथ पर लम्बी लम्बी लाइन में खड़ा न होना पड़ो। यह प्रस्ताव आखिरकार निर्वाचन कार्यालय और राष्ट्रपति महोदय द्वारा मान लिया गया है। हालाँकि कुछ लोगों ने न्यायलय में जनहित याचिका डाली थी इसके खिलाफ पर वो जज ने ख़ारिज कर दी थी।

 कल का वो मुबारक दिन होगा जब पहली बार वोट घर बैठे डाले जायेंगे। हर तरफ ख़ुशी का माहौल है, कितना आसन होगा सब कुछ, आधार नंबर डालो, फिर मोबाइल के फिंगर सेंसर से चेक करवाओ और वोट डाल दो, बस हो गया। 5 सालों की लम्बी लड़ाई आखिरकार कल अपना फल देगी। आज रात मुझे बहुत सुकून की नींद आयेगी, आखिरकार इस लड़ाई में मैं सबसे आगे था।

 सुबह जब आँख खुली तो कोई मेरा दरवाज़ा पीट रहा था। दरवाज़ा खोलते ही अचानक से 5-6 लोग मेरे घर में घुस आए। वो हमें घर से बाहर ले आए, बाहर का नज़ारा तो ऐसा लग रहा था कि मानो प्रलय आ गयी हो। हर तरह गुंडे ही गुंडे दिख रहे थे। यहाँ इस समय उनकी ही हुकूमत थी और जबरदस्ती वोट पड़वाए जा रहे थे।

 मैंने निगाह बचा कर देखा तो फ़ोन में कोई सिग्नल आ ही नहीं रहे थे। शायद इन लोगों ने मोबाइल टावर बंद कर दिए थे या मोबाइल जैमर लगाये थे। इस हालातो में मैं किसे बुलाता मदद के लिए। मैं फँस चुका था।

 उन्होंने मुझे और बीवी से मोबाइल एप्प पर लॉग इन करवाया और फ़ोन झटक कर खुद ही वोट डाल दिया। अब इस समय मैं अपनी और अपनी बीवी की जान बचाता या वोट बचाता !

 अब जाके मुझे समझ आया कि पोलिंग बूथ जाने में कष्ट तो होता था पर हम ज्यादा सुरक्षित थे, सुरक्षा हर बूथ पर कड़ी होती थी और सभी उम्मीदवारों की कोशिश होती थी कि हम पोलिंग बूथ पहुँचे और वोट डालके आयें। अगर हम नहीं निकलते तो वोट भी नहीं पड़ता पर अब क्यूंकि कहीं से भी वोट हो सकता है तो अब हर एक कोना, एक एक जगह को सुरक्षित करना नामुमकिन है। इसमें सुरक्षा कर्मियों को दोष देना भी उचित नहीं।

 अभी अपने वोट लुटवाने के बाद मुझे शर्म आ रही है कि क्यों लड़ी इतनी लम्बी लड़ाई बस थोड़े से आराम के लिए और इसके बदले में पुराने बूथ कैप्चरिंग के दिन अब नए रूप में वापिस आ गए। जो लोग इस तरीके से चुन कर आयेंगे उनसे कुछ बेहतर काम की उम्मीद करना तो बेकार ही है।

 मुझे माफ़ करना लोगों..अब एक नई लड़ाई लड़ेंगे। इ वी एम और पोलिंग बूथ को वापिस ला के रहेंगे....।


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