ज़िन्दगी का फलसफ़ा
ज़िन्दगी का फलसफ़ा
ज़िन्दगी का फलसफा यही रहा :
जो अपने बल पर खड़ा रहा !
उसके साथ कोई ना सदा रहा :
अपने कदमों पर अड़ा रहा !
कभी धूप हवा बारिश आई :
कभी कभी झंझवात भी आया !
एक बार जो दुनिया में आ गया :
उसका जाना तय होकर गया !
