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Aarti Sirsat

Abstract

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Aarti Sirsat

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"ये हवाएँ"

"ये हवाएँ"

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ये हवाएँ....मन को चीरते हूए.....

मेरी रूह को छेड़ रही हैं .....

लगता हैं ....छू कर तुम्हें.....

मेरी ओर बढ़ रही हैं .....

ये हवाएँ.....कुछ कह रही हैं ......

लेकर तुम्हारा नाम बह रही हैं .....


गंध तुम्हारा.....

स्पर्श तुम्हारा.....

एहसास एक नया सा साँसों में खोल रही हैं .....

उलझ कर मेरे बालों से खेल रही हैं .....

ये हवाएँ.....कुछ कह रही हैं ......

लेकर तुम्हारा नाम बह रही हैं .....


बार बार टकराकर मुझसे.....

बस एक ही आवाज मेरे कानों में दे रही हैं .....

भटकाकर मुझकोे मुझ से......

तुम्हारा नाम मेरे ध्यान में भर रही हैं ....

ये हवाएँ.....कुछ कह रही हैं ......

लेकर तुम्हारा नाम बह रही हैं .....


कभी दायीं तरफ से.....तो

कभी बायीं तरफ से.....

अपने भँवर में मुझे ये कैद कर रही हैं .....

आकर मेरे करीब तुम्हारी याद दे रही हैं .....

ये हवाएँ.....कुछ कह रही हैं ......

लेकर तुम्हारा नाम बह रही हैं .....


एक मधुर स्वर में कोई.....

नयी धुन पीरो रही हैं .....

मेरी साँसों में समाकर......

प्रभु का आभास करा रही हैं ......

ये हवाएँ.....कुछ कह रही हैं ......

लेकर किशन तुम्हारा नाम बह रही हैं.


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