ये भी है ।
ये भी है ।
नहीं जानती कि क्या लिखूं
ये कहानी है या एक कविता।
बस लिख के अपना मन हल्का करना चाहती हूं
एक कोशिश के बाद मैंने उभरने का प्रयत्न किया था
बस फिर उसकी याद का झटका मुझे तूफ़ान में गेर गया।
ये मुश्किलें है जो खत्म नहीं हो रही
मैंने हद कोशिश कर ली है
मैं नहीं कह सकती किसी से बस इसमें मैं हूं
ये बस मेरे अंदर है।
ये बहुत भारी हो गया है मैं क्या कहूं किससे कहूं ?
ये भी है।
शायद मुझे प्यार करना मुश्किल है ।
मैं नहीं हूं लोगों के लिए ।
उनके लिए बस ख़ुद को उलझा देती हूं ।
ये बस मुश्किल है , बहुत मुश्किल है।
मेरे मन की स्थिति बहुत खराब है।
ये भी है , कि ये लाज़मी नहीं है ।
बहुत समय हो गया है ऐसे रहते हुए। ।
ये अब मुझे अंदर में खत्म कर रहा है
मैं मदद किससे लूं?
कोई इंसान, या कोई और।
कोई है?
जो मुझे सुन सकता है ।
बस एक बार आओ और बस मेरे साथ बैठ जाओ।
फिर चाहे चले जाना ।
वो दुःख और बढ़ेगा।
या मैं कहूं कि कभी मत जाना ।
मैं ये नहीं सह सकती ।
लेकिन ये भी है
मैं ये नहीं कह सकती।
क्या तुम बिन बोले नहीं रुक सकते?
हमेशा के लिए । मेरे पास, मेरे साथ , हम एक साथ।?
चलो ये भी है कि
छोड़ो जो हो रहा है, उसे होने दो।
मुझे ये सहने दो ।
शायद ये होना है ।
बस ये होना ही है।।
