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Meena Mallavarapu

Abstract Inspirational

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Meena Mallavarapu

Abstract Inspirational

यादों का पिटारा

यादों का पिटारा

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यादों के पिटारे में भरी हुई हैं

ठूंस ठूंस कर कितनी ही यादें

 पिटारा बंद न होगा, सभी जानें

 सांसों में जब तक यह सांसें हैं


कब कौन सी याद अचानक आ जाए

कर जाए बेचैन, कहना है मुश्किल

जीते जी मार डाले हमें तिल तिल

उड़ा दे आंखों की नींद,व्यथित कर जाए


कब अनायास मुस्कुराहट आ जाए होंठों पर

कब ख़ुशी की लहर दौड़ जाए तन मन में

 मन पंछी उड़ान भरने लगे नील गगन में

उल्लास-उमंग मलहम लगा दें हज़ार चोटों पर


यादों का पिटारा अद्भुत, जीवन की मधुर कहानी

बिखेरें माधुर्य हमारे जीवन में,कभी कर दें मायूस

रखे इनका अस्तित्व हमें बदग़ुमानियों से महफ़ूज़

मन-मस्तिष्क परआधिपत्य इनका,कहां कोई सानी


यादों के पिटारे के बिना हम कुछ भी नहीं

 कौन सी याद कब कर दे बेताब, बेज़ार

कौन सी याद खुशियां दे जाए हज़ार

 यादों के पिटारे में भर लें सुंदर यादें क्यों नहीं !


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