यादें
यादें
तन्हाइयों में कुछ हल्की सी पुरानी यादें अफसर सताती है,
रातो के सन्नाटे मे जख्म इस दिल का हमेशा खुरेदा करती है।
लगता है इश्क करना भी गुनाह हो गया,
कत्ल तुमने की और सजा हमे दे गया।
यादों मे बारीश के बुंदो की तरह गीर कर तुरंत बिखर जाते हो।
गुलाब की तरह खीलकर, काटे चुभाकर पल मे मुर्झा जाते हो।
कुछ यादें तुम्हारी बर्फ सी जम गई है हमारे अतीत मे,
वक्त वक्त पर एक चित्रपट की तरह गुजर जाया करती है।
कुछ हसीन यादें मृदुल मन को हंसा देती है,
और कुछ यादें आंखों को नम कर देती है।
