थोड़ी देर
थोड़ी देर
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थोड़ी देर मिल जाए खुदा, तो बात करनी है,
दिल मे आई है जो बात, वो बात कहनी है।
थोड़ी देर, जिंदगी इतनी सस्ती क्यो हो गई,
हर राह पर मौत यहां क्यों खड़ी हो गई ।
यह तो तू जानता है कि इन्सान मजबूर है ,
दिमाग उसका गलतियां, पापों से भरपूर है।
पर तेरी क्या मजबूरी है, तू कुछ नही कर पाया,
मौत से पहले मरने वाले इन्सान को बचा नही पाया ।
सभी के मृदुल मन की प्रार्थना अब तू सुन ले,
अब थोड़ी देर मे महामारी का दुख तू हर ले ।
