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Vivek Verma

Romance

5.0  

Vivek Verma

Romance

वो

वो

1 min
266


बड़ी साफगोई से वो सिर्फ़ झूठ कहता रहा,

मैं मुस्कुरा कर मान न लेता तो क्या करता


मुद्दत बाद आया नई शक्ल पुराना शऊर लिए 

मैं उसको पहचान न लेता तो क्या करता


गोया मुझे याद तो रखा था उसने अब तलक

मैं उसका ये अहसान न लेता तो क्या करता


वो मज़बूरियां गिना कर गया अपनी वकालत,

मैं अपने सर इल्ज़ाम न लेता तो क्या करता


मैंने ही सौंपा था उसे दिल भी खंजर भी,

अब वो मेरी जान न लेता तो क्या करता।


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