Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Prashant Mishra

Romance

3  

Prashant Mishra

Romance

वो मेरी मेहबूब नहीं वो मेरी..

वो मेरी मेहबूब नहीं वो मेरी..

1 min
225


वो मेरी मेहबूब नहीं 

वो मेरी दोस्त है 


मैं उससे कुछ कहूं 

उससे पहले वो समझ जाती है 

जब मैं परेशान होता हूं 

ना जाने क्यूँ 

वो भी परेशान होती है. 

यू तो उसपे किसी और का हक है

लेकिन मेरे हक़ जताने पर, 

बड़े प्यार से याद दिलाती है 

वो मेरी मेहबूब नही 

वो मेरी दोस्त है...


जिस दर्द को छुपा कर रखा था 

जो इशारे समझ ना सका कभी जमाना 

उसपे वो मलहम भी लगा देती है 

यार, उसे मैं काफ़ी देर से पाया 

बस इस बात का अफ़सोस है 

वो मेरी मेहबूब नही

वो मेरी दोस्त है 


दिल उसका आईना सा साफ़ है 

बात में ही उसके मेरे हर जख्म का इलाज है 

यार अगर किसी को खो कर भी पाया उसे 

तो भी उससी ज्यादा कीमती है 

यार वो तो कोहिनूर है 

वो मेरी मेहबूब नही 

वो मेरी दोस्त है 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance