STORYMIRROR

Ananya Singh

Abstract

4  

Ananya Singh

Abstract

वो मैं हूं

वो मैं हूं

1 min
292

गुजार दिए होंगे तुमने, कई दिन, महीने, साल 

जो काट न सकोगे वो रात मैं हूं।


की होगी गुफ्तगू, तुमने कई दफा कई लोगो से,

दिल पर को लगेगी वो बात मैं हूं।


भीड़ में जब तन्हा, खुदको तुम पाओगे,

अपनेपन का अहसास जो करा दे, वो साथ मैं हूं।


बिताए होंगे तुमने कई हसीन पल सबके साथ में,

जो भुला ना पाओगे, वो याद मैं हूं।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Ananya Singh

Similar hindi poem from Abstract