वो एक बात
वो एक बात
एक बात यहाँ से निकली थी, एक बात वहाँ तक जा पहुँचीI
वो बात बतानी थी तुमको,वो बात कहाँ तक जा पहुँची।
वो बात जरा सी दिल की थी,जज्बात के दम पर लिखी थी
उस रात वहाँ से उठ कर के इस रात यहाँ तक आ पहुँची।
वो बात बतानी थी तुमको, वो बात कहाँ तक जा पहुँची।
एक 'धूप' सहारा था मेरा, गमगीन किनारा था मेरा,
तकिये से मेरे लिपटा था, वो चाँद-सितारा था मेरा,
प्रेम नही था, कुछ तो था, हर रोज नजर वो आता था
मिलना भी था, ना मिलना भी हर रोज चला वो जाता था,
एक ख्याल था, सवाल था - बे सबब, बेमिसाल था,
दिल के अंदर रखा था,पर आज जुबाँ पर आया जो...
आवाज ये दिल से निकली वो आवाज वहाँ तक जा पहुँची
वो बात - बतानी थी तुमको, वो बात कहाँ तक पहुँची।

