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Prashank Chandra

Romance

4  

Prashank Chandra

Romance

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
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उसकी तो पहचान जुदा है 

मुझसे वह इंसान जुदा है !

मेरी तेरी बात हो कैसे 

अपना तो भगवान् जुदा है !


आँखें उसकी बता रही हैं

दिल से वह नादान जुदा है !

रात ख्वाब में आता है वो 

दिन में वो शैतान जुदा है !


बात सत्य की उट्ठे कैसे 

हम सबका ईमान जुदा है !

मैं तुझको तू मुझको समझे 

यूँ अपनी ज़ुबान जुदा है !


तेरे जैसा सारा जग हो 

अपना ये अरमान जुदा है !


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