STORYMIRROR

Thakkar Nand

Abstract

3  

Thakkar Nand

Abstract

वो बातें मेरे ही जेहन

वो बातें मेरे ही जेहन

1 min
141

वो बातें मेरे ही जेहन में सब दबी निकली 


वो बोलता रहा इक बात ना नयी निकली,

जो उसने बोला वो सब बात ही कही निकली!


सुनाता सबको अगर मैं कहीं गलत होता,

यकीन मानो न मुझमें कोई कमी निकली!


जो शक था मेरा मेरे वो भी सामने आया,

खुशी हुई कि मेरी उलझने सही निकली!


मुझे तलाश थी जिस चीज़ की जमाने में,

वो चीज मेरे ही आंगन में तब छुपी निकली!


भुलाना चाहा तो वो याद फिर बहुत आयी,

वो बातें मेरे ही जेहन में सब दबी निकली!!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract