वक़्त रहते...
वक़्त रहते...
वक़्त रहते बहुत कुछ संभाला जा सकता था,
शहर का शहर मुसीबत से निकाला जा सकता था।
वही लोग जो तस्वीरें बना रहे थे हादसो के,
चाह लेते तो कई हादसो को टाला जा सकता था।
वो तो हमने ख़ुद को अंधेरे मे रखने की साज़िश की,
वरना हम जहाँ तक चाहते हमारे नाम का उजाला जा सकता था।
गर तेरे चलाये हुए तीर मेरे सीने मे है तो
फिर सोच कि तुझ तक भी मेरा भाला जा सकता था।
